सोमवार, 2 जनवरी 2017

पूरी शंकराचार्य महाभाग के वचन। गौ हत्या बन्द हो

पुरी शंकराचार्य महाभाग के वचन
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गौ हत्या बंद हो ...........लेकिन हो रही है बंद क्या ?
तो क्या हमारी प्रार्थना निरर्थक जा रही है क्या ?
प्रार्थना का एक रहस्य बता दें ...प्रभुप्रदत्त – प्राप्त विवेक का समादर करो , अभिमान मत करो...... लेकिन जब कोई प्राप्त शक्ति का उपयोग नही करता और भगवान् से प्रार्थना करता है तो भगवान् बहरे हो जाते है ,.....अरे जितनी शक्ति भगवान् ने दी उसका उपयोग कर और उसका अभिमान मत कर ....जो अपूर्णता है उसके लिए भगवान् से प्रार्थना कर .........हे प्रभु यह जो शक्ति है आपसे ही मिली है ऐसी कृतज्ञता प्रकट करो तो प्रार्थना सफल होगी !
नहीं तो – बहेलिया आवेगा , जाल बिछावेगा , दाना डालेगा .....फसना मत ......
सबसे पहले यह गीत बिना तबला , हारमोनियम के किसने गाया .....नेताओ ने ....... बहेलिया आवेगा , जाल बिछावेगा , दाना डालेगा .....फसना मत .....और सबसे पहले वे फँस गए ......गोहत्या बंद के नाम पर !
हमारे गुरुदेव को गोहत्या बंद के लिए आगे करके जो साधु वेषधारी व्यक्ति आया था वही इंदिरागांधी से मिलकर हमारे महाराज आदि पर प्रहार करवाया ......अब वह करोडो पति बना हुआ है , तीन बार नाम बदल चूका है तब भी वह वृन्दावन में आए तो लगेगा इससे बड़ा गोभक्त विश्व में नही होगा !
गायो को कटवाने में जिन धनियों का हाथ है .....वही गौशाला में जाकर दो हजार का दान देकर दानवीरों में भी अपना नाम लिखवा लेते है .........आखिर प्रार्थना सुनी भी जाए तो कब .....प्राप्त शक्ति का विनियोग करते है क्या गोरक्षा के लिए ....नही न !
भगवान राम ने सुग्रीव से कहा – देख , बाली को  तो मै मारूँगा लेकिन युद्ध के लिए तो तुझे ही जाना होगा ....एक चोट तो खानी पड़ेगी ......समझ गए .....तो शंकराचार्य या अन्य कोई सातवे आसमान की छड़ी घुमा दे और आप हम आराम से पड़ें रहें और सब काम हो जाएं .......ऐसा कभी नही होता !
हमने पुरी के राजा से कह दिया – महाभारत में लिखा है ....जो क्षत्रिय युद्ध से डरता है पृथ्वी उसे निगल लेती है ......जो हिन्दू अपने आदर्श व् आस्तित्व की रक्षा के लिए कटिबद्धता का परिचय नही देता ......जहाँ समर्थ है वहां भी सहयोग नही करता और कहता है सब भगवान् करेंगे ..........तो भगवान् की दृष्टि में वह दण्ड का पात्र हो जाता है तथा भगवान् उसके इस छल को सहन नही कर पाते ........  मोहि कपट छल छिद्र न भावा .....!
दो ही बात है ......गोहत्या बंद हो , यह कहना हम कब बंद करेंगे ........एक तो गाय न रहें ....अब तो लगता है दूसरा पक्ष ज्यादा प्रबल हो रहा है ........पहला पक्ष क्या है ....गोहत्या न हो , तो हम क्यों कहे गोहत्या बंद हो ....जीवित है तभी तो कह रहे है न ..........दूसरा पक्ष इतना प्रबल लग रहा है यह जर्सी आदि रहेंगी , देशी गाय नही रहेंगी तो क्या कहेंगे गोहत्या बंद हो ?                                                            
लेकिन गोहत्या बंद हो कह भी देते है और गुप्त अथवा प्रकट हाथ भी होता ही है ........आप बुरा न माने ...इसी वृन्दावन धाम में .....एक संत के यहाँ मुह से निकल गया ......सारी गाय आपके यहाँ जर्सी है और आप भागवत की कथा कहते है ....गोविन्द जय जय , गोपाल जय जय का कीर्तन करवाते है ...क्या है यह तमाशा ....
उन्होंने बुलाना और मुह देखना ही बंद कर दिया जैसे हमने अपराध कर दिया हो .....अरे भागवत के पंडितो के यहाँ भी यह हाल होगा तो कैसे क्या होगा .....उड़ियाबाबा के ट्रस्ट में मैंने कह दिया मेरा नाम इस पर से हटा दो... क्या है यह सब ? ज्यादा दूध के नाम पर ........विदेशो में देशी नस्ल की गाय से १२० लीटर दूध लिया जा रहा है , क्या वह अनुसन्धान भारत में नही हो सकता ......गोविन्द जय जय कहेंगे और पालेंगे जर्सी ....तो क्या देशी गाय केवल काटने के लिए पैदा होती है ? इस बईमानी से क्या दशा होगी !
इसलिए आत्मनिरीक्षण पूर्वक भगवान् से प्रार्थना करें !!

!! हर हर महादेव !!

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