"आज ईद है"
कुछ मित्र हमें ईद की मुबारकबाद दे रहे हैं. कृपया करके हमें कोई भी व्यक्ति यह मुबारकबाद देने का कष्ट ना करे.
हम एक गौ सेवक हैं. सिर्फ़ सनातन धर्म को मानते हैं,अपने देवी देवताओं को और आदि शक्ति को मानते हैं. और गौ सेवा भी सनातन धर्म का ही एक महत्वपूर्ण भाग है.
हमारे शास्त्रों में या किसी भी पौराणिक कथा में इस "ईद" नामक त्योहार का कोई वर्णन नहीं मिलता है और ना ही यह त्योहार हमारे किसी देवी देवता को समर्पित है.
तब हम इसे क्यूँ मनाएँ? और क्यूँ बधाई लें.
जिसको बुरा लगा हो वो हमें मित्र मानना बंद कर सकता है. हमें कोई आपत्ति नहीं होगी.
आपको यह त्योहार मनाना हो तो मनाइए हमें आपत्ति नहीं है.
अगर किसी मित्र को भाई चारे पर भाषण देना हो तो पहले ईद मानने वाले वर्ग से कहिए की वो नवरात्रि भी मनाएँ और भाई चारे को मजबूत करें. आपको जो जवाब वहाँ से प्राप्त होगा वह आपकी खुजली आसानी से मिटा देगा.
जय श्री राम..
शनिवार, 18 जुलाई 2015
कुछ मित्र हमें ईद की मुबारकबाद दे रहे हैं.
बुधवार, 15 जुलाई 2015
गाय और भैंस की तुलना
गाय और भैंस की तुलना
गाय
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भैंस
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गाय के दूध, घी, छाछ, गोमूत्र व गोबर के 100 से भी अधिक गुण हैं और ये 150 से भी अधिक रोग मिटाते हैं।
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भैंस के दूध, घी, छाछ के अनेक अवगुण हैं।
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गाय के दूध-घी में रोग-प्रतिकारक शक्ति, बुद्धि-शक्ति, ओज-तेज बढ़ाने वाले सुवर्णक्षार व सेरिब्रोसाइड तत्त्व हैं।
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भैंस के दूध में ये तत्त्व नहीं हैं।
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गोमूत्र पृथ्वी की श्रेष्ठ संजीवनी (औषधि) है। अनेक रोगों की एक दवा माने ʹगोमूत्रʹ।
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भैंस के मूत्र का कोई प्रचलित उपचार नहीं है।
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गाय के दूध-घी में आँखों की रोशनी बढ़ाने वाला, अंधत्व मिटाने वाला केरोटिन व विटामिन ए भरपूर है।
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भैंस के दूध-घी में ये पोषक तत्त्व नहीं हैं।
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आयुर्वेद के ग्रंथों, विज्ञान व मानव-समाज के अभ्यास के आधार पर गाय का दूध वात, पित्त हरने वाला है।
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आयुर्वेद एवं मानव-समाज के अभ्यास के आधार पर भैंस का दूध कफ बढ़ाने वाला है। भैंस का दूध-घी पचने में भारी तथा बालक, प्रसूता, वृद्ध व बीमारों के लिए अहितकर। इसका दूध हृदयरोग करने वाला तथा कोलेस्ट्रॉल, चर्बी, जड़ता व आलस्य बढ़ाने वाला है।
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गाय का दूध-घी शरीर के भीतरी रोग जैसे – हृदयरोग, डायबिटीज, दुर्बलता, वृद्धत्व, श्वास, वात, आँखों की कमजोरी, जातीय दुर्बलता, मानसिक रोगों को मिटाने वाला है।
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भैंस का दूध-घी शरीर के भीतरी रोगों को उत्पन्न करता है।
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गाय के दूध की मात्रा बारह मास समतोल रहती है।
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भैंस गर्मी में कम दूध देती है अथवा सूख जाती है।
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गाय की छाछ अति स्वादिष्ट होती है तथा यह संग्रहणी रोग को मिटाने वाला अमृत है।
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भैंस की छाछ फीकी, कफ बढ़ाने वाली व पचने में भारी होती है।
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गाय का दूध-घी महँगा मिले तो भी सेवन करना चाहिए।
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भैंस का दूध-घी सस्ता मिले तो भी सेवन नहीं करना चाहिए।
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गाय अपने पालक को अनन्य प्रेम, मैत्री, करूणा व प्रसन्नता प्रदान करती है।
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भैंस में यह सब देने की क्षमता नहीं है।
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गाय पालक की प्रायः सारी आज्ञाओं का पालन करती है।
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भैंस में ऐसी बुद्धि ही नहीं होती।
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इस्लाम और गाय
इस्लाम और गाय
देश मे विद्वेषपूर्ण और भ्रामक प्रचार किया जा रहा है की इस्लाम गौ वध की इज़ाजत देता है
निम्न उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है की इस्लाम और उसके पैगम्बर तथा प्रतिष्ठित नेता गाय को सदा आदर की द्रष्टी से देखते आये है
गाय का दूध और घी तुम्हारी तंदुरस्ती के लिए बहुत जरुरी है| उसका गोस्त नुकसानदेह एवम बीमारी पैदा करता है
“नुसरत हदो”
“नुसरत हदो”
बिला सक तुम्हारे लिए चौपायों मे भी सीख है| पेट मे से गोबर और खून के बीच मे से साफ़ दूध जो पीने वालों के लिए स्वाद वाला है
“कुरान सरीफ़ १६-६६”
“कुरान सरीफ़ १६-६६”
मुसलमानों को गाय को नहीं मारना चाहिए ऐसा करना हदीस के खिलाफ़ है|
“मौलाना हयात साहब खानखाना हाली समद साहब”
“मौलाना हयात साहब खानखाना हाली समद साहब”
मौलाना फारुखी लिखित “काहिर व बरकत” से पता चलता है की सरीफ़ मक्का ने भी गौ हत्या पर पाबन्दी लगवायी थी|
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध सेनानी हाकिम अजमल खान का कहना है| ना तो कुरान और ना अरब की प्रथा गाय की कुर्बानी की इज़ाजत देती है
गाय व उससे प्राप्त पदार्थों की महत्ता
गाय व उससे प्राप्त पदार्थों की महत्ता
गाय के गोमूत्र में तांबा होता है। जो मनुष्य के शरीर में पहुंचकर स्वर्ण में परिवर्तन हो जाता है। व स्वर्ण में सर्व रोगनाशक शक्ति होती है। गोमूत्र में अनेक रसायन होते हैं। जैसे नाइट्रोजन कार्बोलिक एसिड, दूध देती गाय के मूत्र में लैक्टोज सल्फर, अमोनिया गैस, कापर, पौटेशियम, यूरिया, साल्ट तथा अन्य कई क्षार व आरोग्यकारी अमल होते हैं।
गाय के गोबर में 16 प्रकार के उपयोगी खनिज पाये जातें हैं। गोमूत्र में आक, नीम व तुलसी आदि उबालकर, कई गुना पानी में मिलाकर बढ़िया कीट नियंत्रण बनते हैं। गोबर की खाद प्राकृतिक है इससे धरती की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। जबकि रसायनिक खाद व कीटनाशकों से धरती बंजर हो जाती है।
ब्रह्मा की सृष्टि के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राणी ‘गो वंश का रक्षणा’ हमें भारतीय संविधान के मूलभूत सिद्धांतों में इसे शामिल करना चाहिए। गो वंश के रक्षण, पालन व संवर्धन का कार्य सभी को करना चाहिए।
गाय ही श्रेष्ठ क्यों
गाय ही श्रेष्ठ क्यों
‘‘गाय ही श्रेष्ठ क्यों’’? मात्र कम फैट वाले दूध के कारण हमने गाय को पालना कम कर दिया और भैंसों का पालन बढ़ा दिया। कभी ये नहीं सोचा कि फैट व दूध की मात्रा के साथ गुणों का ध्यान भी रखा जाना चाहिये। ‘शंख’ चाहे जितना बड़ा हो पर छोटे से ’’मोती’ की बराबरी नहीं कर सकता। वनस्पति घी तथा देशी घी में फैट समान है फिर भी दोनों के भावों में दुगना अंतर है क्योंकि दोनों के गुणों में अंतर है। तो फिर गाय और भैंस के दूध—दही—मक्खन, घी आदि में भी अतंर होता है इस बात को स्वीकार करना चाहिये। पशुओं के स्वयं के गुण दोष का प्रभाव उनके उत्पाद अर्थात् दूध—दही पर भी पड़ता ही है
जैसी उत्तम खेती गाय की संतान बैल से हो सकती है, वैसे पाड़ों से नहीं। गाय सूर्य किरणों के ताप का सामना कर सकती है, इससे गाय (विशेष रूप से देशी गाय) का दूध ज्यादा स्वास्थ्यप्रद होता है। (युगशक्ति गायत्री, सित. ९०)
इन सब तथ्यों से बुद्धिमान व्यक्ति सहज रूप से ही समझ सकता है कि ‘‘गाय ही हमारी अर्थव्यवस्था के लिये श्रेष्ठ क्यों है?’’ क्योंकि हमारे अर्थव्यवस्था को संचालित करने वाले व्यक्ति तथा बच्चे (कल के नागरिक) जैसा गुणों वाला भोज्य पदार्थ ग्रहण करेंगे, वे वैसे बनेंगे और देश को भी वैसी ही गति एवं विकास प्रदान करेंगे।
सोमवार, 13 जुलाई 2015
सब समस्याओ का क्या समाधान है ? समाधान एक ही है, जवाब एक ही है वो है- हमारी गौमाता।
| आज हम अपने घर में सुख-शांति, आनंद का वातावरण चाहते है। हम चाहते है की हमारे बच्चे संस्कारवान बने और विद्वान बनकर अपने कुल का और अपने देश का नाम रोशन करे। लेकिन हो रहा इसके विपरीत है ऐसा क्यों हो रहा ? क्यों आज देश के बच्चे गलत रास्ते में जा रहे है ? क्यों आज घर-घर में अशांति-कलेश, दुःख-आभाव का वातावरण है ? क्यों आज हर घर में कोई न कोई एक रोगी और व्यसनी है ? क्यों आज देश में भ्रष्ट्राचार, अशांति, भय, बेमानी, आतंकवाद, भुखमरी, गरीबी, आभाव का वातावरण है ? क्यों आज हम अपने-अपने धर्म से भिमुख हो रहे है ? क्या आपने सोचा है इन सभी प्रशनो का क्या जवाब है ? इन सब समस्याओ का क्या समाधान है ? समाधान एक ही है, जवाब एक ही है वो है- हमारी गौमाता। और अधिक जानने हेतु देखिए सोम से शुक्रवार तक पूज्य श्री गोपाल मणि जी महाराज जी के पावन सानिध्य में गौकथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे सिर्फ आस्था चेन्नल में और जानिये की कैसे हमारी गौमाता के कृपा प्रताप से घर-परिवार, राष्ट्र और समूचा विश्व सुख-शांति, आनंद, समृद्धि के वातावरण के साथ जी सकता है, अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे - 0135 2532183, 09412968738 |
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