गुरुवार, 28 अगस्त 2014

गौ के प्रति हमारा कर्तव्य


गौ के प्रति हमारा कर्तव्य 

देव की कैसी विचित्र गति है कि जिस देश का तीन-चौथाई जन समाज गौ को माता कहकर पूजता है, वहां तो गोवंश का दिन-प्रतिदिन ह्रास हो और जहाँ लोग गो का मांस खाते हैं, वहां वह फले फूले, यह बात बहुत प्रसिद्ध है कि इंग्लैंड, हॉलैंड तथा जर्मनी जैसे देशों में गोएं हिन्दुस्तान की गायों की अपेक्षा औसत हिसाब से तिगुना-चौगुना दूध देती हैं
हिन्दुओं के पतन के साथ गौ के भी बुरे आये गौ के लिए जो प्रगाढ़ आदर और स्नेह हिन्दुओं का अपना विशेष गुण था,वह नष्टप्राय हो गया
हम हिन्दुओं के पूर्व पुरुषों का गौ के प्रति कैसा भाव था यह महाराजा दिलीप और उनकी महारानी की प्रगाढ़ गोभक्ति तथा आदर और प्रेमयुक्त सेवा देखने से पता लगता है, पर जो आदर्श हमारे लिए पूर्वपुरुष हमारे सामने रख गए, उसका हमने क्या आदर किया
अगर इस प्रश्न पर हमविचार से सोचकर अमल करें तो शायद ही गौ माता की रक्षा हो पायेगी अन्यथा वही =ढाक के तीन पात=


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