मंगलवार, 1 जुलाई 2014

बच्चे दूध के नाम पर जब डिटर्जेंट पियेंगे तो बच्चों का जीवन कैसे बचेगा

~कैसे बचेगा भारत?~
बच्चे दूध के नाम पर जब डिटर्जेंट पियेंगे
तो बच्चों का जीवन कैसे बचेगा ।अमर
उजाला के फेसबुक पृष्ठ पर
http://m.amarujala.com/delhincr/feature/noida-news-ncr/amul-milk-found-synthetic-in-lab-test/?page=1
जानकारी प्राप्त हुई की नोयडा से लिया
गया अमूल दूध में डिटर्जेंट की मिलावट
सिद्ध हो गई।

हम सिर्फ मशीनों के पीछे भाग रहे है
और पशु और कृषि रूपी धन को छोड़
दिया। (टेस्ट ऑफ़ इण्डिया के चक्कर में
टेस्ट ऑफ़ भारत छोड़ दिया)।
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शनिवार, 28 जून 2014

गोचर भूमि पर कब्जा करने वालो का विनाश

हमारे यहाँ संत एक कथा कहते थे -- एक भयंकर शमशान भूमि में एक चण्डालिन कुत्ते की खोपड़ी में कव्वे का मांस पका रही थी ऊपर से उसे मोटे पत्थर से ढका हुआ था। एक घुमक्कड़ संत उधर से गुजरे उन्होंने पूछा इतना निकृष्ट कर्म तो कर ही रही है फिर यह ढका क्यों है खुले आम कर। तब उस चण्डालिन ने कहाँ महाराज इस कव्वे के मांस को ढ़क कर इसलिए पका रही हूँ की कही किसी गौचर भूमि में कब्ज़ा करने वाले नीच की नजर पड़ कर यह मांस अपवित्र ना हो जाय। बताओ कितना निकृष्ट कर्म करता है गोचर भूमि में कब्ज़ा करने वाला फिर भी सरकार और कुछ धर्म के पाखंडी गौचर भूमि में कब्ज़ा किये हुए है। लाखो गौवंश कट रहा है उनकी आत्मा में सिरहन इस लिए नहीं की वे खुद गौचर भूमि में बैठे है। --
धिक्कार। ………
निवेदक आपका मित्र
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया
WWW.gokranti.com

बुधवार, 18 जून 2014

प्रधान मंत्री महोदय एक नजर इस ओर भी !

प्रधान मंत्री महोदय एक नजर इस ओर भी ! 
किस तरह ये मांसाहारी, ये मौत के सौदागर, ये माँ के अंस को ही खा जाने वाले दैत्य, ये माँ को मारकर धन के लिए बन चुके नर पिचास हमारी भारत की संस्कृति को तार -तार करने वाले , हमारे प्राकृतिक संसाधन का दोनों हाथो से दोहन करने वाले , हमारे जल श्रोत को बर्बाद करने वाले , हमारे कृषि योग्य भूमि भूख को मिटाने वाली माँ को बंजर कर देने वाले, हमारे नवजवानों और बच्चो के रोजगार के दुशमन और फिर जिस थाली में खाते है उसी में छेद करदेने वाले आतंक बाद के जड़ किस तरह किस तरह गौहत्या के नाशुर से हमें बर्बाद कर रहे है एक गहरी नजर जरूर डालिये हम असहनीय पीड़ा से पीड़ित है इन आकड़ों से आप भी आखों में आशु उतारिये I I 
श्रीमान जी गोहत्या का प्रश्न केवल हमारी धार्मिक आस्थाओं से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि देश के अर्थतंत्र, पर्यावरण व जलसंकट जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे इससे सीधे प्रभावित होते हैं। आज बड़ी गंभीरता से यह बात कही जाती है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए होगा, इस दृष्टि से यदि कत्लखानों का विचार करें तो जलसंकट को बढ़ाने में इनकी भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती। एक कत्लखाने में प्रति पशु पांच सौ लीटर पानी लगता है। 
हिन्दुस्तान टाइम्स के 09 - 04 - 1994 के अंक में प्रकाशित एक रपट के अनुसार कोलकाता के मोरी गांव कत्लखाने में 17 लाख 50 हजार लीटर पानी प्रतिदिन लगता है। इसके विपरीत एक व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन 25 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। 
इसका अर्थ यह हुआ कि कोलकाता के इस कत्लखाने में करीब 70 हजार लोगों के उपयोग का पानी नष्ट कर दिया जाता है। मुम्बई के पास देवनार कत्लखाने में 18 लाख 50 हजार लीटर पानी प्रतिदिन खर्च होता है। यहां लगभग 74 हजार लोगों के उपयोग का पानी नष्ट कर दिया जाता है। तिलंगाना के मेदक जिल्ले में स्थित कत्लखाने अल-कबीर एक्सपोर्ट लिमिटेड में 6 हजार 600 पशु प्रतिदिन काटे जाते हैं इनमें गौवंश की तादाद भी बड़ी संख्या में होती है । यहां 1 लाख 32 हजार लोगों के उपयोग का पानी प्रतिदिन नष्ट कर दिया जाता है। 
गाय का दूध 30 - 35 रु. प्रति लीटर की दर से मिलता है, जबकि देश में 18 - 20 रु. लीटर पानी बिक रहा है। जिस देश में गाय का दूध नहीं बेचा जाता था उस देश में पानी बेचा जा रहा है। ये कत्लखाने जितना पानी बर्बाद कर रहे हैं उससे पानी का संकट देश में कितना गंभीर होने वाला है यह समझा जा सकता है । इसलिए यह विचार करने की आवश्यकता है कि आज देश में पानी की ज्यादा आवश्यकता है या मांस की ?????? 
इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की हत्या का असर बेरोजगारी बढ़ाने में भी हुआ है। 1981- 82 में देवनार मुम्बई में 26 लाख 41 हजार 917 पशुओं का क़त्ल किया गया। इसमें 1 लाख 20 हजार 656 बैल काटे गए। इस कत्लखाने में उस समय 1660 कर्मचारी कार्यरत थे। इसके विपरीत यदि यह पशु धन जीवित रहता तो पशुपालन से 96 हजार 927 लोगों को रोजगार मिलता। इसका अर्थ इस कत्लखाने में उस एक वर्ष की अवधि में ही हजारों लोगों का रोजगार छीन लिया गया। पशुओं से रोजगार का अनुपात है 5 गायों पर 1 व्यक्ति की दर से रोजगार मिलना। 
देश में कुल खेती का 28 प्रतिशत बड़ी जोत वाले किसान हैं जो ट्रेक्टरों से खेती करते हैं जबकि 5 एकड़ से नीचे वाले 72 प्रतिशत छोटे व मझोले किसान हैं। ट्रेक्टर, रासायनिक खाद, कीटनाशक और डीजल की महंगी कीमतों के कारण कृषि फसल का उत्पादन मूल्य बहुत ज्यादा बढ़ गया है। जबकि इसके अनुपात में अनाज की कीमत बाजार में कम होती है। छोटे किसान को यह सीधा घाटा होने के कारण उसको गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। इसी कारण लाखों किसानों ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में आत्महत्याएं कर लीं। 
खेती घाटे का सौदा हो जाने के कारण 72 प्रतिशत जो छोटा किसान गांव में रहता था वह शहरों की ओर पलायन कर रहा है। वह शहरों में मजदूरी करके झुग्गी-झोपड़ियों में अभावग्रस्त जीवन जी रहा है। इसके मूल में गौ-धन एवं अन्य पशु- धन का खत्म होते जाना और इसके कारण गांवों का उजड़ना है। रासायनिक खादों के उपयोग से विश्व भर में 6 प्रतिशत नाइट्रो आक्साइड की मात्रा बढ़ गई है। इससे भूमि का तापमान बढ़ा है, जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहा जा रहा है और जिसके कारण मौसम चक्र तेजी से बदल रहा है। किसान आन्दोलन में जेल गए सरदार पटेल से जेल में मिलने आया एक अंग्रेज पत्रकार ने पूछने पर कि आपकी "कल्चर" क्या है, सरदार पटेल ने जवाब दिया "माई कल्चर इज एग्रीकल्चर" ---पर वे भी गौहत्या बन्द नहीं करा पाये ! 
निवेदक आपका प्यारा मित्र 
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया 
WWW.GOKRNATI.COM 

कहानी story

एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया बनाकर रहते थे !
एक किरात (जानवरों का शिकार करने वाला)रहता था संत को देखकर हमेशा प्रणाम करता था !ऐसा हमेशा होता था रोज किरात कुटिया के सामने से निकलता और संत को प्रणाम करता !एक दिन किरात संत से बोला -बाबा !मै तो मृग का शिकार करने आता हूँ ;आप यहाँ किसका शिकार करने आते हो ?संत बोले -मै श्रीकृष् 39; मृग का शिकार करने आता हूँ इतना कहकर संत रोने लगे !

किरात बोला -बाबा रोते क्यों हो ;मुझे बताओ ये कृष्ण देखने में कैसा है ?मैंने कभी इस तरह के शिकार के बारे में नहीं सुना ;मै अवश्य ही आपका शिकार आपको लाकर दूँगा !संत ने भगवान का स्वरुप बता दिय -काले रंग का है,मोर का मुकुट लगाता है,बासुरी बजाता है !किरात बोला -तुम्हारा शिकार हम पकड़कर लाते है जब तक शिकार हम आपको लाकर नहीं देगे तब तक पानी भी नहीं पीयेगे इतना कहकर किरात चला गया !

अब तो एक जगह जाल बिछाकर बैठ गया ३ दिन हो गए किरात के मन में वही संत द्वारा बताई छवि बसी हुई थी यूँ ही बैठा रहा !

भगवान को दया आ गई और बाल कृष्ण बासुरी बजाते हुए आ गए और स्वयं ही जाल में फस गए !किरात ने तो कभी देखा नहीं था संत द्वारा बताई छवि जब आँखों के सामने देखी तो तुरंत चिल्लाने लगा -फस गया !फस गया !मिल गया !मिल गया !अच्छा बच्चू तीन दिन भूखा प्यासा रखा अब हाथ में आये हो !
तुरंत ठाकुर जी को जाल में ही फसे हुए अपने कंधे पर शिकार की भांति टांगा और संत की कुटिया की ओर चला !कुटिया के बाहर से ही आवाज लगायी -बाबा जल्दी से बाहर आओ आपका शिकार लेकर आया हूँ ! संत झट कुटिया से बाहर आये तो क्या देखते है किरात के कंधे पर जाल में फसे ठाकुर जी मुस्कुरा रहे है !

संत चरणों में गिर पड़ा फिर ठाकुर जी से बोला -प्रभु हमने बचपन से घर-बार छोड़ा अब तक आप नहीं मिले और इसको तुम ३ दिन में ही मिल गए ;ऐसा क्यों ?

भगवान बोले -बाबा !इसने तुम्हारा आश्रय लिया इसलिए इस पर ३ दिन में ही कृपा हो गई !कहने का अभिप्राय ये है कि भगवान पहले उस पर कृपा करते है जो उनके दासों के चरण पकडे होता है !किरात को पता भी नहीं था भगवान कौन है ;कैसे होते है ?पर संत को रोज प्रणाम करता था !संत प्रणाम और दर्शन का फल ये हुआ कि ३ दिन में ही ठाकुर जी मिल गए !

सोमवार, 26 मई 2014

प्रश्नों उतर गौमाता जे जुड़े हुए

प्रश्नोत्तर
गाय एवं गाय के विज्ञान से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले कुछ प्रश्नोत्तर यहाँ दिये गए है| अगर आपके मन में इन प्रश्नों के अलावा भी कोई प्रश्न आए तो आप इस पेज पर कमेंट के रूप में हम से पूछ सकते है| आपके द्वारा पूछे गए अच्छे प्रश्नों को हम यहाँ जोड़ कर सभी के लिए उसका उत्तर उपलब्ध करवाएँगे|

प्रश्न 1.) गाय क्या है?

उत्तर 1.) गाय ब्रह्मांड के संचालक सूर्य नारायण की सीधी प्रतिनिधि है| इसका अवतरण पृथ्वी पर इसलिए हुआ है ताकि पृथ्वी की प्रकृति का संतुलन बना रहे| पृथ्वी पर जितनी भी योनियाँ है सबका पालन-पोषण होता रहे| इसे विस्तृत में समझने के लिए ऋगवेद के 28वें अध्याय को पढ़ा जा सकता है|

प्रश्न 2.) गौमाता और विदेशी काऊ में अंतर कैसे पहचाने?

उत्तर 2.) गौमाता एवं विदेशी काऊ में अंतर पहचानना बहुत ही सरल है| सबसे पहला अंतर होता है गौमाता का कंधा (अर्थात गौमाता की पीठ पर ऊपर की और उठा हुआ कुबड़ जिसमें सूर्यकेतु नाड़ी होती है), विदेशी काऊ में यह नहीं होता है एवं उसकी पीठ सपाट होती है| दूसरा अंतर होता है गौमाता के गले के नीचे की त्वचा जो बहुत ही झूलती हुई होती है जबकि विदेशी काऊ के गले के नीचे की त्वचा झूलती हुई ना होकर सामान्य एवं कसीली होती है| तीसरा अंतर होता है गौमाता के सिंग जो कि सामान्य से लेकर काफी बड़े आकार के होते है जबकि विदेशी काऊ के सिंग होते ही नहीं है या फिर बहुत छोटे होते है| चौथा अंतर होता है गौमाता कि त्वचा का अर्थात गौमाता कि त्वचा फैली हुई, ढीली एवं अतिसंवेदनशील होती है जबकि विदेशी काऊ की त्वचा काफी संकुचित एवं कम संवेदनशील होती है| पांचवा अंतर होता है गौमाता के

प्रश्न 3.) अगर थोड़ा सा भी दही नहीं हो तब दूध से दही कैसे बनाएँ?

उत्तर 3.) हल्के गुन-गुने दूध में नींबू निचोड़ कर दही जमाया जा सकता है| इमली डाल कर भी दही जमाया जाता है| गुड़ की सहायता से भी दही जमाया जाता है| शुद्ध चा�
प्रश्न 3.) अगर थोड़ा सा भी दही नहीं हो तब दूध से दही कैसे बनाएँ?

उत्तर 3.) हल्के गुन-गुने दूध में नींबू निचोड़ कर दही जमाया जा सकता है| इमली डाल कर भी दही जमाया जाता है| गुड़ की सहायता से भी दही जमाया जाता है| शुद्ध चाँदी के सिक्के को गुन-गुने दूध में डालकर भी दही जमाया जा सकता है|

प्रश्न 4.) किस समय पर दूध से दही बनाने की प्रक्रिया शुरू करें?

उत्तर 4.) रात्री में दूध को दही बनने के लिए रखना सर्वश्रेष्ठ होता है ताकि दही एवं उससे बना मट्ठा, तक्र एवं छाछ सुबह सही समय पर मिल सके|

प्रश्न 5.) गौमूत्र किस समय पर लें?

उत्तर 5.) गौमूत्र लेने का श्रेष्ठ समय प्रातःकाल का होता है और इसे पेट साफ करने के बाद खाली पेट लेना चाहिए| गौमूत्र सेवन के 1 घंटे पश्चात ही भोजन करना चाहिए|

प्रश्न 6.) गौमूत्र किस समय नहीं लें?

उत्तर 6.) मांसाहारी व्यक्ति को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| गौमूत्र लेने के 15 दिन पहले मांसाहार का त्याग कर देना चाहिए| पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति को सीधे गौमूत्र नहीं लेना चाहिए, गौमूत्र को पानी में मिलाकर लेना चाहिए| पीलिया के रोगी को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| देर रात्रि में गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| ग्रीष्म ऋतु में गौमूत्र कम मात्र में लेना चाहिए|
प्रश्न 7.) क्या गौमूत्र पानी के साथ लें?

उत्तर 7.) अगर शरीर में पित्त बढ़ा हुआ है तो गौमूत्र पानी के साथ लें अथवा बिना पानी के लें|

प्रश्न 8.)अन्य पदार्थों के साथ मिलकर गौमूत्र की क्या विशेषता है? (जैसे की गुड़ और गौमूत्र आदि संयोग)

उत्तर 8.) गौमूत्र किसी भी प्रकृतिक औषधी के साथ मिलकर उसके गुण-धर्म को बीस गुणा बढ़ा देता है| गौमूत्र का कई खाद्य पदार्थों के साथ अच्छा संबंध है जैसे गौमूत्र के साथ गुड़, गौमूत्र शहद के साथ आदि|

प्रश्न 9.) गाय का गौमूत्र किस-किस तिथि एवं स्थिति में वर्जित है? (जैसे अमावस्या आदि)

उत्तर 9.) अमावस्या एवं एकादशी तिथि तथा सूर्य एवं चन्द्र ग्रहण वाले दिन गौमूत्र का सेवन एवं एकत्रीकरण दोनों वर्जित है|

प्रश्न 10.) वैज्ञानिक दृष्टि से गाय की परिक्रमा करने पर मानव शरीर एवं मस्तिष्क पर क्या प्रभाव एवं लाभ है?

उत्तर 10.) सृष्टि के निर्माण में जो 32 मूल तत्व घटक के रूप में है वे सारे के सारे गाय के शरीर में विध्यमान है| अतः गाय की परिक्रमा करना अर्थात पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करना है| गाय जो श्वास छोड़ती है वह वायु एंटी-वाइरस है| गाय द्वारा छोड़ी गयी श्वास से सभी अदृश्य एवं हानिकारक बैक्टेरिया मर जाते है| गाय के शरीर से सतत एक दैवीय ऊर्जा निकलती रहती है जो मनुष्य शरीर के लिए बहुत लाभकारी है| यही कारण है कि गाय की परिक्रमा करने को अति शुभ माना गया है|
प्रश्न 11.) गाय के कूबड़ की क्या विशेषता है?

उत्तर 11.) गाय के कूबड़ में ब्रह्मा का निवास है| ब्रह्मा अर्थात सृष्टि के निर्माता| कूबड़ हमारी आकाश गंगा से उन सभी ऊर्जाओं को ग्रहण करती है जिनसे इस सृष्टि का निर्माण हुआ है| और इस ऊर्जा को अपने पेट में संग्रहीत भोजन के साथ मिलाकर भोजन को ऊर्जावान कर देती है| उसी भोजन का पचा हुआ अंश जिससे गोबर, गौमूत्र और दूध गव्य के रूप में बाहर निकलता है वह अमृत होता है|

प्रश्न 12.) गौमाता के खाने के लिए क्या-क्या सही भोजन है? (सूची)

उत्तर 12.) हरी घास, अनाज के पौधे के सूखे तने, सप्ताह में कम से कम एक बार 100 ग्राम देसी गुड़ , सप्ताह में कम से कम एक बार 50 ग्राम सेंधा या काला नमक, दाल के छिलके, कुछ पेड़ के पत्ते जो गाय स्वयं जानती है की उसके खाने के लिए सही है, गाय को गुड़ एवं रोटी अत्यंत प्रिय है|

प्रश्न 13.) गौमाता को खाने में क्या-क्या नहीं देना है जिससे गौमाता को बीमारी ना हो? (सूची)

उत्तर 13.) देसी गाय जहरीले पौधे स्वयं नहीं खाती है| गाय को बासी एवं जूठा भोजन, सड़े हुए फल नहीं देना चाहिए| गाय को रात्रि में चारा या अन्य भोजन नहीं देना चाहिए| गाय को साबुत अनाज नहीं देना चाहिए हमेशा अनाज का दलिया करके ही देना चाहिए|

प्रश्न 14.) गौमाता की पूजा करने की विधि? (कुछ लोग बोलते है कि गाय के मुख कि नहीं अपितु गाय कि पूंछ कि पूजा करनी चाहिए और अनेक भ्रांतियाँ है|)

उत्तर 14.) गौमाता की पूजा करने की विधि सभी जगह भिन्न-भिन्न है और इसके बारे में कहीं भी आसानी से जाना जा सकता है| लक्ष्मी, धन, वैभव आदि कि प्राप्ति के लिए गाय के शरीर के उस भाग कि पूजा की जाती है जहां से गोबर एवं गौमूत्र प्राप्त होता है| क्योंकि वेदों में कहा गया है की “गोमय वसते लक्ष्मी” अर्थात गोबर में लक्ष्मी का वास है और “गौमूत्र धन्वन्तरी” अर्थात गौमूत्र में भगवान धन्वन्तरी का निवास है|
प्रश्न 15.) क्या गाय पालने वालों को रात में गाय को कुछ खाने देना चाहिए या नहीं?

उत्तर 15.) नहीं, गाय दिन में ही अपनी आवश्यकता के अनुरूप भोजन कर लेती है| रात्रि में उसे भोजन देना स्वास्थ्य के अनुसार ठीक नहीं है|

प्रश्न 16.) दूध से दही, घी, छाछ एवं अन्य पदार्थ बनाने के आयुर्वेद अनुसार प्रक्रियाएं विस्तार से बताईए|

उत्तर 16.) सर्वप्रथमड दूध को छान लेना चाहिए, इसके बाद दूध को मिट्टी की हांडी, लोहे के बर्तन या स्टील के बर्तन (ध्यान रखे की दूध को कभी भी तांबे या बिना कलाई वाले पीतल के बर्तन में गरम नहीं करें) में धीमी आंच पर गरम करना चाहिए| धीमी आंच गोबर के कंडे का हो तो बहुत ही अच्छा है| पाँच-छः घंटे तक दूध गरम होने के बाद गुन-गुना रहने पर 1 से 2 प्रतिशत छाछ या दही मिला देना चाहिए| दूध से दही जम जाने के बाद सूर्योदय के पहले दही को मथ देना चाहिए| दही मथने के बाद उसमें स्वतः मक्खन ऊपर आ जाता है| इस मक्खन को निकाल कर धीमी आंच पर पकाने से शुद्ध घी बनता है| बचे हुए मक्खन रहित दही में बिना पानी मिलाये मथने पर मट्ठा बनता है| चार गुना पानी मिलने पर तक्र बनता है और दो गुना पानी मिलने पर छाछ बनता है|

प्रश्न 17.) दूध के गुणधर्म, औषधीय उपयोग| किन-किन चीजों में दूध वर्जित है?

उत्तर 17.) गाय का दूध प्राणप्रद, रक्तपित्तनाशक, पौष्टिक और रसायन है| उनमें भी काली गाय का दूध त्रिदोषनाशक, परमशक्तिवर्धक और सर्वोत्तम होता है| गाय अन्य पशुओं की अपेक्षा सत्वगुणयुक्त है और दैवी-शक्ति का केंद्रस्थान है| दैवी-शक्ति के योग से गोदुग्ध में सात्विक बल होता है| शरीर आदि की पुष्टि के साथ भोजन का पाचन भी विधिवत अर्थात सही तरीके से हो जाता है| यह कभी रोग नहीं उत्पन्न होने देता है| आयुर्वेद में विभिन्न रंग वाली गायों के दूध आदि का पृथक-पृथक गुण बताया गया है| गाय के दूध को सर्वथा छान कर ही पीना चाहिए, क्योंकि गाय के स्तन से दूध निकालते समय स
प्रश्न 24.) गाय और बैल के सिंग को ऑइलपेंट और किसी भी तरह कि सजावट क्यों नहीं करनी चाहिए?

उत्तर 24.) गाय और बैल के सिंग को ऑइलपेंट और किसी भी तरह कि सजावट इसलिए नहीं करनी चाहिए क्योंकि सिंग चंद्रमा से आने वाली ऊर्जा को अवशोषित करते शरीर को देते है| अगर इसे पेंट कर दिया  जाए तो वह प्रक्रिया बाधित होती है|

प्रश्न 25.) अगर गाय का गौमूत्र नीचे जमीन पर गिर जाये तो क्या उसे हम अर्क बनाने में उपयोग कर सकते है?

उत्तर 25.) नहीं, फिर उसे केवल कृषि कार्य के उपयोग में ले सकते है|

प्रश्न 26.) भिन्न प्रांत की नस्ल वाली गाय को किसी दूसरे वातावरण में पाला जाये तो उसकी क्या हानियाँ है?

उत्तर 26.) भिन्न-भिन्न नस्लें अपनी-अपनी जगह के वातावरण के अनुरूप बनी है अगर हम उन्हे दूसरे वातावरण में ले जा कर रखेंगे तो उन्हें भिन्न वातावरण में रहने पर परेशानी होती है जिसका असर गाय के शरीर एवं गव्यों दोनों पर पड़ता है| और आठ से दस पीड़ियों के बाद  वह नस्ल बदल कर स्थानीय भी हो जाती है| अतः यह प्रयोग नहीं करना चाहिए|

प्रश्न 27.) क्या ताजा गौमूत्र से ही चंद्रमा अर्क बना सकते है, पुराने से नहीं?

उत्तर 27.) हाँ, चंद्रमा अर्क सूर्योदय से पहले चंद्रमा की शीतलता में बनाया जाता है|

प्रश्न 28.)गाय का घी और उसके उत्पाद महंगे क्यों होते है?

उत्तर 28.) एक लीटर घी बनाने में तीस लीटर दूध की खपत होती है जिसका मूल्य कम से कम 30 रु. लीटर के हिसाब से 900 रुपये केवल दूध का होता है| और इसे बनाने में मेहनत आदि को जोड़ दिया जाये तब घी का न्यूनतम मूल्य 1200 रुपये प्रति लीटर होता है| ्