गुरुवार, 6 जून 2019

गाय की महत्ता और आवश्यकता

गाय की महत्ता और आवश्यकता -3-

                    प्रश्नोत्तर

     प्रश्न‒गाय के घी से आहुति देनेपर वर्षा होती है‒ऐसा शास्त्रों में आता है । आजकल प्रायः लोग गाय के घी से यज्ञ, होम आदि नहीं करते तो भी वर्षा होती ही है‒इसका कारण क्या है ?

     उत्तर‒प्राचीन काल से जो यज्ञ, होम होते आये हैं, उनका संग्रह अभी बाकी है । उसी संग्रह से अभी वर्षा हो रही है । परंतु अभी यज्ञ आदि न होने से वैसी व्यवस्था नहीं रही है, इसलिये कहीं अतिवृष्टि और कहीं अनावृष्टि हो रही है । वर्षा भी बहुत कम हो रही है ।

     प्रश्न‒वर्षा अग्नि में आहुति देने से ही होती है या कर्तव्य का पालन करने से होती है ?

     उत्तर‒कर्तव्य-पालन के अन्तर्गत यज्ञ, होम, दान, तप आदि सब कर्म आ जाते हैं । गीता ने भी यज्ञ आदि को कर्तव्य-कर्म के अन्तर्गत ही माना है । अगर मनुष्य अपने कर्तव्य का पालन करेंगे तो सूर्य, वरुण, वायु आदि देवता भी अपने कर्तव्य का पालन करेंगे और समयपर वर्षा करेंगे ।

     प्रश्न‒विदेशों में यज्ञ आदि नहीं होते, फिर वहाँ देवतालोग वर्षा क्यों करते हैं ?

     उत्तर‒जिन देशों में गायें नहीं हैं अथवा जिन देशों के लोग यज्ञ आदि नहीं करते, वहाँ भी अपने कर्तव्य-कर्म का पालन तो होता ही है । वहाँ के लोग अपने कर्तव्य का पालन करते हैं तो देवता भी अपने कर्तव्य का पालन करते हैं अर्थात् वहाँ वर्षा आदि करते हैं ।

     प्रश्न‒ट्रैक्टर आदि यन्त्रों से खेती हो जाती है, फिर गाय-बैल की क्या जरूरत है ?

     उत्तर‒वैज्ञानिकों ने कहा है कि अभी जिस रीति से तेल खर्च हो रहा है, ऐसे खर्च होता रहा तो लगभग बीस वर्षों में ये तेल आदि सब समाप्त हो जायँगे, जमीन में तेल नहीं रहेगा । जब तेल ही नहीं रहेगा, तब यन्त्र कैसे चलेंगे ? उस समय गाय-बैल ही काम आयेंगे ।

     प्रश्न‒तेल नहीं रहेगा तो उसकी जगह कोई नया आविष्कार हो जायगा, फिर गायों की क्या आवश्यकता ?

     उत्तर‒नया आविष्कार हो अथवा न हो, पर जो चीज अभी अपने हाथ में है, उसको क्यों नष्ट करें ? जो चीज अभी हाथ में नहीं है, भविष्यपर निर्भर है, उसको लेकर अभी की चीज को नष्ट करना बुद्धिमानी नहीं है । जैसे, गर्भ के बालक की आशा से गोद के बालक को समाप्त करना बुद्धिमानी नहीं है, प्रत्युत बड़ी भारी भूल है, महान् मूर्खता है, घोर पाप, अन्याय है । गायों की परम्परा तो युगोंतक चलती रहेगी, पर आविष्कारों की परम्परा भी चलती रहेगी‒इसका क्या भरोसा ? अगर विश्वयुद्ध छिड़ जाय तो क्या आविष्कार सुरक्षित रह सकेंगे ? पीछे को कदम तो उठा लिया और आगे जगह मिली नहीं तो क्या दशा होगी ? इसलिये आगे आविष्कार होगा‒इस विचार को लेकर गायों का नाश नहीं करना चाहिये, प्रत्युत प्रयत्नपूर्वक उनकी रक्षा करनी चाहिये । उत्पादन के जितने उपाय हों, उतना ही बढ़िया है । उनको नष्ट करने से क्या लाभ ? अगर आगे आविष्कार हो भी जाय तो भी गायें निरर्थक नहीं हैं । गायों के गोबर-गोमूत्र से अनेक रोग दूर होते हैं । उनसे बनी खाद के समान कोई खाद नहीं है । गाय के दूध के समान कोई दूध नहीं है । गाय से होनेवाले लाभों की गणना नहीं की जा सकती ।
जय गौ माता

'साधन-सुधा-सिन्धु' पुस्तक से, पुस्तक कोड- 465, विषय- गाय की महत्ता और आवश्यकता, पृष्ठ-संख्या- ९४०, गीताप्रेस गोरखपुर

ब्रह्मलीन श्रद्धेय स्वामीजी श्री रामसुखदास जी महाराज

सोमवार, 3 जून 2019

श्रीकृष्ण और उनकी प्रिय गाये

श्रीकृष्ण और उनकी प्रिय गायें.........

बड़ी ही मधुर लीला है जरूर पढ़े

आगे गाय पाछे गाय, इत गाय उत गाय, गोविन्द को गायन में बसवोई भावे।
गायन के संग धाये, गायन में सचु पाये, गायन की खुररेणु अंग लपटावे॥

गायन सो ब्रज छायो बैकुंठ बिसरायो, गायन के हेत कर गिरि ले उठायो।
छीतस्वामी गिरिधारी विट्ठलेश वपुधारी, ग्वारिया को भेष धरे गायन में आवे॥

भगवान श्रीकृष्ण को गाय अत्यन्त प्रिय है।

भगवान ने गोवर्धन पर्वत धारण करके इन्द्र के कोप से गोप, गोपी एवं गायों की रक्षा की।
अभिमान भंग होने पर इन्द्र एवं कामधेनु ने भगवान को ‘गोविन्द’ नाम से विभूषित किया।

गो शब्द के तीन अर्थ हैं:- इन्द्रियाँ, गाय और भूमि, श्रीकृष्ण इन तीनों को आनन्द देते हैं।

गौ, ब्राह्मण तथा धर्म की रक्षा के लिए ही श्रीकृष्ण ने अवतार लिया है।

            'नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च।
          जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नम:॥'

श्रीरामचरितमानस में भी लिखा है:-

        'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
          निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार॥'

गोमाता मातृशक्ति की साक्षात् प्रतिमा है, वेदों में कहा गया है कि गाय रुद्रों की माता, वसुओं की पुत्री, अदिति-पुत्रों की बहन और घृतरूप अमृत का खजाना है।

भविष्यपुराण में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा है:-समुद्रमंथन के समय क्षीरसागर से लोकों की कल्याणकारिणी जो पांच गौएँ उत्पन्न हुयीं थीं उनके नाम थे - नन्दा, सुभद्रा, सुरभि, सुशीला और बहुला, इन्हें कामधेनु कहा गया है।

संसार में पृथ्वी और गौ से अधिक क्षमावान और कोई नहीं है, ब्राह्मणों में मंत्रों का निवास है और गाय में हविष्य स्थित है।

गाय को सर्वतीर्थमयी कहा गया है, गाय को इहलोक में मुक्ति दिलाकर परलोक में शान्ति दिलाने का माध्यम माना गया है।

श्रीकृष्ण की बाललीला का मुख्य पात्र गौएं ही थीं, श्रीकृष्ण का गाय चराने जाना, उनकी मधुर वंशी ध्वनि पर गायों का उनकी ओर भागते चले आना, श्रीकृष्ण का छोटी उम्र में हठ करके गाय का दूध दूहना सीखना एवं प्रसन्न होना, गाय का माखन चुराना आदि।

नंदबाबा के पास नौ लाख गौएँ थीं।

श्रीकृष्ण कुछ बड़े हुए तो उन्होंने गोचारण के लिए माँ यशोदा से आज्ञा माँगी:-

मैया री! मैं गाय चरावन जैंहौं।
तूँ कहि, महरि! नंदबाबा सौं, बड़ौ भयौ, न डरैहौं॥

श्रीदामा लै आदि सखा सब, अरु हलधर सँग लैहौं।
दह्यौ-भात काँवरि भरि लैहौं, भूख लगै तब खैहौं॥

बंसीबट की सीतल छैयाँ खेलत में सुख पैहौं।
परमानंददास सँग खेलौं, जाय जमुनतट न्हैहौं॥

माता यशोदा का हृदय तो धक्-धक् करने लगा कि इतनी दूर वन में मेरा प्राणधन अकेला कैसे जायेगा।

उन्होंने बहुत समझाया कि बेटा अभी तुम छोटे हो पर कृष्ण की जिद के आगे वह हार मान ही गयीं।

कार्तिकमास के शुक्लपक्ष की अष्टमी को गोचारण का मुहूर्त निकला।
माता यशोदा ने प्रात:काल ही सब मंगलकार्य किये और श्रीकृष्ण को नहला कर सुसज्जित किया।

सिर पर मोरमुकुट, गले में माला, तथा पीताम्बर धारण करवाया, हाथ में बेंत तथा नरसिंहा दिया।

फिर पैरों में जूतियाँ पहनाने लगीं तो कृष्ण ने जूते पहनने से मना कर दिया और माँ से कहा:- ‘यदि तू मेरी सारी गौओं को जूती पहना दे तो मैं इनको पहन लूँगा, जब गैया धरती पर नंगे पाँव चलेगी तो मैं भी नँगे पाँव जाऊँगा।’

श्रीकृष्ण जब तक ब्रज में रहे उन्होंने न तो सिले वस्त्र पहने, न जूते पहने और न ही कोई शस्त्र उठाया।

श्रीकृष्ण ने गोमाता की दावानल से रक्षा की, ब्रह्माजी से छुड़ाकर लाए, इन्द्र के कोप से रक्षा की।

गायों को श्रीकृष्ण से कितना सुख मिलता है यह अवर्णनीय है, जैसे ही गायें कृष्ण को देखतीं वे उनके शरीर को चाटने लगतीं हैं।

हर गाय का अपना एक नाम है, कृष्ण हर गाय को उसके नाम से पुकारते हैं तो वह गाय उनके पास दौड़ी चली आती है और उसके थनों से दूध चूने लगता है, समस्त गायें उनसे आत्मतुल्य प्रेम करती थीं।

गौ के बिना जीवन नहीं, गौ के बिना कृष्ण नहीं, कृष्णभक्ति भी नहीं।
जो व्यक्ति अपने को कृष्ण भक्त मानता है और शारीरिक व मानसिक रूप से वृन्दावन में वास करता है उन्हें तो विशेष रूप से कृष्ण की प्रसन्नता के लिए गोपालन, गोरक्षा व गोसंवर्धन पर ध्यान देना चाहिए।

नमो गोभ्य: श्रीमतीभ्य: सौरभेयीभ्य: एव च।
नमो ब्रह्मसुताभ्यश्च पवित्राभ्यो नमो नम:॥

जय श्री राधे कृष्ण
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शनिवार, 1 जून 2019

"विश्व दूध दिवस" पर विशेष लेख अवश्य पढ़ें

वन्दे गो मातरम....!!
          "विश्व दूध दिवस" पर विशेष लेख अवश्य पढ़ें

    आज "विश्व दूध दिवस" है इसलिये काले दूध की हकीकत जाननी जरूरी है सबसे पहले WHO की रिपोर्ट है कि भारत मे 68% दूध नकली है जिसके कारण भारत मे 2025 तक लोगो मे भयंकर बीमारिया होने वाली है दूसरा सिकर जिले में साढ़े तीन लाख लीटर दूध गाये व अन्य पशुओं के प्रतिदिन का उत्पादन होता है और खपत है 7 लाख लीटर की अब समझ लो काले दूध की हकीकत ये ही नही इसके साथ मावा,घी,पनीर,दही व छाछ सभी वस्तुएं नकली केमिकल से बनाई जाती है और सब लोग खा रहे है और बीमारियों को निमंत्रण दे रहे।
                 उपाय क्या है......?
           सबसे पहले तो जिस परिवार के घर मे गाय रखने की व्यवस्था है वो गाय रखे और शुद्ध दूध प्राप्त करे इसके अलावा सभी गो वर्ती बने संकल्प ले कि में भारतीय वेद लक्षणा गाय का दूध अथवा दूध से निर्मित अन्य चीजें ग्रहण करूँगा अन्यथा सादा रोटी व सब्जी खाऊंगा ....... हमने कभी शुद्ध वस्तू की मांग ही नही की  भारत मे जीतने शराबी है उससे आधे भी गो वर्ती बन जाये तो गली गली में शुद्ध दूध मिलने लग जाये...... पर नही नकली मंजूर है,बीमारी मंजूर है,होटल मे पैसे बर्बाद करना मंजूर है,भयंकर बीमारी से पूरे परिवार में बिखराव मंजूर है.......पर शुद्ध भोजन प्राप्त हो उसके लिये एक विचार करना भी मंजूर नही है......इसे ही तो कलयुग कहते है।
                    गाय नही पालेंगे खेती नही करेंगे
                    तो कैसे शुद्ध आहार प्राप्त करेंगे

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मंगलवार, 21 मई 2019

गौरक्षा के लिए कौन क्या कर रहा है इसके बारे में सोचने से अच्छा है कि हम यह सोचें कि हम गौरक्षा के लिए क्या कर रहे हैं

गौरक्षा के लिए कौन क्या कर रहा है इसके बारे में सोचने से अच्छा है कि हम यह सोचें कि हम गौरक्षा के लिए क्या कर रहे हैं -आज क्या किया और कल इससे भी बेहतर कैसे कर सकते हैं -
गौमाता के नाम पर अच्छा करने वालों के साथ बहुत अच्छा होता है और गलत करने वालों के तंबू भी उखड़ जाते हैं -
जो गौवंश सदियों से भारत का रक्षक रहा है  दुर्भाग्य से आज उसे आपके सहारे की जरूरत है - चंदा देने का मन नहीं है तो बिल्कुल मत दो पर किसी भी गौशाला के उत्पाद तो खरीदो ।
सच मानना मित्रो , गौमाता किसी का अहसान अपने सिर पर नहीं रखती - सौ गुना करके वापस लौटा देती है । बेशक आजमा कर देख लो - 🙏🙏

साधु समाज से गोरक्षा के लिए मेरी विनम्र प्रार्थना:स्वामी रामसुखदासजी महाराज

साधु समाज से गोरक्षा के लिए मेरी विनम्र प्रार्थना

सभी साधु-संतों से मेरी प्रार्थना है कि अभी गायों की हत्या जिस निर्ममता से हो रही है, वैसी तो अंग्रेजों व मुसलमानों के साम्राज्य में भी नहीं होती थी।

हम सभी को मिलकर इसे रोकने का पूर्ण रुप से प्रयास करना चाहिये। इस कार्य को करने का अभी अवसर है और इसका होना भी सम्भव है। गाय के महत्व को आप लोगों को बतायें, क्योंकि आप तो स्वयं दूसरों को बताने में समर्थ हैं।

यदि प्रत्येक महन्त व मण्डलेश्वर चाहें तो हजारों आदमियों को गोरक्षा के कार्य हेतु प्रेरित कर सकते हैं। आप सभी मिलकर सरकार के समक्ष प्रदर्शन कर शीघ्र ही गोवंश के वध को पूरे देश में रोकने का कानून बनवा सकते हैं।

यदि साधु समाज इस पुनीत कार्यको हिन्दू-धर्म की रक्षा हेतु शीघ्र कर लें तो यह विश्वमात्र के लिये बड़ा कल्याणकारी होगा।

अभी चुनाव का समय भी नजदीक है। इस मौके पर आप सभी एकमत होकर यह प्रस्ताव पारित कर प्रदर्शन व विचार करें कि हर भारतीय इस बार अन्य मुद्दों को दरकिनार कर केवल उसी नेता या दल को अपना मत दे जो गोवंश-वध अविलम्ब रोकने का लिखित वायदा करे तथा आश्वस्त करे कि सत्ता में आते ही वे स्वयं एवं उनका दल सबसे पहला कार्य समूचे देश में गोवंश-वध बंद कराने का करेगा।

देशी नस्ल की विशेष उपकारी गायों के वशं तक के नष्ट होने की स्थिति पैदा हो रही है, ऐसी स्थिति में यदि समय रहते चेत नहीं किया गया तो अपने और अपने देशवासियों की क्या दुर्दशा होगी? इसका अन्दाजा मुश्किल है।

आप इस बात पर विचार करें कि वर्तमान में जो स्थिति गायों की अवहेलना करने से उत्पन्न हो रही है, उसके कितने भयंकर दुष्परिणाम होंगे। 1947 के बाद भी भारत में गायों की हत्या जैसा जघन्य अपराध भी नहीं रोका जा सकता तो यह कितने आश्चर्य और दु:ख का विषय होगा।

आप सभी भगवान्‌ को याद करके इस सत्कार्य में लग जावें कि हमें तो सर्वप्रथम गोहत्या बन्द करवानी है, जिससे सभी का मंगल होगा। इससे बढ़कर धर्म-प्रचार का और क्या पुण्य-कार्य हो सकता है।

पुन: सभी से मेरी विनम्र प्रार्थना है कि आप सभी शीघ्र ही इस उचित समय में गायों की हत्या रोकने का एक जनजागरण अभियान चलाते हुए सभी गोभक्तों व राष्ट्रभक्तों को जोड़कर सरकार को बाध्य करके बता देवें कि अब तो गोहत्या बन्द करने के अतिरिक्त सत्ता में आरुढ़ होने का कोई दूसरा उपाय नहीं है।

साथ ही यह भी स्पष्ट कर दें कि जनता-जनार्दन ने देश में गोहत्या बंद कराने का दृढ़ संकल्प ले लिया है ।

गाय के दर्शन, स्पर्श, छाया, हुँकार व सेवा से कल्याण, सुखद- अनुभव, सद्‌भाव एवं अन्त:करण की पवित्रता प्राप्त होती है। गाय के घी, दूध, दही, मक्खन व छाछ से शरीर की पुष्टि होती है व निरोगता आती है।

गोमूत्र व गोबर से पञ्चगव्य और विविध औषधियाँ बनाकर काम में लेने से अन्न, फल व साग-सब्जियों को रासायनिक विष से बचाया जा सकता है। गायों के खुर से उड़ने वाली रज भी पवित्र होती है; जिसे गोधूलि-वेला कहते हैं, उसमें विवाह आदि शुभकार्य उचित माना जाता है।

जन्म से लेकर अन्तकालतक के सभी धार्मिक संस्कारों में पवित्रता हेतु गोमूत्र व गोबर का बड़ा महत्व है। गाय की महिमा तो आप और हम जितनी बतायें उतनी ही थोड़ी है, आश्चर्य तो यह है सब कुछ जानते हुए भी गायों की रक्षा में हमारे द्वारा विलम्ब क्यों हो रहा है?

गाय की रक्षा करने से भौतिक विकास के साथ-साथ आर्थिक,  व्यावहारिक,  सामाजिक, नैतिक, सांस्कृतिक एवं अनेकों प्रकार के विकास सम्भव हैं, लेकिन गाय की हत्या से विनाश के सिवाय कुछ भी नहीं दिखता है।

अतः अब भी यदि हम जागें तो गोहत्या को सभी प्रकार से रोककर मानव को होने वाले विनाश से बचा सकते हैं । गो-सेवा, रक्षा, संवर्धन तथा गोचर भूमि की रक्षा करने से पूरे संसार का विकास सम्भव है।

आज गोवध करके गोमांस के निर्यात से जो धन प्राप्त होता है उससे बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। इसलिये ऐसे गोहत्या से प्राप्त पापमय धन के उपयोग से कथित विकास ही विनाशकारी हो रहा है। यह बहुत ही गम्भीर चिन्ता का विषय है।

अन्त में सभी साधु समाज से मेरी विनम्र प्रार्थना है कि अब शीघ्र ही आप सभी और जनता मिलकर गोहत्या बन्द कराने का दृढ़ संकल्प लेने की कृपा करें तो हमारा व आपका तथा विश्वमात्र का कल्याण सुनिश्चित है।

इसी में धर्म की वास्तविक रक्षा है और धर्म-रक्षा में ही हम सबकी रक्षा है ।
   
प्रार्थी :- स्वामी रामसुखदास (‘कल्याण’ वर्ष-७८, अंक ४)   

आशा करता हूँ कि स्वामी जी रामसुखदास जी महाराज की यह दर्दभरी प्रार्थना आपके हृदय को गौमाता की वर्तमान- स्थिति से व्यथित करके, आपके हृदय में करुणा, दया और सेवा का भाव पैदा करके आपको गौ-सेवाके लिये प्रेरित करें। आप अपने- अपने क्षेत्र में स्वामीजी महाराज के इस विचार को जनता तक, सन्तों तक प्रादेशिक प्रिंट- मिडिया, इलेक्ट्रोनिक मिडिया द्वारा पहुचाये।

बुधवार, 8 मई 2019

कोई और करें न करें। आप धर्म का चयन करे। अपने कर्त्तव्य का चयन करे।

आज गौमाता का हाल बेहाल  है। वो थोड़े से खाने की आशा लेकर हमारे द्वार पर आती है। ऐसे में हमारा कर्त्तव्य क्या बनता है...?

उसे डंडा दिखाकर भगा दे ??? या एक रोटी या घर में रखा कोई और खाना उसे दे। ताकि उसकी थोड़ी सी भूख शांत हो सके। और अगर वो भी ना हो सके तो थोड़ा सा पानी का आग्रह तो हम कर ही सकते है।

जो परमात्मा/ईश्वर, हमारे आराध्य श्री कृष्ण, प्रत्येक जीव में वास करते है, जो समस्त सृष्टि के आधार है, जिनकी पूजा हम प्रतिदिन करते है, वे प्रेम और भक्ति से दिया हुआ एक फूल, एक पत्ती, एक फल या थोड़े से जल से भी तृप्त हो जाते है। गौमाता सामने से चलकर हमारे द्वार पर आकर हमें एक अच्छे कर्म करने का, पुण्य कमाने का, भक्ति युक्त कर्म करने का मौका देती है।क्या इस मौके को आप गौमाता को भगाकर ऐसे ही व्यर्थ जाने देंगे?

कई भाई कहते है कि उसके मालिक को उसका ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि वो उसका दूध लेता है।

इस बात पर गौर करे भाइयों, कि दूध के पैसे उसके मालिक ने हमसे लिए। गौमाता ने नहीं। और अगर वो हमने कर्त्तव्य पथ से हट जाए, तब भी हमारा कर्त्तव्य यही हो जाता है कि हमारे द्वार पर जब वो आए तो हम अपने शक्ति अनुसार उसकी सेवा कर ले। अगर गाय का मालिक गौमाता का ध्यान न रखे, और ऐसी लाचार जीव को और दुःख देकर आप सुखी नहीं हो सकते।

आप हर रोज़ रात नौ बजे तक भरपेट खाना खाकर अपने क्षुधा को शांत कर लेते है। लेकिन बादमे बाहर निकलकर देखिए। गौमाता उतने रात को भी खाना तलाश रही होती है। कभी कागज़ खाती है तो कभी प्लास्टिक। कचरे के ढेर पर खड़ी गौमाता को देखकर कुछ तो अपने धर्म का चिन्तन करे

कोई और करें न करें। आप धर्म का चयन करे। अपने कर्त्तव्य का चयन करे।

कृष्ण सदा गौमाता के पास थे। अगर आप गौमाता के पास है, तो आप कृष्णा के बहोत पास है....

।जय गौमाता जय गोपाल।

गौशाला में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे

गोवंश में ज्यादातर जीवाणु और विषाणु जनित रोग होते है इसलिए गायो को स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए गोवंश के बाड़े की साफ-सफाई बहुत जरूरी है।

ज्यादातर गौशाला में गोपालक साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते है जिससे गोवंश को गंभीर बीमारी होती और गोपालक को उसका महंगा इलाज कराकर काफी खर्च उठाना पड़ता है। अगर गोशाला में गोवंश की सही से देख-रेख की जाए तो काफी हद तक गोवंश को संक्रमण फैलने से बचाया जा सकता है।

गौशाला में स्वच्छता

गौशाला को स्वच्छ रखने के लिए दिन में कम से कम दो बार गोबर और गोमूत्र की सफाई करें। जब गायो को चरागाह में अथवा बाड़े में भेजा जाता है वह सफाई का उचित समय होता है। सफाई के लिए प्रति 50 गौवंश पर एक मजदूर लगाना चाहिए ।

गाय मनोकामना पूर्ण करती है

गाय मनोकामना पूर्ण करती है

भगवान ने गाय को लोक कल्याण के लिए ही बनाया है। वह सभी का हित चाहती है।
भगवान ऐसे प्राणी को परोपकार के लिए आशीष देने का सामर्थ्य प्रदान करता है। गाय मे भी वह सामर्थ्य है।

इस सम्बन्ध मे एक सच्ची घटना कल्याण के (गो सेवा अंक से)

कुछ वर्ष पूर्व एक दिन एक मुसलमान सज्जन श्री गणपति गंगा गोशाला, वृजघाट मे एक ट्रक भुसा लेकर आये।

उन्होंने अपने को नवाब खानदान का मुसलमान बताया।

उनसे पूछा गया की 'वे भुसा किस उद्देश्य से और किसकी प्रेरणा से गोशाला लाये।'

उनके कथनानुसार 'उनकी खानदानी जायदाद का एक मुकदमा लम्बे अरसे से चल रहा था। जायदाद के सम्बन्ध मे मुस्लिम कानून बहुत पेचीदा है और उस मुकदमे का उनको अपनी जिंदगी मे फैसला होने का कोई उम्मीद नही थी।बहुत ही परेशान थे। उन्होंने अपने एक हिन्दू मित्र से अपनी इस परेशानी के हल होने का उपाय पूछा।'

उनके मित्र ने उन्हें सलाह दी कि 'वे गौ सेवा करे, उसका आशीष ले तो उनका काम बन सकता है'।

उन्होंने पूछा की सेवा किस तरह करे तो उनके मित्र ने बताया कि 'गायो के लिए भुसा या हरा चारा दे।'

उन्होंने कहा की यदि मुकदमा उनके हक मे हो जाय तो वे गोशाला जाकर गायो को एक ट्रक भुसा देगे।

उनका कहना था की जिस दिन से उन्हीने यह इरादा किया मुकदमा उनके हक मे जाने लगा और उनके हक मे फैसला हो गया। इसलिए अपना इरादा पूरा करने के वास्ते वे यह भुस लेकर आये है।'

ऐसी है गौ माता की कृपा। आप भी आवारा भटकती गाय को भुसा व पानी की व्यवस्था करे
निश्चित ही गौ माता आपकी हर मनोकामना पूर्ण करेगी।

जय गौमाता जय गोपाल

शनिवार, 13 अप्रैल 2019

एक महत्वपूर्ण पोस्ट। ध्यान से पढ़े।

जय श्री कृष्णा।
एक महत्वपूर्ण पोस्ट। ध्यान से पढ़े।
कल्पना कीजिए के आपके द्वार पर एक स्री / औरत आती है और कुछ खाना देने का आग्रह करती है। वेश भूषा से शायद वो आपके माँ की उम्र की हो, या शायद आपकी बहन की।
उसे देखकर आपको महसूस होता है कि वो निराधार और लाचार है। और भूख और प्यास के कारण आपसे थोड़ी सी खाना मिल जाने की आशा रखती है। शायद ऐसा इसलिए हो क्योंकि उसके परिवार वालो ने उसे त्याग दिया हो। उसका ध्यान नहीं रखा हो।
इसलिए वो थोड़ा सा भोजन पाने की आशा से आपके द्वार पर आपको पुकारती है।
आप क्या करेंगे ???
उसे मना कर देंगे और मुँह फेर लेंगे। या अपने शक्ति अनुसार उसे कुछ भोजन देंगे ???
भाइयों। आज गौमाता का यही हाल है। वो थोड़े से खाने की आशा लेकर हमारे द्वार पर आती है। ऐसे में हमारा कर्त्तव्य क्या बनता है ?
उसे डंडा दिखाकर भगा दे ??? या एक रोटी या घर में रखा कोई और खाना उसे दे। ताकि उसकी थोड़ी सी भूख शांत हो सके। और अगर वो भी ना हो सके तो थोड़ा सा पानी का आग्रह तो हम कर ही सकते है।
जो परमात्मा/ईश्वर, हमारे आराध्य श्री कृष्ण, प्रत्येक जीव में वास करते है, जो समस्त सृष्टि के आधार है, जिनकी पूजा हम प्रतिदिन करते है, वे प्रेम और भक्ति से दिया हुआ एक फूल, एक पत्ती, एक फल या थोड़े से जल से भी तृप्त हो जाते है। गौमाता सामने से चलकर हमारे द्वार पर आकर हमें एक अच्छे कर्म करने का, पुण्य कमाने का, भक्ति युक्त कर्म करने का मौका देती है। क्या इस मौके को आप गौमाता को भगाकर ऐसे ही व्यर्थ जाने देंगे ???
कई भाई कहते है कि उसके मालिक को/रबारी को उसका ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि वो उसका दूध लेता है।
इस बात पर गौर करे भाइयों, कि दूध के पैसे रबारी ने हमसे लिए। गौमाता ने नहीं। और अगर वो हमने कर्त्तव्य पथ से हट जाए, तब भी हमारा कर्त्तव्य यही हो जाता है कि हमारे द्वार पर जब वो आए तो हम अपने शक्ति अनुसार उसकी सेवा कर ले। अगर गाय का मालिक गौमाता का ध्यान न रखे, और ऐसी लाचार जीव को और दुःख देकर आप सुखी नहीं हो सकते।
कम से कम आप अपने घर पर काटी गई सब्जी का बचा हुआ वेस्ट भी हर रोज़ डालेंगे तब भी बहोत बड़ा फर्क पड़ जाएगा।
इस बात पर भी ध्यान दे की दूध का व्यापार कोई बहोत फायदे का व्यापर नहीं है। काफी मेहनत लगती है। एक बार करके देखिए, आपके संदेह दूर हो जाएंगे। रबारी/गाय के मालिक आपको बताएँगे कि गौचर ज़मीन जहाँ पहले गाय चरती थी, वहां हमने अपने मकान बना लिए है। इंसान हर कहीं अपना विस्तार फैला देते है, ऐसे में क्या गौमाता और उसके मालिक को शहर के बाहर निकाल देंगे ???
हम अगर लाखों - करोडो रुपए के मकान में रह सकते है, तो बाहर एक गौमाता के लिए ३०० से ४०० रुपये का एक चाट रखकर, घर में बचा खाना/पहली रोटी भी देकर गौमाता की भूख कम कर सकते है। उसे यह महसूस करवा सकते है कि आपके रहते वो निराधार और लाचार नहीं है।
गौमाता चाट हमेशा साफ़ रहता है। कभी गंदा नहीं होता। चित्र में देखे।
थोड़ा सा खाना दे देने से कोई गरीब नहीं हो जाता ? क्या आपने कभी सुना की कोई अतिथि को भोजन करवा करवाकर कर्ज़े में डूब गया या दिवालिया हो गया? किसी को खाना खिलाकर कोई बहोत बड़ा खर्चा नहीं हो जाता, कोई गरीब नहीं हो जाता।
आप हर रोज़ रात नौ बजे तक भरपेट खाना खाकर अपने क्षुधा को शांत कर लेते है। लेकिन बादमे बाहर निकलकर देखिए। गौमाता उतने रात को भी खाना तलाश रही होती है। कभी कागज़ खाती है तो कभी कभी प्लास्टिक।
यह बात सदैव याद रखे कि हमारे दादा-परदादाओ के साथ गौमाता ने सबसे अधिक मेहनत की। खेती में, दूध व्यवसाय में, हर प्रकार से अपना पूरा जीवन हमें प्रगति करवाने में समर्पित किया। आज हम जो कुछ भी है, वो उसके योगदान के बिना संभव हो ही नहीं सकता था।
कोई और करें न करें। आप धर्म का चयन करे। अपने कर्त्तव्य का चयन करे।
कृष्ण सदा गौमाता के पास थे। अगर आप गौमाता के पास है, तो आप कृष्णा के बहोत पास है।
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जय श्री कृष्णा।

शुक्रवार, 29 मार्च 2019

गौ पालन हमारी और देश की आवश्यकता है।

प्रश्न - गौ पालन पर आने वाले खर्च को आम व्यक्ति नहीं उठा सकता। और गो को जीवित रख कर कोई "लाभ" नही है अतः गो वध जायज़ है।
उत्तर - हम सरकार चुनते ही इसलिए है कि वो इस प्रकार का खर्च करे। जैसे सड़क निर्माण। चलती जनता है पर निर्माण सरकार कराती है।
मूल बात ये है यहाँ पर कि हमें गाय पालन में विकास नहीं दिख रहा है जबकि सड़क निर्माण में विकास दीखता है।
ऐसा क्यों?
ऐसा ज्यादातर उन लोगो को लगता है जो ज्यादा भौतिकवादी होते है या संसार को केवल स्थूल दृष्टी से देखते है।
ऐसे लोगों की निगाह में किसान केवल एक मजदूर होता है जबकि वास्तव में वो सृजनकर्ता है। इंजीनियर होता है किसान।
बाकि भैंसे का दूध पिने वालो को ये बात समझ आनी कठिन है।
अब जरा ये समझे।
एक गाय अपने जीवन में जितना खाती है उससे ज्यादा का गोबर और मूत्र देती है। गाय के गोबर और मूत्र को शोधन करके अनेक प्रकार के लाभ मिल सकते है। ये विज्ञान द्वारा सिद्ध है।
भारत सरकार जितने मूल्य का खाद/यूरिया खरीदती है उतने का खर्च बच सकता है। यदि सरकार देसी खाद बनवाये गाय के गोबर और मूत्र से। और कोई भी गाय अपने पुरे जीवन में गोबर और मूत्र देती ही रहती है।
दूध का मूल्य तो अलग है ही।
ये बात भी प्रमाणित है कि देसी खाद से अन्न की पौष्टिकता ज्यादा होती है। लबे समय प्रयोग से हमारी जीवन शक्ति बढ़ती है। हम कम बीमार पढ़ेंगे तो दवाई कम खायेगे। और सीधे सीधे विदेशी कंपनियो को देने वाली लागत बचेगी। ये भी लाभ है।
एक और लाभ बताता हु।
लंबे समय तक यूरिया इस्तेमाल करने से ज़मीन की उर्वरकता खत्म हो जाती है। और वो जमींन बंजर हो जाती है। देश में ज्यादा बंजर ज़मीन होने पर खेती कम हो पाती है। फिर सरकार को अन्न की कमी को पूरा करने ले लिए अन्न को आयात करना पड़ता है। और अपना धन खर्च करना पड़ता है।
अगर हम देशी खाद इस्तेमाल करे तो जमीन बंजर नहीं होगी और फिर अन्न की कमी नहीं होगी और फिर हमें अपनी जमा पूंजी विदेशियो को नहीं देनी पड़ेगी। ये भी लाभ ही है।
अतः गौ पालन हमारी और देश की आवश्यकता है।
जय राम जी की

शुक्रवार, 22 मार्च 2019

माँ के दूध का ऋण

माँ के दूध का ऋण ,,,,,,,,
एक बार एक व्यक्ति अपनी गाय किसी अनजान व्यक्ति को बेचने लगा ! यह देख गाय हंसने लगी ! वह व्यक्ति बोला तुम क्यों हंस रही हो !
,,,,,,," हे मानव !!! जिंदगी भर मेने कुछ नहीं खाया ( जिससे तेरा अहित हो ) केवल घास फूस खाकर मेने तुझे "अमृत " ( पांच अमृत है - गाय का दूध , दही , घृत ,शहद एवं गन्ना ) दिया !
गोमाता बोली (१) मेने तुझे अपना दूध पिलाया वो दूध जिस पर मेरे बछड़े का हक़ था !
(२) वो दूध जिससे तेरी काया निरोगी और " मन सुन्दर" यानि मनो विकारों से रहित एवं देवक प्रवृतियों (सकारात्मक ऊर्जा ) से परिपूर्ण / आध्यात्मिक प्रवृति का निर्माण होता है !
( ३) मेने वो गोबर दिया जिससे खेत की भूमि उर्वरक एवं तेरे खेतों में पैदा होने वाला अन्न दैविक ऊर्जा से पोषित हुआ और उससे तेरे विचार तपस्वियों, देवताओं ,एवं योगियों जैसे सुन्दर एवं अध्यात्म से परिपूर्ण निर्मित हुए ! इसी लिए तो ऋषियों ने कहा है की मेरे गोबर में लक्ष्मी का वास  ( खनिज तत्व जो देविक ऊर्जा देते है ) है !
( ४) मेरे होने से तेरे घर का वास्तु दोष समाप्त हुआ !
(५) मेरे खुरों में सर्प का वास होने के कारण कालसर्प तेरे नजदीक भी नहीं दिखाई देता है !
(६) मेरा अमृत जैसा दूध पीकर तू अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण कर सका !
( ७) और अंत में मुझ "स्वर्गदात्री के कारण परलोक में स्वर्ग का अधिकारी बना !
माँ आगे बोली ,,,,,,,, तू जिस व्यक्ति को मुझे बेच रहा है वह एक कसाई है जो मुझे भयंकर एवं दर्दनाक मौत देगा ! वो मेरे शरीर की चमड़ी को नरम करने के लिए उबलता हुआ पानी मेरे ऊपर डालेगा , मुझे भूखा रखेगा , मुझे उलटा लटकाएगा ,मेरे ऊपर हंटरों से वार करेगा जिससे मेरा होमोग्लोबिन मेरी चमड़ी से चिपक जाय और चमड़ी किसी प्रकार नरम हो जाय ! इतना ही नहीं वह मेरी चमड़ी मेरे जीवित रहते ही उतारेगे जिससे मेरा खून चमड़ी पर ना जम सके !
हे मानव ! क्या मेरे दूध का ऋण ------- " ऐसी दर्दनाक मेरी मौत है "
विशेष ,,,,,, जरा सोचिये --- गाय एक परोपकारी आत्मा है ! अगर आप उसे ऐसी भयंकर एवं दर्दनाक मौत के लिए बेचेंगे या विवश करेंगे तो आप के प्रारब्ध ( भाग्य ) में कैसा पाप संचित होगा ! इस पर विचार करिये !!!!!!!!!!,,,,, मेरे विचार से ऐसे व्यक्तियों का परलोक में वास दर्द एवं दुखों से परिपूर्ण होगा यानि "नरक लोक  (रौरव नरक ) की भयंकर यातनाए "!
नीति -- UPA हो या  NDA  की सरकार  गौमांस   का निर्यात कर /बेचकर अपनी तिजोरी भरने के लिए कसाई घरों को सब्सिडी /अंशदान के साथ लाइसेंस देते है और विश्व में भारत को  ( बीफ )  गोमांस का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना दिया है !  आप ऐसी सरकारों को चुनाव में वोट देकर गौ की नृशंस हत्या के पाप से शापित होना चाहोगे !  शायद नहीं !!!!  तो इनको अपना विशवास मत ना दे चाहे आपके परिवार का सगा सदस्य ही क्यों ना हो !  गौ रक्षा का प्रण   ले और पुण्य कमाएं ! 
हमेशा याद रखिये गाय एक ब्राह्मण है और ब्राह्मण की हत्या से ब्रह्म दोष लगता है यानि आपके जीवन में ब्रह्म गया / आध्यात्म ज्ञान कभी नहीं आएगा और  दोष ६ गुणा फलित होता है यानि सबसे बड़ा पाप लगेगा ! ऐसा पाप जिससे सभी देवी देवता रुष्ट होते है जो सुख समृद्धि देने वाले है !
यदि आप गौ हत्या नहीं चाहते तो  " हाँ या ना  " में जबाब दे जिससे आपकी आवाज सरकार तक पहुंचे !
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" जीवन का सत्य आत्मिक कल्याण है ना की भौतिक सुख !"
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जिस प्रकार मैले दर्पण में सूर्य देव का प्रकाश नहीं पड़ता है उसी प्रकार मलिन अंतःकरण में ईश्वर के प्रकाश का प्रतिबिम्ब नहीं पड़ता है अर्थात मलिन अंतःकरण में शैतान अथवा असुरों का राज होता है ! अतः ऐसा मनुष्य ईश्वर द्वारा प्रदत्त अनेक दिव्य सिद्धियों एवं निधियों का अधिकारी नहीं बन सकता है !
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"जब तक मन में खोट और दिल में पाप है, तब तक बेकार सारे मन्त्र और जाप है !"
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,,,,सच्चे संतो की वाणी से अमृत बरसता है , आवश्यकता है ,,,उसे आचरण में उतारने की ....
सर्वदेवमयी यज्ञेश्वरी गौमाता को नमन
जय गौमाता की 
शरीर परमात्मा का दिया हुआ उपहार है ! चाहो तो इससे " विभूतिया " (अच्छाइयां / पुण्य इत्यादि ) अर्जित करलो चाहे घोरतम " दुर्गति " ( बुराइया / पाप ) इत्यादि !
परोपकारी बनो एवं प्रभु का सानिध्य प्राप्त करो !
प्रभु हर जीव में चेतना रूप में विद्यमान है अतः प्राणियों से प्रेम करो !
शाकाहार अपनाओ , करुणा को चुनो !
choice is yours . 