मंगलवार, 12 अगस्त 2014

क्या कहते है धर्म शास्त्र और महापुरूष

क्या कहते है धर्म शास्त्र और महापुरूष
-धेनु. सदनम् रयीणम्-गाय सम्पतियों का घर है- अथर्ववेद
-गौमात्रा न विधते-यानी गौ अनुपमेय है- यजुर्वेद
-गाय निरपराध जीव है, उसे नहीं मारना चाहिये- ऋग्वेद-10.101-15
-गौहत्या जैसा घृणित दुष्कृत्य करने वाले का सिर धड से अलग कर देना चाहिये- ऋग्वेद-18.87.16.
-श्रीकृष्ण ने बृजमण्डल में गौ चारण नंगे पाॅंव किया- श्रीमद्भागवत महापुराण
-गौ द्विज-धैनु देव हितकारी, कृपा सिन्धू मानस तनूधारी- रामचरितमानस
-जो सवेरे शयन से उठकर भक्ति पूर्वक गौ की परिक्रमा करता है उसके द्वारा समूची पृथ्वी की परिक्रमा हो जाती है इसमें कोई संशय नहीं हैं- महाभारत श्रीकृष्ण-युधिष्ठर संवाद्
-गौहत्या की अनुमति देने वाला काटनेवाला-पकाने वाला, खरीदनेवाला, बेचने वाला परोसने वाला खाने वाला सभी गौहत्या के दोषी है। इनको मत्यु दण्ड मिलना चाहिये-मनु. 11.95
-गौरक्षा से ही मानव मात्र सुरक्षित हो सकता है- भगवान महावीर स्वामी
-एक बैल को मारना-एक मनुष्य को मारने के समान है- ईसा मसीह
-गाय का दूध रसायन, गाय का घी अमृत और गाय का माॅंस बीमारी हैं- पैंगंबर मोहम्मद साहब
-गाय की कुर्बानी इस्लामी धर्म का नियम नहीं हैं- फतबे हुमायुनी
-गौ हत्या हेतु मुस्लिम आग्रह मूर्खता की पराकाष्ठा हैं- सुलतान अहमद खाॅं
-ना कुरान, ना ही अरब प्रथा-गौ कुर्बानी की इजाजत देती हैं- हकीम अजमल खाॅं
-जब तक भारत भूमि पर गौमाता के रक्त की एक भी बूंद गिरेगी तब तक कोई धार्मिक अनुष्ठान सफल नहीं होगा- पूज्य देवराहा बाबा
-यह देहु आज्ञा तुर्क गाहे खपाउ, गउ घात का दोष जग से मिटाउ- चण्डी-दि-वार-गुरूगोविन्द सिंह

शनिवार, 9 अगस्त 2014

आवश्यकता गोसेवार्थ कार्यकर्ताओ की

आवश्यकता गोसेवार्थ कार्यकर्ताओ की 

जय गौमाता जय गोपाल 
गोसेवार्थ कार्यकर्ताओ की आवश्यकता है 
१. हिंदी और इंग्लिश में लिखने वाला 
२. इंग्लिश से हिंदी में बदलने वाला या हिंदी को इंग्लिश में  बदल ने वाला 
३. ब्लॉगर / वेब साईट बनाने वाला 
४. फोटोशॉप /फोटो एडिटर चलाने वाला 
५. लेखक 
६. प्रचार प्रसार में सहयोग देने वाला 
७. सोशलमीडिआ से प्रचारक (पेज संचालक )

इच्छुक व्यक्ति अपनी सेवा देने के लिए सम्पर्क करे 
धन्येवाद 

क्या कर सकते है गौक्रांति के लिए 


ईमेल करे gomathaji@gmail.com

whatapp no.9042322241


मंगलवार, 5 अगस्त 2014

!!गौ हत्या को यदि रोकना ही है तो लोगों को गाय के लिए जागरूक करना होगा!!

जय गौमाता जय गोपाल

जो समझदार लोग हैं वे अब तक समझ गए होंगे कि सरकार की तरफ से गौ हत्या नहीं रूक सकती है, क्योंकि गौ हत्या में आम जनता का बहुत बड़ा योगदान है। अब तक बहुत से लोगों ने राजनीतिक लाभ के लिए गौ हत्या को रोकने का मकसद बनाकर कई महासम्मेलन व आंदोलन किए हैं। परंतु मकसद पुरा होने पर लोग गौ हत्या को रोकने के चक्कर में अपने सिर पर मुसिबतों का पहाड़ नहीं उठाना चाहते हैं।

गौ हत्या को यदि रोकना ही है तो लोगों को गाय के लिए जागरूक करना होगा। आम जनता को महसूस कराना होगा कि गाय कितनी जरूरी है।

बच्चे गाय को जानने के बजाए मुर्दा मशीनों के बारे में पढ़ते हैं। शिक्षा पद्धति को नियंत्रण में लाना होगा ताकि बच्चे भी बड़े होने पर गौ पालन अवश्य करें।

डेयरी उद्योग को नियंत्रण में लाना होगा जिससे की दूध खरीदने के बजाए गौ पालन फायदेमंद व सुविधाजनक हो।
सरकार द्वारा खाद पर दी जाने वाली सबसिडी को बंद करना होगा जिससे खाद की किमत लोगों को समझ में आएगी।

सरकार द्वारा तेल पर दी जाने वाली सबसिडी को बंद करवाना होगा जिससे की बैलों की किमत लोगों को समझ आएगी।
गौ हत्या को रोकने के उपायों के लिए बुद्धिजीवियों से मदद माँगनी चाहिए न कि कुछ लोगों द्वारा महासम्मेलन करने से गौ हत्या रूकेगी। क्योंकि अब तक बहुत से महान लोगों ने कई आंदोलन करवा दिए परंतु परिणाम कुछ नहीं आया।

कुछ मूर्ख प्राणी कहते हैं कि गौ हत्या को रोकने के लिए हिंदू शेरों को तलवार उठानी पड़ेगी। जब आम हिंदू गौ हत्या में शामिल है, सरकार की नीतियाँ गौ हत्या की मुख्य वजह बन रही है तो ऐसी स्थिति में यदि युवा लड़ना भी चाहें तो सिर्फ गौ तस्कर तक ही पहुँच पाएँगे। कत्ल खानों से तो लड़ाई हो ही नहीं पाएगी।

शनिवार, 19 जुलाई 2014

आशा थी मोदी जी आपसे की आप जल्दी ही गऊ माँ को बचाने की पहल करेंगे।

आशा थी आपसे की आप जल्दी ही
गऊ माँ को बचाने की पहल करेंगे।

मोदी जी आप बाकी काम बाद में 
करना पहले हमारी गऊ माँ को राष्ट्र जीव 
घोषित कीजिये ।
तभी भारत विश्व गुरु बनेगा ।

अगर गऊ माँ इसी तरह कटती रहेगी तो 
भारत भी इसी तरह तडपता रहेगा 
और दिन प्रतिदिन बद से बदतर होता जायेगा।

मोदी जी आपको वोट सिर्फ हिन्दुओं ने 
ही दिए हैं और भविष्य में भी हिन्दू ही बीजेपी
को वोट देंगे ।
सुवर कहिये या कट्वे ये आपके कल भी
भी नहीं थे आज भी नहीं हैं और कल भी 
नहीं होंगे।
=================
जब तक गऊ हत्या बंद नहीं होगी यह देश
हिन्दू राष्ट्र नहीं बन सकता और न ही तरक्की
करेगा।

निवेदक 
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया 

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बुधवार, 16 जुलाई 2014

"देसी गाय के घी में है अद्भुत, विलक्षण एवं औषधीय जीवनी शक्ति"

"देसी गाय के घी में है अद्भुत, विलक्षण एवं औषधीय जीवनी शक्ति".
आईये जाने:-

देसी गाय की जितनी भी नस्ल होती हैं उन सभी के कंधाड़ ऊपर की ओर गोल-गोल निकले होते हैं. जो लोगअपने जीवन में वनस्पति तेल एवं डालडा आदि का सेवन न करते हुए सिर्फ देसी गाय के दूध एवं घी का ही सेवन करते हैं उनके जीवन में कभी किसी प्रकार के रोग नहीं होते हैं. भैंस के दूध एवं घी में किसी भी प्रकार के औषधीय गुण नहीं होते हैं व यह पचने में भी गरिष्ठ एवं हानिकारक ही होता है अतः भैंस के दूध/घी का सेवन भी न करना ही श्रेयस्कर है जबकि बिना कंधाड़ वाली, सपाट, जर्सी गायों के दूध एवं घी का तो भूलकर, गलती से भी सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ये शरीर के लिए अत्यंत रोगजनक एवं नुकसान दायक होते हैं.

१/. देसी गाय के घी की दो-दो बूँद दोनों नासिकाओं में सुबह-शाम डालने सेहोने वाले अद्भुत लाभ इस प्रकार हैं:
माईग्रेन दर्द ठीक होता है;
एलर्जी खत्म हो जाती है;
कान का पर्दा बिना ऑपरेशन के ही ठीक हो जाता है;
लकवा-रोग में लाभ मिलता है;
नाक की खुश्की दूर होती है;
पागलपन दूर होता है;
कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लौट आती है;
मानसिक शांति मिलती है,
याददाश्त तेज होती है और दिमाग तरोताजा हो जाता है.
बाल झड़ना समाप्त होकर नए काले बाल आने लगते हैं.
देसी गाय के घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार, नाक में प्रयोग करने से शरीर के अन्दर त्रिदोष यानि वात, पित्त और कफ में संतुलन हो जाता है.

२/. हिचकी के न रुकने पर खाली गाय का आधा चम्मच घी खाए, हिचकी स्वयं रुक जाएगी.

३/. अन्य वनस्पति तेल एवं डालडा आदि का सेवन बंद कर अगर उनके स्थान पर देसी गाय के घी का नियमित रूप सेवन किया जाए तो एसिडिटी व कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है, बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है. अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास देसी गाय के दूध में एक चम्मच देसी गाय का घी और मिश्री डालकर पिएँ तुरंत राहत महसूस होगी.

४/. ध्यान रखें देसी गाय के घी के सेवन से न तो कॉलेस्ट्रॉल बढ़ता है और न ही वजन बढ़ता है, बल्कि देशी गाय का घी शरीर के वजन को संतुलित करता है यानि कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम
होता है.

५/. देसी गाय के घी में स्वास्थ्य के लिय फायदा पहुँचाने वाला अच्छा कोलेस्ट्रॉल अर्थात (HDL) पाया जाता है साथ ही साथ देसी गाय का घी शरीर में गंदे कोलेस्ट्रॉल अर्थात (LDL) को जमा नहीं होने देता है जिससे मनुष्य के शरीर के अन्दर उच्च-रक्तचाप एवं ह्रदय के ब्लाकेज संबंधित संभावनाएँ समाप्त हो जाती हैं. उच्च-कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को तथा सभी स्वस्थ लोगों को भी रिफाईंड तेल एवं डालडा आदि का सेवन बंद करके यथासंभव, जरूरतपूर्ता, देसी गाय के घी का ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि यह मनुष्य के लिए न सिर्फ एक बहुत अच्छा टॉनिक ही है बल्कि यह दैविक गुणों से भरपूर एक अद्वित्तीय अमृततुली औषधि भी है. जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है, ऐसा व्यक्ति भी अगर देसी गाय के घी का सेवन करे तो उसका ह्रदय भी शनैः शनैः रोगमुक्त होकर मज़बूत होता जाता है.

६/. एक चम्मच देसी गाय के शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से
देसी गाय का ही शहद मिला हुआ कुनकुना दूध पीने से आँखों की ज्योति तेजी से बढ़ती है.

७/. सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करें, सरदर्द ठीक हो जायेगा. इसी प्रकार हथेली और पाँव के तलुओं में जलन होने की स्थिति में देसी गाय के घी में थोड़ा ठंडा पानी मिलाकर उनकी मालिश करने से तुरंत लाभ मिलता है.

८/. देसी गाय के पुराने घी से बच्चों की छाती और पीठ पर मालिश करने से बच्चों की कफ़ की शिकायत दूर हो जाती है.

९/. देसी गाय के 20-25 ग्राम घी को मिश्री के साथ मिलाकर खिलाने से शराब, भाँग व गांजे के नशे का प्रकोप कम हो जाता है.

१०/. सर्प के काटने पर उल व्यक्ति को 100-150 ग्राम देसी गाय का घी तुरंत पिलायें व ऊपर से जितना ज्यादा से ज्यादा गुनगुना पानी पिला सकें पिलायें. ऐसा करने से ग्रस्त व्यक्ति को उल्टी और दस्त तो लगेंगे लेकिन इनके साथ ही साँप का विष भी शरीर में से कम हो जायेगा.

११/. देसी गाय का घी न सिर्फ स्वस्थ व्यक्ति के अन्दर के अन्दर कैंसर पैदा होने की संभावनाओंको हीसमाप्तकरता है बल्कि यदि कैंसरग्रस्त रोगी को भी अगर देसी गाय के घी का सेवन कराना आरंभ किया जाए तो यह इस बीमारी के फैलने
को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है. देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक
क्षमता होती है. इसके सेवन से स्तन तथा आँत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है.

घर घर गाय पले

आपका मित्र
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया
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एड्स से बचायेगा गाय का दूध

*** एड्स से बचाएगा गाय का दूध ***

गाय के दूध को बहुत पौष्टिक होता है । भारत में सदियों से इसके फायदों की बात की जाती रही है । यहां तो नवजात बच्चों को भी गाय का दूध पिलाया जाता था पर अब हमारी सरकारों ने ऐसी व्यवस्था कर दी   है कि अधिकतर लोगों के दिमाग में यह बिठा दिया गया है कि गाय दूध ही नहीं देती या उसकी उपयोगिता ही नहीं है
***कृपया यह ध्यान रखें कि हम गौमाता यानि देसी गाय की बात कर रहे हैं गाय जैसे दिखने वाले प्राणी जिसे जर्सी कहते हैं उसकी बात नहीं कर रहे हैं उसे तो सूअर के जींस डाल कर मांस के लिए तैयार किया था ।
अतः गाय का मतलब देसी भारतीय गाय / गौमाता ।

अब पता चला है कि इसका दूध एचआईवी वायरस से भी निपट सकता है। देसी गाय के दूध पर यह रिसर्च ऑस्ट्रेलिया में की गई है। रिसर्च के नतीजे आने के बाद कहा गया है कि देसी गाय के दूध से एचआईवी वायरस पर असर
करने वाली क्रीम या जेल बनाया जा सकता है ।
देसी गाय के दूध में ऐंटीबॉडी यानी रोग प्रतिरक्षी होते हैं , ये शरीर के इम्यून सिस्टम या प्रतिरक्षी तंत्र को स्वस्थ रखने और उसे मजबूत बनाने का काम करते हैं. जब एचआईवी वायरस शरीर पर हमला करता है तो वह प्रतिरक्षी तंत्र को कमजोर करने
लगता है।  देसी गाय के दूध में मौजूद ऐंटीबॉडी इस से लड़ सकते हैं।

ऐंटीबॉडी एक तरह का प्रोटीन होता है जो बीमारियों से लड़ने का काम करता है। संक्रमण का खतरा नहीं है मेलबर्न यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों ने गर्भवती गायों पर शोध किया तो यह बात सामने आई। गर्भावस्था के आखिरी महीनों में ही दूध बनने लगता है। इसे फर्स्ट मिल्क या कोलोस्ट्रम कहा जाता है. रिसर्च के लिए इसी का इस्तेमाल किया गया। रिसर्च टीम के अध्यक्ष प्रोफेसर डामियान पर्सल बताते हैं कि कोलोस्ट्रम में भारी मात्रा में एंटीबॉडी मौजूद होते हैं, जो बाद में धीरे धीरे यह मात्रा कम होती रहती है, “यदि जन्म के बाद बछड़े को दूध ना मिले तो उसे बीमार होने का खतरा रहता है। कई बार तो संक्रमण के कारण उसकी जान भी जा सकती है.”
एचआईवी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह वायरस कई तरह का होता है. पर्सल
बताते हैं, “हर व्यक्ति में एचआईवी के उतने ही अलग प्रकार हो सकते हैं जितने इस पृथ्वी पर इंसान हैं. कम ही लोगों में यह क्षमता होती है कि उनका शरीर वायरस के प्रकार को समझ पाए और उसके खिलाफ
ऐंटीबॉडी बना सके। लेकिन देसी गाय ऐसा कर सकती हैं।”
यही वजह है कि गाय को एचआईवी संक्रमण का खतरा नहीं होता।

वैज्ञानिक अब चाह रहे हैं कि दवा बनने वाली कंपनी के साथ मिल कर संक्रमण को रोकने के लिए दवा तैयार की जाए। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने इसके लिए बायोटेक्नॉलॉजी कंपनी इम्यूरोन
से बात भी शुरू कर दी है। इन दवाओं को क्रीम या जैल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बारे में भी चर्चा चल रही है कि महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक रिंग में इसका इस्तेमाल किया जाए ताकि एंटीबॉडी लगातार वायरस के खतरा से बचा सकें।
देसी गाय के दूध से इन दवाओं का बनना इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि इनकी कीमत काफी कम रहेगी। पर्सल की टीम की मारित क्रामस्की बताती हैं, “गाय के दूध के इस्तेमाल से हम बड़ी संख्या में एंटीबॉडी तैयार कर सकते हैं और इस पर खर्च भी बहुत कम आएगा. हम उम्मीद कर रहे हैं कि अंत में हमारे पास एक ऐसा प्रॉडक्ट होगा जिसकी कीमत ज्यादा नहीं होगी।”
दुनिया भर में करीब साढ़े तीन करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हैं। इस रिसर्च के
बाद उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही एचआईवी की रोकथाम के लिए टीका भी तैयार किया जा सकेगा।

 साथियों  अब शायद आपको समझ में आ गया होगा कि हमारे पूर्वज क्यों गाय की महिमा गाते हैं और हम मूर्खों की तरह विदेशी दवाओं पर तो विश्वास कर लेते है पर अपनी संस्कृति और अपनी विरासत को सहेजने में शर्म महसूस करते हैं ।

यदि हर भारतीय सिर्फ देसी गाय का दूध पीना ही शुरू कर दे तो गाय तो बचेगी ही साथ ही आपको आरोग्य फ्री में मिलेगा ।

अपना देश अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति अपनी भाषा अपना गौरव
निवेदक आपका मित्र
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया
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वन्दे मातरम्
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बुधवार, 9 जुलाई 2014

गाय एक अद्भुत रसायनशाला है ।

गाय एक अद्भुत रसायनशाला है ।

" जननी जनकार ढूध पिलाती , केवल साल छमाही भर ;
" गोमाता पय-सुधा पिलाती , रक्षा करती जीवन भर " ।

- अमेरिका के कृषि विभाग द्वारा प्रकाशित हुई पुस्तक " THE COW IS A WONDERFUL LABORATORY " के अनुसार प्रकृति ने समस्त जीव-जंतुओं और सभी दुग्धधारी जीवों में केवल गाय ही है जिसे ईश्वर ने 180 फुट (2160 इंच ) लम्बी आंत दी है जो की एनी पशुओ में ऐसा नहीं है जिसके कारण गाय जो भी खाती-पीती है वह अंतिम छोर तक जाता है ।

लाभ :- जिस प्रकार दूध से मक्खन निकालने वाली मशीन में जितनी अधिक गरारियां लगायी जाती है उससे उतना ही वसा रहित मक्खन निकलता है , इसीलिये गाय का दूध सर्वोत्तम है ।

गो वात्सल्य :- गौ माता बच्चा जनने के 18 घंटे तक अपने बच्चे के साथ रहती है और उसे चाटती है इसीलिए वह लाखो बच्चों में भीवह अपने वच्चे को पहचान लेती है जवकि भैस और जरसी अपने बच्चे को नहीं पहचान पायेगी । गाय जब तक अपने बच्चे को अपना दूध नहीं पिलाएगी तब तक ढूध नहीं देती है , जबकि भैस , जर्सी होलिस्टयन के आगे चारा डालो और ढूध दुह लो ।

*** बच्चो में क्रूरता इसीलिए बढ़ रही है क्योकि जिसका ढूध पी रहे है उसके अन्दर ममता नहीं है ।

खीस :- बच्चा देने के गाय के स्तन से जो दूध निकलता है उसे खीस, चाका, पेवस, कीला कहते है , इसे तुरंत गर्म करने पर फट जाता है । वच्चा देने के 15 दिनों तक इसके दूध में प्रोटीन की अपेक्षा खनिज तत्वों की मात्रा अधिक होती है , लेक्टोज , वसा ( फैट ) एवं पानी की मात्रा कम होती है ।
खीस वाले दूध में एल्व्युमिन दो गुनी , ग्लोव्लुलिन 12-15 गुनी तथा एल्युमीनियम की मात्रा 6 गुनी अधिक पायी जाती है ।
लाभ:- खीज में भरपूर खनिज है यदि काली गौ का ढूध ( खीझ) एक हफ्ते पिला देने से वर्षो पुरानी टी वी ख़त्म हो जाती है ।

सींग :- गाय की सींगो का आकर सामान्यतः पिरामिड जैसा होता है , जो कि शक्तिशाली एंटीना की तरहआकाशीय उर्जा ( कोस्मिक एनर्जी ) को संग्रह करने का कार्य सींग करते है ।

गाय का ककुद्द ( ढिल्ला ) :- गाय के कुकुद्द में सुर्य्केतु नाड़ी होती है जो सूर्य से अल्ट्रावायलेट किरणों को रोकती है , 40 मन ढूध में लगभग 10 ग्राम सोना पाया जाता है जिससे शारीर की प्रतिरोधक क्षमता बढती है इसलिए गाय का घी हलके पीले रंग का होता है ।

गाउ का दूध :- गाय के दूध के अन्दर जल 87 % वसा 4 %, प्रोटीन 4% , शर्करा 5 % , तथा अन्य तत्व 1 से 2 % प्रतिसत पाया जाता है ।

गाय के दूध में 8 प्रकार के प्रोटीन , 11 प्रकार के विटामिन्स , गाय के दूध में ' कैरोटिन ' नामक प्रदार्थ भैस क्र दस गुना अधिक होता है ।

भैस का दूध गर्म करने पर उसके पोषक ज्यादातर ख़त्म हो जाते है परन्तु गाय के दुध के पोषक तत्व गर्म करने पर भी सुरक्षित रहता है ।

गाय का गोमूत्र :- गाय के मूत्र में आयुर्वेद का खजाना है , इसके अन्दर ' कार्बोलिक एसिड ' होता है जो कीटाणु नासक है , गौ मूत्र चाहे जितने दिनों तक रखे ख़राब नहीं होता है इसमें कैसर को रोकने वाली ' करक्यूमिन ' पायी जाती है ।

गौ मूत्र में नाइट्रोजन ,फास्फेट, यूरिक एसिड , पोटेशियम , सोडियम , लैक्टोज , सल्फर, अमोनिया, लवण रहित विटामिन ए वी सी डी ई , इन्जैम आदि तत्व पाए जाते है ।

देसी गाय के गोबर-मूत्र-मिश्रण से ' प्रोपिलीन ऑक्साइड " उत्पन्न होती है जो वारिस लाने में सहायक होती है । इसी के मिश्रण से ' इथिलीन ऑक्साइड ' गैस निकलती है जो ओपरेशन थियटर में काम आता है ।
गौ मूत्र में मुख्यतः 16 खनिज तत्व पाये जाते है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाता है ।

गाय का शरीर :- गाय के शरीर से पवित्र गुग्गल जैसी सुगंध आती है जो वातावरण को शुद्ध और पवित्र करती है ।

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जय गौ माता ... जय हिंदुत्व ...

जय हिन्द .... वन्देमातरम .....


आपका मित्र 
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया 
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