शनिवार, 27 अगस्त 2016

गाय के दोहे

गाय के दोहे 
होता है जिस का हृदयदया-प्रेम का धाम
उस को देते हैं किशनगौशाला का काम

ऋषि-मुनियों ने सूत सेपूछा - क्या है श्रेष्ठ
फ़ौरन बोले सूत जीगौ सेवा है श्रेष्ठ

कौन काम लाभार्थ है कौन काम परमार्थ
गौ-पालन लाभार्थ हैगौ-सेवा परमार्थ

उस माँ को शत-शत नमनवन्दन बारम्बार
गौ सेवा करता रहेजिस का घर-परिवार

ऐसे मनुआ श्रेष्ठ हैंउन को कहो कुलीन
रहते हैं जो हर घड़ी गौ सेवा में लीन

इक दिन बस यूँ ही कियाहम ने गूगल सर्च
शौक़-मौज़ से कम लगाएक गाय का खर्च

यदि चहरे पर चाहियेरूप और लालित्य
दहीदूधगौ-मूत्र कासेवन करिये नित्य

सीधे दिल तक जायगी अमरित रस की धार
गैया के थन से कभी होंठ लगा तो यार

खान साब! ये हम नहींकहती है कुरआन
गौमाता के पेट में है दौलत की खान

समझा है यूनान नेलगा-लगा कर जोड़
खाओगे गौ-माँस तोबढ़ सकती है कोढ़

इंगलिश में पढ़ कर मुझेज्ञात हुआ ये ज्ञान
गौ गोबर अरु सींग सेफ़स्ल बने गुणवान

एक बार यदि मान लेंमार्टिन का प्रारूप
गौ-गोबर सेतेल केभर सकते हैंकूप

अमरीकाइङ्ग्लेंड भीकरने लगे बखान
अब तो गौ के दूध की महिमा को पहिचान

कोई भी संसार मेंकरता नहीं विरोध
अपना आयुर्वेद हैयुगों युगों का शोध

चलो यहीं पे रोक देंये पगलौट जुनून
एलोपैथिक मेडिसिनदेती नहीं सुकून

अगर गाय की पीठ परफेरे कोई हाथ
हो सकता है छोड़ देबी. पी. उस का साथ

गैया खाये साल में जितने का आहार
उस से दस गुण मोल के देती है उपहार

बछिया होती है अगरमिलें दूध के दाम
बछड़ा भी हो जाय तोकरे खेत का काम

दुद्दू पी कर, भेंस के - पड्डा जी अलसात
लेकिन बछड़ा गाय काकरता है उत्पात

यदि पैसे ही से तुझेसमझ पड़े है मोल
तो भैया फिर दूध सेमट्ठा तक तू तोल

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