पत्रकार व मीडियाकर्मी, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
वर्तमान युग सूचना क्रांति का युग है। बीसवीं इक्कीसवीं शताब्दि की सबसे असरकारी बहुप्रचारित घटना है सूचना विस्फोट। पत्रकार व मीडिया कर्मी सूचना युग के युग प्रवर्तक व युग निर्माता है। लोकतंत्र का यह स्तम्भअपनी निष्पक्षता, तत्परता एवं ज्ञानशीलता के चलते जनसामान्य के हृदय पर राज कर रहा है। गोरक्षा, गो संवर्धन तथा गो सेवा हेतु आम जन को शिक्षित, प्रेरित, सक्रिय करने का उत्तरदायित्व इस वर्ग का बनता है। निम्न बिंदुओं पर विचार और क्रियान्वयन आवश्यक है :-
१. पत्रकार अपने लेखों का विषय गोसेवा, गो संवर्धन को बनावें ।
२. विभिन्न टी वी चैनलों पर गोरक्षा, गोसंवर्धन से सम्बंधित समाचार प्रमुखता से प्रसारित करें ।
३. गो सेवा, गोरक्षा, गो संवर्धन सम्बंधी विषयों पर विशेष कार्यक्रम, छोटा चलचित्र बनाइ जावें तथा विभिन्न चैनल इन्हे प्रसारित करें ।
४. गोहत्या एवं उससे राष्ट्र को हानि जैसे विषयों पर भी लगातार समाचार व कार्यक्रम प्रसारित करें।
५. समाचार पत्रों में गौहत्या संबंधी खबरें प्रमुखता से छापी जावें ताकि प्रशासन पुलिस की नींद उडे व कार्यवाही हो ।
६. गोहत्यारों को यदि सजा न मिले तो ऐसी खबरे भी समाचार पत्रों में छापें, न्यूज चैनल से प्रसारित करे। ताकि कारगर कानून व क्रियान्वयन हेतु वातावरण तैयार हो सके ।
७. गोशालाओं पर आधारित समाचार छापें । लेख तैयार कर प्रकाशित करवाएं । आम जनता में गोशाला श्रध्दा केन्द्र बने ऐसा वातावरण तैयार हो ।
८. पंचगव्य उत्पाद जैसे मंजन, धूप बत्ती, शैम्पू, उबटन, स्नान चूर्ण (अंगराग पाउडर), मालिश तेल इत्यादि की उपयोगिता पर आधारित लेख व समाचार प्रकाशित, प्रसारित करें।
९. गोपर्व व गौ उत्सवों यथा बलराज जयंती (हलधर षष्ठी), श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गोपाष्टमी, गोवत्स व्दादशी, मकर संक्रांति इत्यादि के समाचार समाचार पत्रों में प्रकाशित हों। इन पर लेख लिखकर प्रकाशित करवाएँ। टी वी चैनलों पर इन कार्यक्रमों के समाचार तथा इनका सीधा प्रसारण भी करें।
१०. जैविक कृषि, डेप खाद, मशीनों की बजाय बैलो से कृषि का महत्व इत्यदि विषयों पर समाचार, लेख, कार्यक्रम प्रकाशित प्रसारित करें ।
११. जर्सी गाय, भैंस की तुलना में, देसी गाय से प्राप्त होनेवाले दूध, दही, घृत, गोमूत्र व गोमय में वैज्ञानिक रुप से अधिक लाभप्रदता व गुणवत्ता होती हैं, इस आशय संबंधी तथ्यों को तथा अनुसंधानो को जनसामान्य तक लेख / वृत्तचित्रों व अन्य कार्यक्रमों द्वारा पहुँचाये।
१२. रासायनिक कीटनाशक व उर्वरकों के भूमि की उर्वराशक्ति व उत्पादनक्षमता व पर्यावरण पर पडनेवाले दुष्प्रभावों इनसे उत्पादित खाद्यान्नों का जनस्वास्थ्य पर होनेवाले दुष्परिणामों को किसानों व आम जनता तक पहुँचाये।
१३. अॅलोपॅथी औषधियों की तुलना में पंचगव्य चिकित्सा व औषधि की सर्व सुलभता, अधिक प्रभाव गुणवत्ता संबंधी तथ्यों को लेख विविध कार्यक्रमों द्वारा पहुँचाये।
१४. गोवंश के चमडे, चर्बी व हड्डियों से निर्मित खाद्य पदार्थ औषधी, सौंदर्य प्रसाधन अन्य हिसंक उत्पादोंके उपयोग संबधी विज्ञापन प्रकाशित /प्रसारित न करें।
१५. ऐसे हिंसक उत्पादों विरोध में जन-आंदोलन खडा करने हेतु अपने सशक्त माध्यम का उपयोग करें।
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