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शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2014

गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे॥

॥ श्री गोमाता भजन ॥
गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे॥
झूठी जग की माया प्रभु का ही सच्चा नाम।
गौ माता की सेवा ही सबसे बढ़कर काम है।
गौ माता की सेवा से खुश होते भगवान रे॥
गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे....
मोटर बग्घी बंगला न साथ तेरे जा पाएँगे।
सखा भ्रात सुत नाती इस धन को व्यर्थ गवाएंगे।
इस दौलत को प्यारे तूँ क्यों करता बेकार रे॥
गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे....
न साथ में कुछ तूँ लाया, न साथ में कुछ ले जायेगा।
मुट्ठी बांधे आया है ओर हाथ पसारे जायेगा।
पूंछ पकङकर गौ की कर वैतरणी पार रे॥
गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे....
जनम मनुष्य का पाया, नेक काम कोई तूं कर ले।
कहता है ये गौ प्रेमी, तू नेह गऊ से कर ले।
गौ माता की सेवा से भरते हैं भण्डार रे॥
गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे....

हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम ! (भजन)

हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम !
मंगलदातृ हे गोमाता, हम सब करते तुम्हें प्रमाण।
दूध दही देती कल्याणी, औ असंख्य हैं तेरे नाम॥
कामधेनु है तु सुरभी है, विश्वरूप तू सुख का धाम।
सर्वरूप हैं तेरे जननी, तीर्थरूप रूप तू श्यामाश्याम॥
वेदों में है कीर्ति छा रही, अध्न्या भी है तेरा नाम।
परमपवित्र तेजमय तू है, तुष्टि तुष्टिमय तेरा धाम॥
वृन्दावन में कृष्ण कन्हैया, तुझे पालते आठों याम।
दूध दही मक्खन मिश्री से खेल खेलते हैं घनश्याम॥
देश हमारा तब कहलाता, सुखसमृद्वि का शोभाधाम।
घी दूध की नदिया बहतीं, नहीं गरीबी का था नाम॥
वही स्थिति फिर लाने को, गोसेवाव्रत लें अविराम।
गोरक्षा में जान लगादें, पूरण होंगे सारे काम॥
हे गोमाता तुम्हें प्रणाम !

"भजन"गोमाता की सेवा करना हर हिन्दू का कर्म है।

गोमाता की सेवा करना हर हिन्दू का कर्म है।
गोमाता की रक्षा करना हर हिन्दू का धर्म है।.धृ।.
सूखे तिनके खाकर भी जो दूध सभीको देती है।
शाकाहारी मूक बेचारी जो दे दो खा लेती है।
बछडोंका हमें दूध पिलाती ये दिलकी कितनी नर्म है।. १।.
बूढी और लाचारी गैया निशदिन काटी जाती है।
जीवन भर अमृत पिलवाती कैसी गति वो पाती है।
भारत हिन्दू देशमे होता ये कैसा अधर्म है।. २।.
हिन्दू एकता और शक्ति का गोमाता ही प्रतिक है।
राष्ट्र चिन्ह इसको बनवाओ बात ये बिलकुल ठीक है।
खून हमाराभी ठण्डा नहीं बतला दो ये गर्म है।. ३।.
हर नगर गाँव और देशमे गोशालाये बनवाओ।
हिन्दुओ की माताओको खुले आम ना कटवाओ।
जागो हिन्दू भाई बहनो बची अगर कुछ शर्म है।.४।.

मंगलवार, 21 अक्टूबर 2014

मारवाड़ी कविता "सुख समृद्धि छावो देश में रोको कटती गांया ने"

जै गो माता की
तर्ज: - कबुतरा की मकी बेचदे
बार बार अरज करू में भारत का भाया ने ।
सुख समृद्धि छावो देश में रोको कटती गांया ने ।।
ईतिहास भी है गवाही जद जद गांया पे वार विया ।
धर्म की रक्षा के खातिर ईश्वर का अवतार विया ।।
जगत पिता भी बण्यो गुवालो चराणे खातिर गांया ने ।। 1 ।।
अग्नि ज्यू धरण लगे हुरज तपे आकाशा ।
आषाढ मीनो लागता ही बंधे हैं जग ने आशा ।।
गायां खातर बरसे ईन्द्र भी पाणी पावे तसायां ने ।। 2 ।।
गाय गुवाडे बंधी रेती रोग दोग ने हरती ।
सुख संपदा का भंडार सदा ही मा भरती ।।
अंग्रेजी खाणो आग्यो भूल्या दूध
मलांया ने ।। 3 ।।
हल खींचकर धरती फाडता जैठ बैसाखा में धोरी ।
हीरा मोत्यां की खेती निपजती भर भर ने लाता बोरी ।।
मशीनरी का जुग में आकर भूल्या गौ का जायां ने ।।4 ।।
गाय गंगा गीता गायत्री घर घर तुलसी वेती ।
सारां ही पेली की रोटी मायड गाय ने देती ।।
ऊंच नीच को भेद मिटाकर भूल गया हथायां ने ।। 5 ।।
गौ माता के रोम रोम में राम जी को वास है ।
देव रमण ने आवे जठे गाय को निवास है ।।
चारो पाणी दिज्ये धराणी  केवे रामेश्वर माया ने ।। 6 ।।

गौ चरणों का दास
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया

गुरुवार, 16 अक्टूबर 2014

भजन "याद करो दधि-माखन-प्रेमी"

॥ श्रीसुरभ्यै नमः ॥ वन्दे धेनुमातरम् ॥
यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजंगमम्।
तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥
॥याद करो दधि-माखन-प्रेमी॥
गौ, गीता, गंगा, गायत्री, मत भूलो गोपाल को,
शीश झुकाओ, मातृ भूमि को भारत हृदय-विशाल को।
गौ जननी सम्पूर्ण विश्व की, बतलाता इतिहास है,
इसके तन में सभी देवताओं का पावन वास है।
अपनी सेवा से उत्पन्न करती कृषकों के भाल को॥1॥
गीता देती समर भूमि में जीवन का उपदेश है,
बाधाओं पर विजय दिलाना गीता का संदेश है।
देती काट मधुर वाणी से भव के दारूण जाल को॥2॥
भारत के हृदय स्थल पर बहती गंगा की धार है,
मरण-घङी में जिसका जल कर देता भव से पार है।
नमन करो, संस्कृति रक्षिका, वक्षस्थल-जयमाल को॥3॥
गायत्री वेदों की माता, महामंत्र जप योग्य है,
देती है सुख, शांति, शक्ति, सम्पदा और आरोग्य है।
जपो वृद्ध जन और युवाओं, हे भारत के बालको॥4॥
श्रीकृष्ण जगद्गुरू, मानवता करने आए उद्धार थे,
गौ, गोवर्धन और गीता के बने स्वयं आधार थे।
याद करो, दधि-माखन-प्रेमी नन्द-यशोदा लाल को॥5॥
अखिल गोवंश की जय.....
         ॥कामधेनु-कल्याण॥

बुधवार, 15 अक्टूबर 2014

"भजन"हमारी विनती सुनो भगवान

॥श्रीसुरभ्यै नमः॥वन्दे धेनुमातरम्॥
यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजंगमम्।
तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥
हमारी विनती सुनो भगवान
गौमाता की सेवा है बङे पुण्य का काम।
मानो इसकी सेवा को तीर्थ चारों धाम॥
हमारी विनती सुनो भगवान।
गौमाता की सेवा का हमें दे दिजो वरदान॥
हमारी...........................॥
सदा-सदा ही दुष्कर्मों से देकर हमको त्रान।
गौमाता की सेवा में ही लगे हमारा ध्यान॥
हमारी .........................॥
कहते हैं यों जग के सारे बङे-बङे विद्धान।
गौमाता की सेवा ही हैं सारे सुखों की खान॥
हमारी....................॥
'ग' अक्षर की महिमा गाते सुनो यों संत सुजान।
'ग' गंगा, 'ग' गाय, 'ग' गीता करत जगत कल्याण॥
हमारी...................॥
हैं यह परम उदार, दयालु रखती सबका मान।
बिना सेवा ही दुग्ध, दही, घृत का नित करे हमें दान॥
हमारी.......................॥
परोपकारी बछङे भी इसके सांची ली जै मान।
खेंच-खेंच हल, अन्न उपजा कर पालत सकल जहान॥
हमारी...................॥
पढ़ा रहे हैं पाठ हमें यह सारे वेद पुराण।
गौसेवा को ग्वाल बने थे श्री कृष्ण भगवान॥
हमारी.................॥
गौसेवा करे सदा शक्ति हमें ऐसी प्रदान करो।
गौसेवा करते-करते ही जाये हमारे प्राण॥
हमारी......................॥
'दास रूप नारायण' के उर भर दीजे यह ज्ञान।
गौमाता की सेवा करले चाहे जो कल्याण॥
हमारी.....................॥
श्री अखिल गोवंश की जय.....
॥जय गोमाता जय गोपाल॥
              एक गऊ प्रेमी

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014

आ जाओ नन्द नन्दन !!भजन!!

॥श्रीसुरभ्यै नमः॥श्रीगोभ्यः नमः॥
आ जाओ नंद नदंन
मेरी गोमाता की जान बचाने,आ जाओ नंद नदंन।
हे गो पालक गोपाल तुम्हारा,शत शत है अभिनंदन॥
हम करते हैं तुम्हें वंदन ॥
तुम भक्त सुदामा से मिलने को,नंगे पाँव भगे थे।
और अर्जुन की रक्षा करने को,दिन और रात जगे थे।
ये भूखी प्यासी गाय तुम्हारी,भटक रही है वन वन।।
हम करते हैं तुम्हें वंदन॥01॥
जब विपदा आती भक्तों पर,तब तुम गिरराज उठाते।
आज मर रही गो माता ,तुम भगकर क्यों नहीं आते।
चहुँ और गऊ को मार रहे है,बन कर इसके दुश्मन॥
हम करते हैं तुम्हें वंदन॥02
गौ की पूजा करते हैं,श्री बह्मा विष्णु भोले।
गायत्री सावित्री गौ माँ,दर-दर फिरती डोले।
कष्ट नष्ट कर देने वाले,दे दो अब तो दर्शन॥
हम करते हैं तुम्हें वंदन॥03॥
अब लो तुम अवतार प्रभुजी, तो ये बचेगी गैया।
"गो तेरे आगे-गो तेरे पीछे" हैं गोपाल कन्हैया।
देर हुई तो कट जायेगा, गो माता का तन-तन॥
हम करते हैं तुम्हें वंदन॥04॥
धर्म की हानि जब होती,तुमने अवतार लिया है।
"यदा-यदा हि धर्मस्य" गीता में वचन दिया हैं।
"श्रीकृष्ण" जल्दी से उठालो,अपना चक्र सुदर्शन॥
हम करते हैं तुम्हें वंदन॥05॥
॥श्रीसुरभी मईयाँ की जय॥

शनिवार, 4 अक्टूबर 2014

गौमाता भजन

॥ श्री सुरभ्यै नमः ॥
॥ श्री गोमाता भजन ॥
गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे॥
झूठी जग की माया प्रभु का ही सच्चा नाम।
गौ माता की सेवा ही सबसे बढ़कर काम है।
गौ माता की सेवा से खुश होते भगवान रे॥
गौ सेवा में .................॥
मोटर बग्घी बंगला न साथ तेरे जा पाएँगे।
सखा भ्रात सुत नाती इस धन को व्यर्थ गवाएंगे।
इस दौलत को प्यारे तूँ क्यों करता बेकार रे॥
गौ सेवा में...................॥
न साथ में कुछ तूँ लाया, न साथ में कुछ ले जायेगा।
मुट्ठी बांधे आया है ओर हाथ पसारे जायेगा।
पूंछ पकङकर गौ की कर वैतरणी पार रे॥
गौ सेवा में..............॥
जनम मनुष्य का पाया, नेक काम कोई तूं कर ले।
कहता है ये गौ प्रेमी, तू नेह गऊ से कर ले।
गौ माता की सेवा से भरते हैं भण्डार रे॥
गौ सेवा में.............॥
श्री सुरभी मईयाँ की जय.........

बुधवार, 1 अक्टूबर 2014

गूंज उठी यह धरती सारी गौरक्षा के नारों से

॥श्रीसुरभ्यै नमः॥वन्दे धेनुमातरम्॥
गुंज उठी यह धरती सारी
गुंज उठी यह धरती सारी गोरक्षा के नारो से-2
जुंज पङो ऐ भारत वालो,गवों के हत्यारों से-2
कहाँ छूपे यदुवंशी सारे झट अपना मुख दिखलाओ।
वीर पाण्डवों की संतों फिर मैदानों आओ।
गोमाता के प्राण बचाओ, इन पापी गद्दारों से।
जुंज पङो ऐ भारत वालो, गवों के हत्यारों से-2
गुंज उठी यह धरती सारी गोरक्षा के नारो से-2
जुंज पङो ऐ भारत वालो.............2
कहाँ गई वो परशुराम के एकलोती संताने,
कहाँ गये वो हल्दी घाटी के महाराणा मस्ताना,
कहाँ गयी वो वीर रमणीया जो खेली अंगारों से।
जुंज पङो ऐ भारत वालो, गवों के हत्यारों से-2
गुंज उठी यह धरती सारी गोरक्षा के नारो से-2
जुंज पङो ऐ भारत वालो............2
जाग उठो हे वीर मराठों दुश्मन को अब ललकारो।
गोमाता का प्राण बचाओ हे पंजाबी सरदारों।
दिल्ली की गलियाँ गुंजा दो, अपनी तेज हुँकारों से।
जुंज पङो ऐ भारत वालो, गवों के हत्यारों से-2
गुंज उठी यह सारी गोरक्षा के नारो से-2
जुंज पङो ऐ भारत वालो.............।
जगतगुरू के सपने को अब सच्चा कर दिखलाओ,
इतिहासों के पन्नों पर तुम काला दाग न लगवाओ,
गोरक्षा की भीख मांगता भंवर हिन्द रखवालों से,
जुंज पङो ऐ भारत वालो, गवों के हत्यारों से-2
गुंज उठी यह धरती सारी गोरक्षा के नारो से-2
जुंज पङो ऐ भारत वालो...........॥
वन्दे धेनुमातरम्!

मंगलवार, 20 मई 2014

कविता ***गायों की सेवा करो, रोज नवाओ शीश । खुश होकर देंगी तुम्हें, वे लाखों आशीष ।।

गायों की सेवा करो, रोज नवाओ शीश ।
खुश होकर देंगी तुम्हें, वे लाखों आशीष ।।
+ + +
बछड़े उनके जोतते, खेत और खलियान ।
जिनसे पैदा हो रहे, रोटी-सब्जी-धान ।।
+ + +
घास-फूस खाकर करें, दूध, दही की रेज ।
इसी वजह से सज रही,मिष्ठानों की सेज ।।
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गोबर करता है यहाँ, ईधन का भी काम ।
गो सेवा जिसने करी, हो गये चारो धाम ।।
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गो माता करतीं सदा, भव सागर से पार ।
इनकी तुम सेवा करो, जीवन देंगी तार ।।
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गोबर से बढ़िया नही, खाद दूसरी कोय ।
डालोगे गर यूरिया, लाख बीमारी होय ।।
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गो पालीं तब ही बने, कान्हा जी गोपाल ।
दूध-दही से वे करें, सब को मालामाल ।।
+ + +
गायों की सेवा करो, और बचाओ जान ।
कान्हा आगे आयेंगे,सुख की छतरी तान ।।
+ + +
बची नहीं गायें अगर, ऐसा होगा हाल ।
तरसेंगे फिर दूध को,इस माटी के लाल ।।
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जब भी हो अंतिम समय,करिये गैया दान ।
हमको यह समझा रहे, अपने वेद पुरान ।।

Govats Radheshyam Ravoria

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