सोमवार, 18 अगस्त 2014

अच्छी गौ माता के लक्षण


अच्छी गौ माता के लक्षण 

गाय सुशील हो व सीधी हो,
उसका कोई अंग विकृत ना हो,
वह दुर्बल तथा उसे कोई रोग नहीं हो,
उसका बछड़ा,बछड़ी जिन्दा हो,
चमड़ी खुर और सींग चिकने हों,
देखने में सुन्दर व सौम्य हो,
आकार सामान्य हो,
स्वभाव शांत हो उसके पीछे का भाग चौड़ा हो,
होठ कोमल सटे हुए तथा लाल रंग के हों,
गर्दन लाल रंग की हो,
जीभ काली न हो किन्तु लम्बी चिकनी एवं लाली लिए हुए हो,
नेत्र स्वक्ष हों तथा खुर सटे हुए तथा मजबूत हों,
आंसू ना बहते हों तथा दांत सात या 14 हों
तालू श्याम रंग का हो,
दोनों रान मस्तक गर्दन तथा चार थन ये दस स्थान लम्बे हों.

उपरोक्त ब्योरे के अनुसार वाली गाय सुलक्षणा गाय कहलाती है

अच्छा बैल कैसा हो


अच्छा बैल कैसा हो

जिन बैलों के ओठ कोमल, सटे हुए और तांबे के समान लाल रंग के हों, जिनके पतले कान पतले, छोटे और ऊंचे होते हैं
जिनका पेट सुन्दर और पिंडलिया उभरी हुई होती हैं खुर कुछ लाल और मिले हुए, छाती चौड़ी तथा डील [चूहा] ऊँचा होता है
चमड़ी चिकनी रोएँ सुन्दर और छोटे होते हैं तथा सींग लाल और पतले होते हैं, जिनकी पूंछ पतली और लम्बी होती है,
आँखों के कोए लाल हैं तथा जो चलते समय जोर-जोर से साँस लेते हैं, जिनके कंधे के से और गलकम्बल पतली और छोटी होती है उस जाती के बैलों को सुगत कहते हैं, वे पूजनीय हैं

भगवान व्यासदेव की द्रष्टि में गोसेवा

भगवान व्यासदेव की द्रष्टि में गोसेवा

पुराणों में अनेक जगह गोमती विध्या और गो-सावित्री स्तोत्र का उल्लेख प्राप्त होता है, वे भगवान व्यास देव की रचनाएँ हैं
इनमें उन्होंने कहा है कि संसार की रक्षा के लिए वेद और यज्ञ ही दो श्रेष्ठ उपाय हैं और इन दोनों का संचालन गाय के दूध,घी और बैलों के द्वारा उत्पन्न किये वीरिहि से निर्मित चरु, पुरोडाश, हविष्य आदि से ही संपन्न होता है
मूलतः ब्राहम्मण, वेद और गौ- ये तीनों ही एक हैं
यज्ञ की संपन्नता के लिए ब्राहम्मण और गौ- ये दोनों ही अलग-अलग रूप में दीखते हैं 
उनके कथानुसार गायों से सात्विक वातावरण का निर्माण होता है,गायें अत्यंत पवित्र हैं इसलिए जहाँ रहती हैं वहां कोई भी दूषित तत्व नहीं रहता उनके शरीर से दिव्य तथा सुगंधयुक्त वायु प्रवाहित होती है और सब प्रकार का कल्याण ही कल्याण है 
गोएं स्वर्ग जाने की सीढ़ी हैं तथा गोएं समस्त प्राणियों को खिलाने -पिलाने-जिलाने वाली हैं 
खेती के कामों में गायों को बहुत आराम से प्रयुक्त करना चाहिए, उन्हें सदा ही सुख देना चाहिए, बीमार होने पर औषधि की व्यवस्था करनी चाहिए
ये बातें भविष्य पुराण के उत्तरपर्व,मधयपर्व एवं महाभारत के वैश्रणवधर्म-पर्व तथा बृहद व्यासस्मृति में भी कही गयी हैं 
बड़े खेद की बात है कि आज गोचर भूमि की व्यवस्था प्रायः नहीं रह गयी है इससे गायों को बड़ा कष्ट हो गया है तथा उनकी स्वक्षन्द्ता मिट सी गयी है
इसलिए भारत में निवास करने वाले सभी धर्मात्मा लोगों से प्रार्थना है कि गोचर भूमि की व्यवस्था पुनः प्रवर्तित करें 
गोओं की प्रसन्नता से सभी देवता, ऋषि भगवान भी प्रसन्न होंगे तभी राष्ट्र का कल्याण होगा 
यही भगवान व्यासदेव के समस्त वेद और पुराणों, धर्मशास्त्रों महाभारत आदि में प्रदिष्ट गो-सेवा धर्म के प्रतिपादन-पद्धति का संछिप्त शारांश है
जय गऊ माता की

~~अर्थ व्यवस्था की रीढ़~~

अर्थ व्यवस्था की रीढ़- 
  धर्म और संस्कृति का प्रतीक होने के साथ-साथ गाय भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था की भी रीढ़ है
देश में सदैव से ही गोधन को ही धन माना जाता है प्राचीन काल में तो किसी भी वस्तु का मूल्याङ्कन गो के द्वारा ही होता था 
हमारे यहाँ गोपालन पश्चिमी देशों की भांति केवल दूध और मांस के लिए नहीं होता
अमृततुल्य दूध के अतिरिक्त खेत जोतने एवं भार ढोने के लिए बैल तथा भूमि की उर्वरता बनाये रखने के लिए उत्तम खाद भी हमें गाय से ही प्राप्त होती है, जिसके अभाव में हमारे राष्ट्र की अर्थ व्यवस्था का शकट किसी प्रकार चल नहीं सकता
भारतीय कृषि की यह अनिवार्य अपेक्षा है की देश में पर्याप्त संख्या में उत्तम बैल उपलब्ध हों, इस समय देश में उनकी जो स्थिति है वह उत्कृष्टता और संख्या दोनों द्रष्टियों से असंतोषजनक है
भारत सरकार की मानव तथा पशु भोजन विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि- चूँकि बैलों की वर्तमान संख्या को कृषि के लिए बनाये रखना आवश्यक है और प्रजनन के द्वारा उनकी पूर्ति करना भी अनिवार्य है
अतः प्रजनन योग्य गोओं की संख्या कम करना हितकर नहीं हो सकता, भले ही उनमें से अधिकांश की दूध देने की क्षमता कितनी भी कम न हो!


श्री कृष्ण लीला के उपकरणों में गाय [1]

श्री कृष्ण लीला के उपकरणों में गाय [1]
ब्रजराज गोशाला में बछड़ों की देखभाल करने गए हैं और ब्रजरानी अपने प्राणधन ललन के लिए भोजन बनाने में मग्न हैं
राम-श्याम दोनों भाई आँगन में खेल रहे हैं
अबतक दोनों भाई मइया एवं बाबा की गोद में चढ़कर ही द्वारदेश एवं गोशाला आदि में जाते थे, आज स्वतंत्र रूप से दोनों भाई तोरण द्वार की ओर चल पड़े 
कभी खड़े होकर कुछ डग चलते, कभी घुटने के बल, इस तरह बाहर चले आये, आम्र की शीतल छाया में कुछ गोवत्स विश्राम कर रहे थे, धीरे-धीरे उनके पास जा पहुंचे, बछड़े की सुकोमल पूंछ को देखकर आश्चर्यचकित होकर विचारने लगे, यह क्या है 
फिर दोनों भाईयों ने अपने नेत्र कमलों को नचाकर मानो कुछ परामर्श-सा किया और धीरे से एक ही साथ पूंछ को दोनों हाथों से मुठ्ठी बांधकर पकड़ लिया 
अचानक पूंछ खिच जाने से उठ खड़ा हुआ तथा भागने लगा
अचिन्त्यलीलामहाशक्ति ने इसी क्षण श्यामसुन्दर की स्वभाविक अनंत असीम सर्वज्ञता पर बाललीलोचित मुग्धता की यवनिका गिरा दी, दोनों भाई बछड़े से खिंच जाते हुए भयभीत हो उठे
वे भगवान श्री कृष्ण यह ज्ञान भूल गए कि पूंछ छोड़ देने से ही बछड़े का सम्बन्ध छूट जायेगा, बल्कि उन्होंने तो अपनी रक्षा के लिए और भी अधिक शक्ति लगाकर पूंछ को जकड़ लिया तथा माँ-माँ, बाबा-बाबा पुकारने लगे और रोने लगे
उसी क्षण समस्त ब्रजवनीताओं की हृदय-बोल पर माँ-माँ बाबा-बाबा की करुणामिश्रित स्वरलहरी झंकृत हो उठी, क्योंकि उनके हरनतन्तु सर्वथा श्याममय होकर निरंतर श्याम सुन्दर से ही जुड़े रहते थे
अतः जो जहाँ जिस अवस्था में थीं, चल पड़ीं, इतनी शीघ्र कैसे आ पहुंची यह किसी ने नहीं जाना पर सभी आ पहुंचीं
सबने देखा, भयभीत गोवत्स धीरे-धीरे भाग रहा है तथा उसकी पूंछ पकड़े नीलमणि एवं दाऊ माँ-माँ, बाबा-बाबा की पुकार करते हुए खिंचे चले जा रहे हैं 
अचिन्त्यलीला-शक्ति के महान प्रभाव से कुछ क्षण सभी किंकतर्व्यविमूढ़- सी हो गयीं, इसी समय उपनन्द-पत्नी ने शीघ्रता से बछड़े के आगे जाकर उसे थाम लिया इतने में नंदरानी एवं नंदराय भी आ पहुंचे, बेटा नीलमणि\ दाऊ पूंछ छोड़ दे 
कहते हुए दोनों ने हाथ से पकड़कर पूंछ छुड़ा दी, नंदरानी ने नीलमणि एवं दाऊ को अपनी गोद में ले लिया, दोनों का मुख चूमने लगीं
इधर व्रजसुंदरियों में हंसी का स्त्रोत उमड़ पड़ा, बाललीलाबिहारी इस अद्धुत अभूतपूर्व ललित लीला को देखकर सभी हँसते-हँसते लोट-पोट हो गईं 
एक ग्वालिन बोली कि नीलमणि, अरे दाऊ, तुम दोनों भला इस बछड़े से भी दुर्बल हो, अरे पूंछ पकड़कर बछड़े को रोक लेते या पूंछ पकड़े-पकड़े सारे व्रज में घूम आते, यह बछड़ा तुम्हें व्रज में घुमा लाता, हम लोग अपने-अपने घर ही पर तुम्हें देखकर निहाल होतीं,बछड़े भी निहाल होते
यों कहते-कहते ग्वालिन की आँखों में प्रेम के आंसू छल-छल करने लगे, श्यामसुन्दर हंसने लगे मानों संकेत से कह रहे हों-एवमस्तु\
इसके पश्चात् व्रजराजनन्द ने बछड़ों को अपने करस्पर्श का योगीन्द्र-मुनीन्द्र-दुर्लभ आनन्द देते हुए इस परम सुन्दर लीला का अनेकों बार प्रकाश किया\

कुछ ऐसी ही लीलाएं भगवान श्री कृष्ण ने गायों पर दिखाई हैं जो आज भी इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में लिखी हुई हैं\

श्री कृष्ण लीला के उपकरणों में गाय

श्री कृष्ण लीला के उपकरणों में गाय 

राम-श्याम प्रणय-कलह में बड़े ही चतुर हैं,बड़े ही चतुर हैं, उस झंकार की ओट में एक लालसा छिपी है- कभी श्यामसुन्दर मुझे खिझाते, मैं रोष करती, ये झगड़ते ; ऐसे प्रलय-कलह का सौभाग्य मुझे भी मिलता नीलमणि ग्वालिन का यही मनोरथ तो पूर्ण करने आये थे, वे चुपचाप गोद से उठ खड़े हुए
ग्वालिन प्रस्तर-मूर्ति की तरह निश्चल बैठी थी, श्यामसुन्दर अपने सुकोमलतम करपललवों से धीरे-धीरे ताली बजाने लगे
ताली बजी कि गोपमण्डली के सहित दाऊ भीतर आ गए, नीलमणिने माखन ग्रह की और संकेत कर दिया
वे सब चुपचाप बिना किसी शब्द के भीतर जा पहुंचे
इधर स्वयं नीलमणि गाय की गर्दन को सहलाने लगे, गाय ने गर्दन फैला दी
गोशाला की तरफ चल पड़े , गोशाला में बहुत-से बछड़े बंधे थे, गाय रम्भा रही थीं, आज अभी तक दूही नही गयी थीं - दुहता कौन=
ग्वालिन तो आधी रात से भावविष्ट थीं तबसे दधि-भांड में मथानी डालकर बिलो रही थी, दो-चार बार मथानी घुमाती, फिर ठहरकर गीत गाती, फिर कुछ देर मथती, फिर गाने लगती उसे यह ज्ञान ही नहीं था की कब प्रभात हुआ!


गुरुवार, 14 अगस्त 2014

Happy independence Day

Happy independence Day

Dear Friends,
'Don't Underestimate The Power Of A Common Man' 
Please take this pledge.How can one who has ever drunk cows milk justify the killing and eating of such a mother as the sacred cow? 
The Cow is the most important of animals because she is the mother of all the demigods and human beings. Almost everyone in the world daily drinks some cows milk and eats butter, ghee (clarified butter), or cheese made from that milk throughout their lives. Therefore from a moral point of view because we all drink cow's milk, the cow is our mother.Protect the Cow to protect yourself.
Cows are the foremost of all living things. It is the duty of each human being to consider cows to be divine and protect them to their best capability.Together we shall spread this message and motive people to SAVE THE HOLY COW and make a difference.We shall be the voice of this innocent COW. 
Let’s Take Decision 
To Value Our Nation 
Won’t Forget Those Sacrifices, 
Who Gave Us Freedom 
Now Its Our Turn 
To Have A Reformation. 
Happy Independence Day!! 
SAVE THE HOLY COW-Let us make this our National Motto this Independence Day
Thanks and Regards
your friend
Govats Radhe Shyam Ravoria
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