शनिवार, 21 मार्च 2020

आओ बचे इस कोरोना महामारी से

।।श्री सुरभ्यै नमो नमः।।
*आओ बचे इस कोरोना महामारी से*
गोमाता के लाङलो जागो उठो आगे बढ़ो यह वेदलक्षणा गौमहिमा को पुनर्स्थापित  करने का अवसर है विश्व व्यापी महामारी से पिङित व भयभीत मानव जाति को  पूज्या गोमाता के वात्सल्य से  प्राप्त पंचगवयामृत का विधिवत विनियोग करने पर सम्पुर्ण राहत मिल सकती है अतः इस महारोग से  धरती की मानव जाति को  बचाने के लिए पंचगवय प्रक्षालन ,पंचगवय पान व पंचगवय स्नान का व्यापक रूप से  प्रयोग व प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है ।
आईये हम स्वयं आज से नियमित पंचगवय   प्रक्षालन पंचगवय पान व पंचगवय स्नान का संकल्प लेकर महामारी से 
मानव जाति को बचाने के महायज्ञ में  तन मन धन से आहुति प्रदान करें वेदलक्षणा गोमाता से प्राप्त पंचगवय का विधिवत निर्माण कराके अपने निकटस्थ आश्रमो मन्दिरो मठों एवं सभी धार्मिक स्थलों पर वितरण करने का प्रबंध करे ।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मतानुसार यह विनाशकारी रोगाणु स्पर्श व श्वास द्वारा एक से दूसरे मानव में पहुंचता है ओर इसका निदान केवल   विधिवत  बचाव से किया जा सकता है  भारतीय धर्म शास्त्रों में सभी प्रकार के   स्पर्श जन्य दोषों का निवारण पंचगवय प्रक्षालन ही बताया है तथा आयुर्वेद शास्त्रो में सभी प्रकार के खाद्य अखाद्य जन्य असाध्य रोगों का निदान पंचगवय पान से बताया गया है यह सर्वविदित है कि  हमारे पूर्वज हजारों वर्षों से सब प्रकार के धार्मिक संस्कारों में  पंचगवय प्रक्षालन, उपासनाओ में पंचगवय स्नान ओर सम्पुर्ण आरोग्य में पंचगवय पान, का प्रयोग करते आए हैं ।
 आज धरती की मानव जाति पर आए महा विनाशकारी संकट निवारण हेतु पंचगवय का प्रयोग करने से वेदलक्षणा गौवंश के प्रति उपेक्षा व तिरस्कार के दुर्भावो का समन होगा ओर  आधुनिक मानव जाति में सदभाव व सेवा भाव की जाग्रति होगी जिससे धरती पर गौमहिमा पुनर्स्थापित हो जाएगी यह मानव जाति की सेवा का महान कार्य  गोप्रेमी पवित्र ह्रदय  सन्त , गोऊपासक विद्वान विप्र,  गोभक्त धर्मात्मा  सज्जन , एवं गोमाता को समर्पित गोवत्स गोवत्सा व गोपुत्र गोपुत्रियो तथा आप हम सभी सजग मानवो द्वारा धार्मिक स्थलों के माध्यम से सम्पादित हो सकता है। 
शास्त्रीय  विधि से पंचगवय प्रयोग करने पर मानव जाति का महामारी के रोग से बचाव हो जाएगा ओर  वेदलक्षणा गोमाता के साथ साथ धर्म शास्त्र व धार्मिक स्थलों की महिमा स्थापित होगी मांसाहार का त्याग करके पंचगवय प्रक्षालन पंचगवय पान करने वाला मानव इस महारोग  से निसन्देह बच जाएगा इसमें हमारे धर्म शास्त्र व आयुर्वेद शास्त्र पूर्वजों का जीवन इतिहास तथा गोवृती  गोसेवा प्रेमियों का अनुभव ही प्रमाण है। 
हे गोमाता के लाङलो भारतीय आस्था की महाशक्ति का साक्षात्कार मानव जाति को कराओ मृत्यु के महाभय से भयभीत असहाय मानव जाति  को आदि शक्ति सुरभी गो माता एवं परमपिता परमात्मा की शरण में बुलाओ उनके पंचगवय प्रक्षालन व पंचगवय पान के लिए   वेदलक्षणा गोष्ठो आश्रमो देवालयों व धार्मिक संस्थाओं  के द्वार खोल दो इसमे  धर्म स्थलों के अस्तित्व की सार्थकता ओर सफलता है।

गुरुवार, 12 मार्च 2020

गौसेवक का मतलब क्या चलो बताये आपको आज सुनो एक गौसेवक की कहानी...

गौसेवक का मतलब क्या चलो बताये आपको आज सुनो एक गौसेवक की कहानी......👌

गौ सेवक का मतलब अंतरात्मा से प्रेरित वो व्यक्ति है जो गौ को माता मानता है पशु नहीं मानता है गौ सेवक वह है जो अपना समय अपना धन अपना मन सब कुछ लगा कर के गौ सेवा के कार्य पर जुड़ा हुआ रहता है चाहे मार्केट में कोई सेवा करने वाला गौ सेवक हो चाहे वह किसी गौशाला या गौ सदन पर अपनी सेवाएं देने वाला गौ सेवक हो गौ सेवक अपने परिवार अपने सगे संबंधियों से बैर लेकर समाज एवं सरकार से बैर लेकर के इस कार्य को करता है जहां पर सिर्फ अपवाद और कष्ट उसके साथ होते हैं पर उसे यह विश्वास होता है ।।

 कि मैं गौ माता का कार्य कर रहा हूं और मुझ पर कोई कष्ट नहीं आएगा गौ सेवक इसे अपना कर्तव्य मानकर इस कार्य को करते हैं ।। 

आइए हम सब मिलकर के उन सभी गौ सेवकों को सेल्यूट करें उनका सम्मान करें क्योंकि दुनिया में वैसे लोग बहुत कम हैं जो अपने परिवार अपने जॉब अपनी नौकरी से समय निकालकर अब अपना तन और मन और धन सब कुछ अर्पण करता है वैसे गौ सेवकों को हृदय से प्रणाम है पूरे भारतवर्ष के सभी गौ सेवकों को समर्पित उनके इस समर्पण को प्रणाम चरण वन्दन अभिनन्दन ।।।।।

बुधवार, 4 मार्च 2020

गौमाता ओर किसान को मारनें की तैयारी चल रही थी ओर हम आधुनिकता समझ बैठे

🙏💐  गौमाता ओर किसान को मारनें की तैयारी चल रही थी ओर हम आधुनिकता समझ बैठे 💐
🙏

मुगल , पुर्तगाली , फ्रेच , अंग्रेज सब लुट कर चले गये !

इनके बाद इन सब की छोडी मिली जुली नस्लों नें लुटा लेकीन अकल फिर भी नहीं !

भारतियों नें तो बुजुर्गों की बनाई कहावतें भी झुठला दी की 

" अकल बादाम खाने से नहीं , ठोकर खानें से आती है "

खेतों से बैल निकल रहे थे ओर हमने ट्रेक्टर को तकनीक का नाम दे दिया !
 

गौबर हटा कर शुद्धता ओर स्वस्थ से खिलवाड हो रहा था ओर हम युरिया , सुपरफॉस्फेट जैसे भयंकर जहर डाल - कर धरती मां को तिल - 2 मार कर अपनें को मोडर्न समझ वैठे !

ना जाने ऐसी क्या जल्दी थी हमे की कोल्हु हटा कर महगी - 2 विदेशी मशीनें लगाकर समय बचाने में लगे रहे !

चुल्हे से गोबर के उपले कहीं गायब हो रहे थे ओर हम विदेशी ऐल पी जी सिलेंडर पर मुर्खों की तरह वॉव -2 चिल्ला रहे थे !

स्वर्ग समान वो मिट्टी , चुने ओर गौमाता के गोवर से निर्मित घर विलुप्त हो रहे थे ओर हम नदियों से रेता बजरी खोदने ओर सिमेंट , पेंट जैसे जहर की चमक में गुम थे !

गौमाता का अमृत तुल्य दुध , दहीं , लस्सी ओर घी खत्म हुऐ जा रहा था ओर हम जर्सी सुवर के जहर से धन कमानें में व्यस्त थे !

ये सब हो रहा था ओर हम आधुनिकता का गाना गाने में व्यस्त थे आज भी उसी आधुनिकता की धुंन में मस्त हैं ना जानें कब सुधरेंगे हम !

अभी भी समय है भेजे को लुवरिकट करिऐ ओर अपनी संस्कृती की गहरी जानकारी लीजिऐ क्या पता वो सोने की चिढिया बाला भारत अपनें जीते जी देख लें !

अन्यथा याद रखिऐ आलसी ओर कायरों को कभी इतिहास में माफ नहीं किया गया !

गौमाता को भारत की अर्थव्यवस्था से जोडनें में अपना योगदान करिऐ !

जय गौमाता