बुधवार, 15 जुलाई 2015
इस्लाम और गाय
इस्लाम और गाय
देश मे विद्वेषपूर्ण और भ्रामक प्रचार किया जा रहा है की इस्लाम गौ वध की इज़ाजत देता है
निम्न उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है की इस्लाम और उसके पैगम्बर तथा प्रतिष्ठित नेता गाय को सदा आदर की द्रष्टी से देखते आये है
गाय का दूध और घी तुम्हारी तंदुरस्ती के लिए बहुत जरुरी है| उसका गोस्त नुकसानदेह एवम बीमारी पैदा करता है
“नुसरत हदो”
“नुसरत हदो”
बिला सक तुम्हारे लिए चौपायों मे भी सीख है| पेट मे से गोबर और खून के बीच मे से साफ़ दूध जो पीने वालों के लिए स्वाद वाला है
“कुरान सरीफ़ १६-६६”
“कुरान सरीफ़ १६-६६”
मुसलमानों को गाय को नहीं मारना चाहिए ऐसा करना हदीस के खिलाफ़ है|
“मौलाना हयात साहब खानखाना हाली समद साहब”
“मौलाना हयात साहब खानखाना हाली समद साहब”
मौलाना फारुखी लिखित “काहिर व बरकत” से पता चलता है की सरीफ़ मक्का ने भी गौ हत्या पर पाबन्दी लगवायी थी|
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध सेनानी हाकिम अजमल खान का कहना है| ना तो कुरान और ना अरब की प्रथा गाय की कुर्बानी की इज़ाजत देती है
गाय व उससे प्राप्त पदार्थों की महत्ता
गाय व उससे प्राप्त पदार्थों की महत्ता
गाय के गोमूत्र में तांबा होता है। जो मनुष्य के शरीर में पहुंचकर स्वर्ण में परिवर्तन हो जाता है। व स्वर्ण में सर्व रोगनाशक शक्ति होती है। गोमूत्र में अनेक रसायन होते हैं। जैसे नाइट्रोजन कार्बोलिक एसिड, दूध देती गाय के मूत्र में लैक्टोज सल्फर, अमोनिया गैस, कापर, पौटेशियम, यूरिया, साल्ट तथा अन्य कई क्षार व आरोग्यकारी अमल होते हैं।
गाय के गोबर में 16 प्रकार के उपयोगी खनिज पाये जातें हैं। गोमूत्र में आक, नीम व तुलसी आदि उबालकर, कई गुना पानी में मिलाकर बढ़िया कीट नियंत्रण बनते हैं। गोबर की खाद प्राकृतिक है इससे धरती की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। जबकि रसायनिक खाद व कीटनाशकों से धरती बंजर हो जाती है।
ब्रह्मा की सृष्टि के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राणी ‘गो वंश का रक्षणा’ हमें भारतीय संविधान के मूलभूत सिद्धांतों में इसे शामिल करना चाहिए। गो वंश के रक्षण, पालन व संवर्धन का कार्य सभी को करना चाहिए।
गाय ही श्रेष्ठ क्यों
गाय ही श्रेष्ठ क्यों
‘‘गाय ही श्रेष्ठ क्यों’’? मात्र कम फैट वाले दूध के कारण हमने गाय को पालना कम कर दिया और भैंसों का पालन बढ़ा दिया। कभी ये नहीं सोचा कि फैट व दूध की मात्रा के साथ गुणों का ध्यान भी रखा जाना चाहिये। ‘शंख’ चाहे जितना बड़ा हो पर छोटे से ’’मोती’ की बराबरी नहीं कर सकता। वनस्पति घी तथा देशी घी में फैट समान है फिर भी दोनों के भावों में दुगना अंतर है क्योंकि दोनों के गुणों में अंतर है। तो फिर गाय और भैंस के दूध—दही—मक्खन, घी आदि में भी अतंर होता है इस बात को स्वीकार करना चाहिये। पशुओं के स्वयं के गुण दोष का प्रभाव उनके उत्पाद अर्थात् दूध—दही पर भी पड़ता ही है
जैसी उत्तम खेती गाय की संतान बैल से हो सकती है, वैसे पाड़ों से नहीं। गाय सूर्य किरणों के ताप का सामना कर सकती है, इससे गाय (विशेष रूप से देशी गाय) का दूध ज्यादा स्वास्थ्यप्रद होता है। (युगशक्ति गायत्री, सित. ९०)
इन सब तथ्यों से बुद्धिमान व्यक्ति सहज रूप से ही समझ सकता है कि ‘‘गाय ही हमारी अर्थव्यवस्था के लिये श्रेष्ठ क्यों है?’’ क्योंकि हमारे अर्थव्यवस्था को संचालित करने वाले व्यक्ति तथा बच्चे (कल के नागरिक) जैसा गुणों वाला भोज्य पदार्थ ग्रहण करेंगे, वे वैसे बनेंगे और देश को भी वैसी ही गति एवं विकास प्रदान करेंगे।
सोमवार, 13 जुलाई 2015
सब समस्याओ का क्या समाधान है ? समाधान एक ही है, जवाब एक ही है वो है- हमारी गौमाता।
| आज हम अपने घर में सुख-शांति, आनंद का वातावरण चाहते है। हम चाहते है की हमारे बच्चे संस्कारवान बने और विद्वान बनकर अपने कुल का और अपने देश का नाम रोशन करे। लेकिन हो रहा इसके विपरीत है ऐसा क्यों हो रहा ? क्यों आज देश के बच्चे गलत रास्ते में जा रहे है ? क्यों आज घर-घर में अशांति-कलेश, दुःख-आभाव का वातावरण है ? क्यों आज हर घर में कोई न कोई एक रोगी और व्यसनी है ? क्यों आज देश में भ्रष्ट्राचार, अशांति, भय, बेमानी, आतंकवाद, भुखमरी, गरीबी, आभाव का वातावरण है ? क्यों आज हम अपने-अपने धर्म से भिमुख हो रहे है ? क्या आपने सोचा है इन सभी प्रशनो का क्या जवाब है ? इन सब समस्याओ का क्या समाधान है ? समाधान एक ही है, जवाब एक ही है वो है- हमारी गौमाता। और अधिक जानने हेतु देखिए सोम से शुक्रवार तक पूज्य श्री गोपाल मणि जी महाराज जी के पावन सानिध्य में गौकथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे सिर्फ आस्था चेन्नल में और जानिये की कैसे हमारी गौमाता के कृपा प्रताप से घर-परिवार, राष्ट्र और समूचा विश्व सुख-शांति, आनंद, समृद्धि के वातावरण के साथ जी सकता है, अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे - 0135 2532183, 09412968738 |
बुधवार, 10 जून 2015
गुरुवार, 4 जून 2015
'गावो विश्वस्य मातरः' रामसुखदास जी महाराज स्वामीजी
'गावो विश्वस्य मातरः' रामसुखदास जी महाराज स्वामीजी
‘गावो विश्वस्य मातरः’, संसारकी माता है गाय । जन्म देनेवाली माता तो बचपन में दूध पिलाती है और गाय तो पूरे जीवनभर दूध पिलाती है, मृत्यु समयमें भी गायका दहीं दिया जाता है । यह माँ भी है, दादी भी है , नानी, परनानी, परदादी भी है । सबको दूध पिलाती है । यह संपूर्ण संसारकी माँ है । गाय रक्षा करती है ।
एक जगह रात्रीको चोर आए तो गायने रस्सी तोड़कर उनके पीछे भागकर चोरोंकों भगा दिया । जैसे माँ रक्षा करें ऐसे रक्षा करती है, पालन करती है, प्यार, दुलार करती है ।गौ माताको याद करनेसे अंतःकरण निर्मल होता है । गायोकों खुजलानेसे असाध्य रोग भी ठीक हो जाते है, आप उचित समजो तो करके देख लो । गौकी रक्षा करनेसे अपनी रक्षा स्वाभाविक हो जाती है । आजकल लोगोनें गायका महत्व जानना बंद कर दिया है । गौके आशीर्वादसे लोक और परलोक दोनों सुधर जाते है । गौ माताकी कृपासे असंभव संभव हो जाता है । गायोंमें एक विलक्षण शक्ति होती है , उनको प्रसन्न, राजी किया जाय तो गौ सब तरहसे सुख देती है , सबकी रक्षा करती है । ईमानदारीसे गायोंकी रक्षाकी जाय तो उसके पालनमें कोई साधनमें कमी नहीं आएगी, आप हृदयसे करके देख लो । आप घरोमें एक-दो-दो गायें रखो तो सुगमतासे पालन हो जाय ! आजकल लोगोंकी भावना गायोंके प्रति कम हो गई है । गौ माता धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करती है । गौमूत्रसे बनी दवाईयोंसे बहुत फायदा होता है ।
जो गौका नुकसान करता है, उसका नुकसान होता है । अंग्रेज शासनके समयकी बात है, हिंदु-मुस्लिमकी लड़ाई हो रही थी तो कुछ मुस्लिम पहलवान शामको दंगा करके वापस जा रहे थे । उन्होने एक गायको पकड़ लिया और सोचाकी उसको मारकर पकाकर खाएँगे । तो एक पहलवानको पकडाकर मसाला लेने गए, पीछे उसको दया आयी तो गायको छोड़ दिया। पीछे उनलोगोंकों फाँसी हो गई तो रक्षा करनेवालेके पैरके नीचे गायके शिंग आ गए और उसकी रक्षा हो गई, यह सत्य घटना है ।
कल्याण अंकमें एक सत्य घटना प्रकाशित हुई थी ,एक हिसारका रहनेवाला ब्राह्मण था । बीकानेर जा रहा था, बीमार होनेसे चुरुमें रुक गया । उसने अपने भाईको चिट्ठी लिखी कि ज्यादा बीमार है, आप आ जाएँ । उनको रात्रीमें गौका स्वप्न आया कि तूने मुजे बचाया है, मैं तुजे बचाऊँगा ! उन्होनें एकबार कीचड़में फसी हुई गायकी जान बचाई थी ।बाद में उस सज्जनका स्वास्थ्य ठीक हो गया था ।
घरोंमेंसे साग-सब्जीके छिलके, आटेका छना हुआ कोरमा ऐसे खाद्य पदार्थ इकट्ठे करके गायोंकी सेवा करो तो कोई नया खर्चा भी न होकर सुगमतासे पालन हो जाएगा । हरा घासचारा दिया जाय, गुवार पानीमें मथकर दिया जाय, उसको गाय उत्साहसे खाती है । गौ किस तरहसे राजी हो, प्रसन्न हो ऐसा हृदयमें भाव रखना चाहिए । चीज तो सीमित होती है पर भाव असीम होता है । सेवासे कल्याण हो जाय । गाय बिक्री न करो, वरना कतलखाने चली जाएगी ! एक जगह हजोरों गायोंका पालन मुश्किल होता है पर सभी गृहस्थ एक-एक गायका पालन करें तो सुगमतासे गायकी रक्षा हो जाय । गायको सुई देकर दूध दोहना पाप है, ऐसा दूध नहीं पीना चाहिए । पहले ३६ करोड़ पशु थे, अभी गणना हुई तो १० करोड़ पशु बचे है । प्लास्टिकका उपयोग न करें । प्लास्टिक थेलियोमें बचा हुआ खानेका पदार्थ कूड़ेमें फेंकनेसे गायें खाकर मर जाती है, उनके पेटमेंसे १२-१३ किलो प्लास्टिकका कचड़ा निकला है ।अतः कागज, कपडेकी थेलीका प्रयोग करें । गायें दुःखपाकर मरती है तो प्लास्टिककी थेली बनानेवाले और प्रयोग करनेवाले पापके भागी होंगे ।
हिंदु और गौ पर आजकल बहुत आफत है, परिवार नियोजन मत कराओ । बच्चोंकों जन्म लेने दो, परिवार नियोजन करना पापकी बात है । गर्भपात निषेधके लिए तो विदेशमें भी कई संस्थायें काम करती है पर नसबंधीका विरोध नहीं करते है । जिस किसी तरहसे गाय और हिंदुओकी रक्षा करो वरना भारी नुकसान होगा । परिवार नियोजन करके मनुष्य पैदा नहीं हुए उस घाटेकी पूर्ति कभी नहीं होगी ।
एक जगह रात्रीको चोर आए तो गायने रस्सी तोड़कर उनके पीछे भागकर चोरोंकों भगा दिया । जैसे माँ रक्षा करें ऐसे रक्षा करती है, पालन करती है, प्यार, दुलार करती है ।गौ माताको याद करनेसे अंतःकरण निर्मल होता है । गायोकों खुजलानेसे असाध्य रोग भी ठीक हो जाते है, आप उचित समजो तो करके देख लो । गौकी रक्षा करनेसे अपनी रक्षा स्वाभाविक हो जाती है । आजकल लोगोनें गायका महत्व जानना बंद कर दिया है । गौके आशीर्वादसे लोक और परलोक दोनों सुधर जाते है । गौ माताकी कृपासे असंभव संभव हो जाता है । गायोंमें एक विलक्षण शक्ति होती है , उनको प्रसन्न, राजी किया जाय तो गौ सब तरहसे सुख देती है , सबकी रक्षा करती है । ईमानदारीसे गायोंकी रक्षाकी जाय तो उसके पालनमें कोई साधनमें कमी नहीं आएगी, आप हृदयसे करके देख लो । आप घरोमें एक-दो-दो गायें रखो तो सुगमतासे पालन हो जाय ! आजकल लोगोंकी भावना गायोंके प्रति कम हो गई है । गौ माता धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करती है । गौमूत्रसे बनी दवाईयोंसे बहुत फायदा होता है ।
जो गौका नुकसान करता है, उसका नुकसान होता है । अंग्रेज शासनके समयकी बात है, हिंदु-मुस्लिमकी लड़ाई हो रही थी तो कुछ मुस्लिम पहलवान शामको दंगा करके वापस जा रहे थे । उन्होने एक गायको पकड़ लिया और सोचाकी उसको मारकर पकाकर खाएँगे । तो एक पहलवानको पकडाकर मसाला लेने गए, पीछे उसको दया आयी तो गायको छोड़ दिया। पीछे उनलोगोंकों फाँसी हो गई तो रक्षा करनेवालेके पैरके नीचे गायके शिंग आ गए और उसकी रक्षा हो गई, यह सत्य घटना है ।
कल्याण अंकमें एक सत्य घटना प्रकाशित हुई थी ,एक हिसारका रहनेवाला ब्राह्मण था । बीकानेर जा रहा था, बीमार होनेसे चुरुमें रुक गया । उसने अपने भाईको चिट्ठी लिखी कि ज्यादा बीमार है, आप आ जाएँ । उनको रात्रीमें गौका स्वप्न आया कि तूने मुजे बचाया है, मैं तुजे बचाऊँगा ! उन्होनें एकबार कीचड़में फसी हुई गायकी जान बचाई थी ।बाद में उस सज्जनका स्वास्थ्य ठीक हो गया था ।
घरोंमेंसे साग-सब्जीके छिलके, आटेका छना हुआ कोरमा ऐसे खाद्य पदार्थ इकट्ठे करके गायोंकी सेवा करो तो कोई नया खर्चा भी न होकर सुगमतासे पालन हो जाएगा । हरा घासचारा दिया जाय, गुवार पानीमें मथकर दिया जाय, उसको गाय उत्साहसे खाती है । गौ किस तरहसे राजी हो, प्रसन्न हो ऐसा हृदयमें भाव रखना चाहिए । चीज तो सीमित होती है पर भाव असीम होता है । सेवासे कल्याण हो जाय । गाय बिक्री न करो, वरना कतलखाने चली जाएगी ! एक जगह हजोरों गायोंका पालन मुश्किल होता है पर सभी गृहस्थ एक-एक गायका पालन करें तो सुगमतासे गायकी रक्षा हो जाय । गायको सुई देकर दूध दोहना पाप है, ऐसा दूध नहीं पीना चाहिए । पहले ३६ करोड़ पशु थे, अभी गणना हुई तो १० करोड़ पशु बचे है । प्लास्टिकका उपयोग न करें । प्लास्टिक थेलियोमें बचा हुआ खानेका पदार्थ कूड़ेमें फेंकनेसे गायें खाकर मर जाती है, उनके पेटमेंसे १२-१३ किलो प्लास्टिकका कचड़ा निकला है ।अतः कागज, कपडेकी थेलीका प्रयोग करें । गायें दुःखपाकर मरती है तो प्लास्टिककी थेली बनानेवाले और प्रयोग करनेवाले पापके भागी होंगे ।
हिंदु और गौ पर आजकल बहुत आफत है, परिवार नियोजन मत कराओ । बच्चोंकों जन्म लेने दो, परिवार नियोजन करना पापकी बात है । गर्भपात निषेधके लिए तो विदेशमें भी कई संस्थायें काम करती है पर नसबंधीका विरोध नहीं करते है । जिस किसी तरहसे गाय और हिंदुओकी रक्षा करो वरना भारी नुकसान होगा । परिवार नियोजन करके मनुष्य पैदा नहीं हुए उस घाटेकी पूर्ति कभी नहीं होगी ।
दि। २८/१०/१९९८, प्रातः ८.३० बजेके प्रवचनसे
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