प्रशासनिक अधिकारी
प्रजातंत्र में प्रशासनिक अधिकारी वह है, जो शासन व आम जनों के बीच जहाँ एक ओर कानून के शासन की अवधारणा का पालन कराती है वही दूसरी ओर जन कल्याण के कार्यों को सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान करती है। अतः गोरक्षण एवं गो संवर्धन के नियमों, प्रावधानों और कानूनों का कठोरता व आग्रहपूर्वक पालन कराना, जहाँ एक ओर उनका कर्तव्य कर्म है वहीं दूसरी ओर इस महायज्ञ में सहायक बनना उनकी आत्मा को पवित्रता प्रदान कर सकता है।
निम्न बिंदु दृष्टव्य है :-
१. गोरक्षण, गो संवर्धन, गो सेवा हेतु शासन की नीतियों का क्रियान्वयन शत प्रतिशत प्रभावी ढंग से हो, यह दायित्व प्रशासनिक अधिकारियों का है। इसे प्राणपण से पूरा करें ।
२. राष्ट्रीय गोवंश आयोग की रिपोर्ट १००% लागू करवाने का भरसक प्रयास करें ।
३. अपने घर में गाय पाले, गो सेवा करें जनता को इस हेतु प्रेरित करें ।
४. गो हत्यारों को तत्परता से पकडने हेतु प्रशासन तंत्र में उचित वातावरण तैयार करें ।
५. जैविक कृषि के हित में विविध योजनाएं तैयार करें व क्रियान्वित करें। ऐसा करनेवाले समाज के अन्य लोगों को प्रोत्साहित करें ।
६. अपने कार्यालय में गो माता का चित्र लगावें । बडी मात्रा में लोग आपसे मिलते हैं, उन्हे गोसेवा का महत्व बतावें ।
७. बडे प्रशासनिक अधिकारियों को गोरक्षण व गो संवर्धन सम्बंधी नीति निर्माण का कार्य गम्भीरता से व कुशलता से कराना चाहिए ।
८. प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न आयोजनों में मुख्य अतिथि, वक्ता या अध्यक्ष इस नाते निमंत्रित किया जाता है। वहाँ अपने भाषणों, वक्तव्यों में गोरक्षा, गो सेवा, गो संवर्धन की बात प्रभावी ढंग से रखें ।
९. गो उत्सव व गो पर्वों यथा - गोवत्सव्दादशी, गोपाष्टमी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी,बलराम जयंती (हलधर षष्ठी) इत्यादि के आयोजन करें, आयोजनों में सक्रिय हिस्सेदारी करें।
१०. पंचगव्य उत्पाद एवं औषधियों का प्रयोग करें, अन्य लोगों को इस हेतु प्ररित करे ।
११. गोशाला नियमित रुप से जावें, गोग्रास दान करें अन्य लोगों को इस हेतु प्रेरित करे ।
१२. पंचगव्य आयुर्वेद चिकित्सा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में सम्मानजनक स्थान शासकीय अस्पतालों में पंचगव्य आयुर्वेद चिकित्सक व पंचगव्य आयुर्वेदिक औषधियाँ की सुविधा उपलब्ध करवाये।
१३.पंचगव्य आधारित कृषि उत्पादनों को मान्यता दिलवाने के प्रयास करें।
१४. केन्द्र व राज्यों के आयुर्वेद, ऍलोपॅथी महाविद्यालयों, पशुविद्यालय व विज्ञान के छात्रों को इस विषय में अनुसंधान के लिये सुविधा प्रदान करें।
१५. गोवंश उर्जा का स्त्रोत इस विषय पर विशेष संशोधन के प्रयास करवाने चाहिये।
१६. केन्द्र व राज्यों द्वारा पंचगव्य आधारित उत्पादों पर बिक्री कर, उत्पादकर, जकात कर से मुक्ति दिलवाने का प्रयास करवाना चाहिये।
१७. पंचगव्य आधारित औषधियों, कृषि उत्पादों व अन्य उपयोगी वस्तुओं जैसे ॉम्पु, साबुन, धुपबत्ती इत्यादि के निर्माण को उद्योग का दर्जा देकर, इस उद्योग को बढावा देने हेतु शासकीय भूमि, ऋण, अनुदान जैसे सुविधाएँ उपलब्ध करवायें ।
१८. सफल केन्द्रों के कार्यों का प्रक्षेपण, इस विषय को लेकर मालिका एवम् विशेष कार्यक्रमों के प्रसारण हेतु सरकारी प्रचार प्रसार माध्यमों का उपयोग करें।
१९. जैविक खाद, कीटनियंत्रक व अन्य पंचगव्य आधारित कृषि उत्पादों व यंत्रो की खरीदी हेतु किसानों को विशेष अनुदान प्रदान करें व रासायनिक कृषि उत्पादों व ट्रॅक्टर की खरीदी हेतु अनुदान पूर्णतः बंद करें। ।
२०. शासकीय अस्पतालों, विद्यार्थी आवास स्थल, भारतीय सेना, जैसे विभिन्न स्थानों पर साबुन, शॅम्पू, अर्क, मच्छरनिरोधक व देव-धुप बत्ती जैसे पंचगव्य आधारित उत्पादों की उपलब्धता व उपयोग को अनिवार्य बनायें।
२१. लाखों गोवंश के मौत का कारण बनी प्लॉस्टिक थैलियों के निर्माण व उपयोग पर १००% बंदी लाने हेतु कानून बनायें।
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