मंगलवार, 11 मार्च 2025

गौमाता की रक्षा – समय की पुकार

गौमाता की रक्षा – समय की पुकार

समय बदल रहा है!

आज के आधुनिक दौर में गौ माता केवल एक सजावट की वस्तु बनती जा रही हैं। जिन गलियों और आंगनों में कभी गौ माता का वास हुआ करता था, वहां अब सिर्फ कंक्रीट के जंगल खड़े हैं। जिस देश में गौ माता को माता का दर्जा दिया गया है, वहां आज उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है।

गौ माता का महत्व – धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से

सनातन हिंदू समाज में गौ माता को पूजनीय माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है:

"गावो विश्वस्य मातरः" – गाय पूरे विश्व की माता है।

गौ माता सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानव जीवन, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अति आवश्यक है।

गौ माता का पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोबर, गौमूत्र) अनेक रोगों का नाश करता है।
✅ #गौमूत्र और #गोबर से जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है।
गौ माता का दूध अमृत समान होता है, जिसमें ओमेगा-3 और कई पोषक तत्व होते हैं।

गाय बचेगी, तो देश बचेगा!

अगर गौ माता लुप्त हो गईं, तो हमारी संस्कृति, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर भारी संकट आ सकता है।

🚩 गौ माता के बिना जैविक खेती संभव नहीं।
🚩 गौ आधारित अर्थव्यवस्था से किसानों और ग्रामीण भारत को मजबूती मिलती है।
🚩 गौ माता से पर्यावरण संतुलन बना रहता है, जिससे जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकता है।

हमारी जिम्मेदारी – गौरक्षा संकल्प

हमें यह संकल्प लेना होगा कि:

गौमाता की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
पॉलिथिन का उपयोग बंद करेंगे, ताकि गौ माता इसे खाकर बीमार न हों।
गौशालाओं को सहयोग देंगे और बेसहारा गायों को आश्रय देंगे।
✅ #गौमाता से जुड़े उत्पादों (गौ मूत्र, गोबर, #पंचगव्य) का उपयोग करेंगे।

🚩 आइए, गौ रक्षा के इस संकल्प में हम सभी जुड़ें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर और समृद्ध भारत का निर्माण करें! 🚩


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