मंगलवार, 11 मार्च 2025

अभी नहीं तो कभी नहीं – गौ-रक्षा एक अनिवार्य संकल्प

अभी नहीं तो कभी नहीं – गौ-रक्षा एक अनिवार्य संकल्प

आज गौ-तस्करी, गौ-हत्या और गौ-मांस के निर्यात जैसी भयावह समस्याएँ हमारे सामने खड़ी हैं। यदि हम अब भी जागरूक नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमारी इस उदासीनता का खामियाजा भुगतेंगी। गौ-रक्षा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आवश्यकता भी है।

गौ-पालन के लाभ और इसकी आवश्यकता

गौ-पालन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार हो सकता है। आज के दौर में कृषि घाटे का व्यवसाय बनती जा रही है, जिससे करोड़ों किसान प्रभावित हैं। गौ-पालन को वैज्ञानिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से अपनाकर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सकता है।

गाय से प्राप्त दूध, घी, दही, गोमूत्र और गोबर जैसे उत्पाद स्वास्थ्य के लिए अमृत समान हैं। यही नहीं, जैविक खेती में गोबर खाद और गोमूत्र से बनी जैविक कीटनाशक का उपयोग करने से रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। किसानों को इस दिशा में प्रशिक्षित करने की सख्त जरूरत है।

गोशालाओं का विकास – गौ-रक्षा की रीढ़

गौ-रक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम गोशालाएँ हैं। यदि गोशालाओं को उचित संसाधनों से सुसज्जित किया जाए, तो वे केवल गायों के संरक्षण का ही नहीं, बल्कि आजीविका और स्वावलंबन का भी केंद्र बन सकती हैं।

गोशालाओं के लाभ:

  1. गौ-संरक्षण – बूढ़ी और अनुपयोगी समझी जाने वाली गायों को यहाँ उचित देखभाल मिल सकती है।
  2. गौ-आधारित उद्योग – गोबर से खाद, कंडे, बायोगैस, गौमूत्र से दवा और पंचगव्य उत्पादों का निर्माण कर आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सकती है।
  3. रोजगार का सृजन – ग्रामीण युवाओं को गौ-पालन और गौ-उद्योग से जोड़कर नए रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं।

गांव-गांव में गोशालाएँ और गौ-चर भूमि

गौ-रक्षा को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक गाँव में कम से कम एक गोशाला होनी चाहिए। प्रत्येक परिवार में कम से कम एक गाय पालने को प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए शासन और समाज को मिलकर योजना बनानी होगी। गौ-चर भूमि का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है ताकि गौवंश को उचित चरागाह उपलब्ध हो।

जनजागरण और सरकार की भूमिका

गौ-रक्षा केवल कुछ संस्थानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की जरूरत है। शासन और ग्रामवासियों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि गौ-हत्या और तस्करी पर सख्त रोक लगे, तथा गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाया जाए

निष्कर्ष

यदि हम अभी नहीं जागे, तो गौ-संरक्षण केवल किताबों में सिमटकर रह जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए गौ-सेवा का संकल्प लेना होगा। आइए, मिलकर इस पुनीत कार्य को गति दें – अब नहीं तो कभी नहीं!

गौमाता की जय!



गौमाता की रक्षा – समय की पुकार

गौमाता की रक्षा – समय की पुकार

समय बदल रहा है!

आज के आधुनिक दौर में गौ माता केवल एक सजावट की वस्तु बनती जा रही हैं। जिन गलियों और आंगनों में कभी गौ माता का वास हुआ करता था, वहां अब सिर्फ कंक्रीट के जंगल खड़े हैं। जिस देश में गौ माता को माता का दर्जा दिया गया है, वहां आज उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है।

गौ माता का महत्व – धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से

सनातन हिंदू समाज में गौ माता को पूजनीय माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है:

"गावो विश्वस्य मातरः" – गाय पूरे विश्व की माता है।

गौ माता सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानव जीवन, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अति आवश्यक है।

गौ माता का पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोबर, गौमूत्र) अनेक रोगों का नाश करता है।
✅ #गौमूत्र और #गोबर से जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है।
गौ माता का दूध अमृत समान होता है, जिसमें ओमेगा-3 और कई पोषक तत्व होते हैं।

गाय बचेगी, तो देश बचेगा!

अगर गौ माता लुप्त हो गईं, तो हमारी संस्कृति, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर भारी संकट आ सकता है।

🚩 गौ माता के बिना जैविक खेती संभव नहीं।
🚩 गौ आधारित अर्थव्यवस्था से किसानों और ग्रामीण भारत को मजबूती मिलती है।
🚩 गौ माता से पर्यावरण संतुलन बना रहता है, जिससे जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकता है।

हमारी जिम्मेदारी – गौरक्षा संकल्प

हमें यह संकल्प लेना होगा कि:

गौमाता की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
पॉलिथिन का उपयोग बंद करेंगे, ताकि गौ माता इसे खाकर बीमार न हों।
गौशालाओं को सहयोग देंगे और बेसहारा गायों को आश्रय देंगे।
✅ #गौमाता से जुड़े उत्पादों (गौ मूत्र, गोबर, #पंचगव्य) का उपयोग करेंगे।

🚩 आइए, गौ रक्षा के इस संकल्प में हम सभी जुड़ें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर और समृद्ध भारत का निर्माण करें! 🚩


सोमवार, 10 मार्च 2025

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने से होने वाले लाभ

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने से होने वाले लाभ

भारत में गौ माता को पूजनीय और पवित्र माना गया है। प्राचीन काल से ही सनातन संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, क्योंकि यह मानव जाति को पोषण, कृषि, और आध्यात्मिक उन्नति में सहयोग देती है। यदि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाता है, तो इससे कई सकारात्मक परिवर्तन हो सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इससे क्या-क्या लाभ होंगे।


1. गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध

यदि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाता है, तो भारत में गौ हत्या पर सख्त कानून लागू किया जा सकता है। इससे अवैध कत्लखानों पर पूर्ण नियंत्रण होगा और गोवंश की रक्षा सुनिश्चित होगी। वर्तमान में कई राज्यों में गौहत्या प्रतिबंधित है, लेकिन संपूर्ण भारत में एक समान कानून नहीं है। राष्ट्र माता का दर्जा मिलने से यह राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी हो सकेगा।

लाभ:
✔ गौ हत्या और गौ तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
✔ गोवंश की संख्या में बढ़ोतरी होगी, जिससे जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा।


2. गौ संरक्षण को संवैधानिक दर्जा

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से इसे संवैधानिक संरक्षण मिलेगा। इससे सरकार और प्रशासन पर गौ रक्षा के लिए कठोर नीतियां लागू करने की जिम्मेदारी आएगी।

लाभ:
✔ गौशालाओं को अधिक सरकारी सहायता मिलेगी।
✔ गौ आधारित शोध और चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा।
✔ गौमूत्र और पंचगव्य चिकित्सा को आधिकारिक मान्यता मिल सकेगी।


3. सनातन संस्कृति को मजबूती

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति को नया बल मिलेगा। हजारों वर्षों से चली आ रही गौ पूजन की परंपरा को संवैधानिक मान्यता मिलेगी, जिससे भारतीय समाज अपनी जड़ों से और अधिक जुड़ सकेगा।

लाभ:
✔ सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार होगा।
✔ गौ माता के प्रति श्रद्धा और सम्मान में वृद्धि होगी।
✔ देश में धार्मिक सौहार्द्र और आध्यात्मिक चेतना बढ़ेगी।


4. गौ आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

गौ माता केवल आध्यात्मिक महत्व नहीं रखती बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जैविक खेती, गौ आधारित चिकित्सा, और पंचगव्य उत्पादों का उपयोग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।

लाभ:
✔ जैविक खाद और गौमूत्र से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसान आत्मनिर्भर होंगे।
✔ पंचगव्य उत्पादों (गौ मूत्र, गोबर, दूध, घी, दही) का व्यापार बढ़ेगा।
✔ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


निष्कर्ष

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने से भारत को सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से लाभ मिलेगा। यह न केवल गौ रक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम होगा, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा। यदि सरकार और समाज मिलकर इस दिशा में कार्य करें, तो आने वाले समय में भारत पुनः अपनी गौरवशाली परंपराओं को पुनर्स्थापित कर सकता है।

"गौमाता का सम्मान – राष्ट्र का उत्थान!"



जय गौमाता राष्ट्रमाता

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से क्या लाभ होगा?

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से कई सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ हो सकते हैं। कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

1. संस्कृति और धार्मिक महत्व

  • हिंदू धर्म में गौ माता को पूजनीय माना गया है। उन्हें राष्ट्र माता घोषित करने से भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मजबूती मिलेगी।
  • देशभर में गौ रक्षा और संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।

2. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ

  • देशी गायों से प्राप्त गोबर और गौमूत्र का उपयोग जैविक खेती में किया जाता है, जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी और खेती अधिक उपजाऊ बनेगी।
  • गोपालन से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

3. स्वास्थ्य संबंधी लाभ

  • देशी गाय का दूध, घी और अन्य उत्पाद पोषण से भरपूर होते हैं और आयुर्वेद में इन्हें स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।
  • गौमूत्र और पंचगव्य चिकित्सा को और अधिक मान्यता मिलेगी, जिससे प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा।

4. पर्यावरण संरक्षण

  • अधिक गौपालन से जैविक खाद का उपयोग बढ़ेगा, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और जल प्रदूषण कम होगा।
  • गायों की रक्षा से पारंपरिक पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा, जो पर्यावरण के अनुकूल है।

5. गौहत्या पर नियंत्रण

  • गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से गौहत्या पर कठोर प्रतिबंध लग सकता है, जिससे पशु संरक्षण को बल मिलेगा।
  • इससे अवैध कत्लखानों पर नियंत्रण होगा और गौ तस्करी कम हो सकती है।

निष्कर्ष

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक खेती, स्वास्थ्य और पर्यावरण को लाभ मिलेगा। इससे भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने में मदद मिल सकती है।



शनिवार, 15 फ़रवरी 2025

जन प्रतिनिधि (राजनेता) कैसे गौसेवा कर सकते है

जन प्रतिनिधि (राजनेता)

विश्व के सबसे बड़े प्रजातंत्र के सम्बल, जन प्रतिनिधियों में समाज को दिशा देने (Direction) की अद्भुत क्षमता होती है। भारतीय संसद और विधानसभाओं, विधानमण्डलों में लगभग नौ हजार जन प्रतिनिधि है। गौरक्षा एवं गौ संवर्धन के प्रति उनकी प्रबिध्दता भारत की काया पलट कर सकती है। जन प्रतिनिधि निम्नलिखित तरीकों से गौ सेवा के महाआंदोलन में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर सकते हैं :-

1. राष्ट्रीय गोवंश आयोग की रिपोर्ट को 100% लागू करवाने का भरसक प्रयास करें।

2. संसद एवं विधानसभाओं में गोमाता एवं गोवंश के हत्यारों के विरुध्द कठोरतम कानून बनाये जावें। संत विनोबा भावे ने कहा था - "गौ हत्या मातृ हत्या ही है।"

3. अपने घरों, बंगलों में गौ माता रखकर गो सेवा करें व आनेवालों को गो सेवा हेतु प्रेरित करें।

4. अपने भाषणों, वक्तव्यों में गोरक्षा, गोसेवा गौसंवर्धन जैसे विषयों का उल्लेख करें व जनमानस तैयार करें।

5. गौ हत्यारों के खिलाफ पुलिस प्रशासन को कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने हेतु दबाव बनावें ।

६. समय-समय पर संसद व विधानसभाओं में गो रक्षा, गो हत्या, गो संवर्धन के प्रश्न उठाकर वातावरण तैयार करें ।

७. स्वयं पंचगव्य निर्मित पदार्थों तथा औषधियों का प्रयोग करें व जनता से भी उनका प्रयोग करने का आव्हान करें ।

८. अपने निर्वाचन क्षेत्रों में अधिकाधिक गो शालाएँ खुलवाकर उनके समुचित प्रबंधन की व्यवस्था करें व शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता व अनुदान दिलवाने के प्रयास करें ।

८. गो पर्व एवं गो उत्सव यथा गोपाष्टमी, गोवत्स व्दादशी, बलराम जयंती (हलधर षष्ठी), श्री कृष्ण जन्माष्टमी इत्यादि के बडे आयोजन करें ।

९. जैविक कृषि के पक्ष में व रासायनिक खेती के विरुध्द वातावरण बनाएँ, संसद व विधानसभाओं में इस संबंध में उचित कानून बनाने हेतु प्रयास करें।

१०. स्वयं गौग्रास निकाले, गौ सेवा हेतु धन संग्रह कर उचित उपयोग करें ।

११. अपने राजनैतिक दल को राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, खाद्यान्न व पर्यावरण सुरक्षा में गोवंश के योगदान व महत्व से अवगत करवाकर, दलगत राजनीति से उपर उठने व गोरक्षा एवम् गोसवंर्धन हेतु आवाज उठाने के लिये सहमत व प्रेरित कर अपने नैतिक कर्तव्य का निर्वाह करना चाहिये।

१२. गोरक्षा से संलग्न कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुलझाने में सक्रिय सहयोग प्रदान कर गौसेवा करनी चाहिये।

१३. किसानों को जैविक कृषि हेतु पंचगव्य से निर्मित कीटनाशक, फसलरक्षक व बैलचलित उपकरणों व उर्जा के साधनों में शासन से ऋण व अनुदान दिलवायें।

१४. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में पंचगव्य आयुर्वेद पाठ्यक्रम, पंचगव्य चिकित्सा व औषधि को सम्मानजनक स्थान दिलावें ।

शनिवार, 9 नवंबर 2024

गोपाष्ठमी की मंगलमय बधाई

वेदलक्षणा गोपाष्टमी के समृद्धि महापर्व की गोभक्त धर्मात्माओं को बहुत-बहुत बधाई, हम सब गोसेवाव्रतपूर्वक धेनु संरक्षण, धरती संपोषण, प्रकृति संवर्धन, पर्यावरण परिशोधन तथा सनातन संस्कृति के विस्तार का संकल्प धारण करें।

• अपने दैनिक आहार, औषधी तथा उपासना में गोदुग्धान्न एवं गोकृषि अन्न ग्रहण करने का नियम लीजिए और निज उत्पादन से गौग्रास समर्पण कीजिए।

• वैदिक काल से आरक्षित गोभूमियों को सीमांकित, विकसित एवं गोवंश के लिए आरक्षित कराने हेतु अभियान चलाने वालों का सहयोग कराएं।

• वेदलक्षणा गोमाता को संवैधानिक सम्मान दिलाने, गोपालन मंत्रालय का गठन कराने और सम्पूर्ण गोवंश संरक्षण का केन्द्रीय कानून बनाने में सहयोग कीजिए।

• गो आधारित प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहन करने, गोमहिमा प्रचार-प्रसार द्वारा सामाजिक जागृति एवं गोहितार्थ नीतियाँ बनाने हेतु सामुहिक एकता से शासन को प्रेरित करने का संकल्प लीजिए।

पुनः गोनवरात्र के पावन पर्व पर पूज्या गोमाता का मंगल आशीर्वाद स्वीकार कीजिए।

शनिवार, 12 अक्टूबर 2024

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करें सरकार

11 अक्टूबर चैन्नई

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करें सरकार

गोरक्षकों को ही वोट दे हिन्दू समाज
.

जिसदिन गोहत्या रुकेगी , उसदिन हमारा सारा कर्ज उतरना शुरु हो जाएगा


गो हत्यारी पार्टियों को वोट देकर गो हत्या का पाप न लें हिन्दू


ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘१००८’ 


जगद्गुरु शंकराचार्य जी राजधानी पहुंचे वहां पर पादुका पूजन हुआ। उसके बाद शंकराचार्य जी महाराज जी ने गौ ध्वज स्थापना किया। गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परमाराध्य परमधर्माधीष उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी महाराज ने कहां कि पूज्य शंकराचार्य जी महाराज गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए पिछले २२ सितम्बर २०२४ को अयोध्या धाम में पहुंचकर रामकोट की परिक्रमा कर इस यात्रा की शुरुआत की थी, ये ऐतिहासिक यात्रा पूर्वोत्तर के प्रायः सभी राज्यों में जाकर गोप्रतिष्ठा ध्वज की स्थापना कर चुकी । 
इस ऐतिहासिक यात्रा को विगत दिनों तब एक बडी सफलता मिली जब पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज के निर्देश पर महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री श्री एकनाथ सम्भाजी शिन्दे जी ने देसी (रामा) गाय को राज्यमाता घोषित करके केबिनेट की प्रस्ताव की कापी शंकराचार्य जी के चरणों में सौंपा । 

पूज्य शंकराचार्य जी महाराज इस ऐतिहासिक यात्रा के माध्यम से भारत भूमि की ऊपर से सम्पूर्णतया गौहत्या का कलंक मिटाकर गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए है।

भक्तों को सम्बोधित करते हुए पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि गो गंगा  कृपाकांक्षी गोपालमणि जी का ये आन्दोलन अत्यन्त पवित्र है  इसलिए इस आन्दोलन को बल देने के लिए हम इस अभियान में लगे हुए हैं । 

गाय को दूध समझने वाले और गाय को मांस समझने वाले दोनों ही गाय के महत्व से अनभिज्ञ है , भगवद्गीता में भगवान कहते हैं कि हमारे साथ भगवान ने यज्ञ को प्रकट किया और हम परस्पर एक दूसरे के लिए बनाए गए हैं  । 

एकबार प्रजीपति ब्रह्मा जी द्वारा - देवता , दैत्य और मानव निमंत्रित किए गए , तैयार होने के बाद सुन्दर व्यंजन परोस दिया गया लेकिन ब्रह्मलोक के सेवकों ने सबके हाथ में एक लम्बा डंडा रस्सी के साथ बांध दिया । दैत्यों ने भोजन का बहिष्कार कर वहां से निकल गए । देवता और मनुष्यों ने एक दूसरे का सहयोग करते हुए एक दूसरे को खिलाकर परम तृप्ति का अनुभव किया । दूसरे को खिलाने से संतुष्ट होते हैं हम भारतीय । हम अपने देवता, अतिथि और बच्चों के लिए भोजन बनाते हैं इसी को यज्ञ कहा जाता है । मंत्र और हवि के द्वारा यज्ञ होता है जिससे देवता प्रसन्न होते हैं । ब्राह्मण और गोमाता ही यज्ञ को सम्पन्न कराते हैं । बिना गाय के सारी पूजा उपासना व्यर्थ है , ३३ कोटि देवता की सेवा ही गौसेवा है । पहली रोटी हम अपने ३३कोटि देव स्वरूपा गोमाता को समर्पित करते हैं । 

महाराज दिलीप सर्वसामर्थ्यवान थे लेकिन पुत्र विहीन होने के कारण दुखी थे , गुरु वशिष्ठ के आदेश का परिपालन करते हुए ४० दिन तक अहर्निश गौसेवा की परिणाम अज नामका पुत्र हुआ उनके धर में , आगे चलकर इसी पवित्र वंश में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम नें अवतार धारण किया । 

भगवान को पाना है तो गोसेवा करो , भगवान ने कह रखा है - ‘गवां मध्ये वसाम्यहम्’ मैं सदा गायों के बीच में ही रहता हूं । 

‘मातीति माता’ जो सबको अपने अन्दर समा ले वही माता है । गौमाता में सबकुछ समाहित है । ललितासहस्रनाम में भगवती  को ‘गोमाता’ कहकर सम्बोधित किया गया है । गौमाता सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी है, हम सनातनी केवल दूध नहीं अपितु आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गौसेवा करते हैं