शनिवार, 27 अगस्त 2016

आओ मिल कर गो माता के प्राण बचायें !!

पालन – पोषण करने वाली सुख की दाता !
स्वर्गलोक भी जिनकी महिमा के गुण गाता !
जिनकी सेवा कर के नर भव से तर जाता !
सब देवों का अंश समेटे हैं गो माता !!

तृण खाकर बदले में दूध हमे देती हैं !
करती हैं उपकार, न कुछ हमसे लेती हैं !
गोबर से उर्वरा धरित्री को करती हैं !
चमड़ी भी अपनी हमको अर्पित करती हैं !

रोम-रोम जिनका करता है उपकृत हमको !
दूध-दही-घृत से पूरित करती जीवन को !
बछड़े देतीं, बोझ उठाते जो हम सब का !
कृषि कर्मों में साथ निभाते जो कृषकों का !

ममता का सागर आँखों में लहराता है !
पापी नर भी सहज प्रेम इनसे पाता है !
भूले से भी वार नहीं करतीं हैं हम पर !
शायद ही कोई निरीह इतना धरती पर !

पर कितने कृतघ्न हम हैं, कितने आवारा !
कुछ लुच्चे खा जाते हैं इनका भी चारा !
हत्या कर परोस देते हैं तन थाली में !
रक्त बहा देते हैं माता का नाली में !

चलो करें संकल्प बंद हो इनकी ह्त्या !
वरना पाप डंसेगा हमको बनकर कृत्या !
ऋण से इनके शायद मुक्ति हमें मिल जाये !
आओ मिल कर गो माता के प्राण बचायें !!

अमृत जैसा दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया (कविता)

गौ हत्या पर मुझे एक कविता मिली वह कविता मैं
आप सब के साथ शेयर करना चाहता हूँ...
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अमृत जैसा दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया,
अपने बच्चे से भी छीना पर मैंने तुमको दूध दिया!!
रूखी सूखी खाती थी मैं, कभी न
किसी को सताती थी मैं,,
कोने में पड़ जाती थी मैं, दूध नहीं दे सकती अब तो गोबर
काम
तो आती थी मैं....!!
मेरे उपलों की आग से तूने, भोजन अपना पकाया था,,
गोबर गैस से रोशन कर के तेरा घर उजलाया था !!
क्यों मुझको बेच रहा रे, उस कसाई के हाथों में...??
पड़ी रहूंगी इक कोने में, मत कर लालच माँ हूँ मैं!!
मर कर भी है कीमत मेरी, खाल भी तेरे काम आए,,
मेरी हड्डी की कुछ कीमत, शायद तू ही घर लाए!!
मैं हूँ तेरे कृष्ण की प्यारी वह कहता था जग से न्यारी,,
उसकी बंसी की धुन पर मैं, भूली थी यह दुनिया सारी!!
मत कर बेटा तू यह पाप, अपनी माँ को न बेच आप,,
रूखी सूखी खा लूँगी मैं किसी को नहीं सताऊँगी मैं!!
तेरे काम ही आई थी मैं तेरे काम ही आउंगी मैं....!!!
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अगर आप गौ से प्यार करते हैं तो गौ माता की यह
पीड़ा जन जन तक पहुँचाने के लिये कृपया कुछ पल
का समय निकाल कर इसे शेयर करें।

गौ माता (कविता "Poem")

इस हिन्दोस्तां के माटी की महिमा अपरम्पार है
गौ गंगा गीता से निर्मित इसका श्यामल सार है
परम पूज्य व पाप हारिणी गौ गंगा और गीता हैं
तरण तारिणी मोक्ष दायिनी तीनो परम पुनीता हैं
रोम रोम में देव रमे हों ऐसी पवित्र गौ माता है
चार धाम का पुण्य भी गौ सेवा से मिल जाता है
जो जन इसकी सेवा करते भव सागर तर जाते हैं
वेद पुराण उपनिषद भी इसकी महिमा बतलाते हैं
सकल पदारथ दूध दही घी औषधि गुणकारक हैं
स्वस्थ प्रदायक मंगलकारक समूल रोग निवारक हैं
भगवान कृष्ण ग्वालों संग खुद भी गायें चराते थे
बछड़ों के संग क्रीड़ा करते दूध दही घी खाते थे
प्रेम पास में बंधी गायें कान्हा को देख रंभातीं थीं
मोहक बंसी ध्वनि सुनकर आप लौट आ जाती थीं
गौ सेवा का पुण्य प्रताप ऋषि मुनियों भी गाया है
गौ माता के आगे खुद भगवन ने शीश नवाया है
इसी मात के जीवन में अब गहरा संकट आया है
त्राहि त्राहि कर मात पुकारे कैसा कलियुग आया है
यह अपने ही पुत्रों के आगे दर दर आज भटकती है
पेट पालने को गौ माता त्रण को आज तरसती है
कुछ अधम नीच निशाचर हैं हमको आज लटा रहे
हैं सठ कामी पापी पिशाच गैया को आज कटा रहे
घनघोर पिशाच प्रवृत्ति अब यहाँ दिखाई जाती हैं
झुण्ड झुण्ड में गायें आज आरों से कटाई जाती हैं
गर ऐसी पिशाच प्रव्रत्ति पर अंकुश न लगाया जायेगा
दूर नही किंचित वह दिन जब यहाँ विनाश आ जायेगा
अपने ही पुत्रों के आगे गर कोई माता ऐसे तड़पेगी
तुम्ही बताओ अंतर्मन से सन्तान कैसे सुखी रहेगी
अब गौ माता की रक्षा का प्रण हम सबको करना होगा
धर्म धर्म और धर्म की खातिर हम सबको लड़ना होगा
इस गोवंश की रक्षा खातिर कुछ ऐसा आज प्रबंध हो
होय वधिक को फांसी जब फिर फौरन गोवध बंद हो
कवि - 'चेतन' नितिनराज खरे

गीत / हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला ...

हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला,
ऐसा गर हो जाये तो फिर भारत किस्मतवाला.

गाय हमारी माता है यह, नहीं भोग का साधन.
इसकी सेवा कर लें समझो, हुआ प्रभु-आराधन.
दूध पियें हम इसका अमृत, गाय ने हमको पाला.
हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला...

गाय दूर करती निर्धनता, उन्नत हमें बनाए,
जो गायों के साथ रहे वो, भवसागर तर जाए.
गाय खोल सकती है सबके, बंद भाग्य का ताला.
हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला...

'पंचगव्य' है अमृत यह तो, सचमुच जीवन-दाता.
स्वस्थ रहे मानव इस हेतु, आई है गऊ माता.
गाय सभी को नेह लुटाये, क्या गोरा क्या काला.
हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला....

गाय बचाओ, नदी और तालाब बचाओ ऐसे,
'गोचर' का विस्तार करें हम अपने घर के जैसे.
बच्चा-बच्चा बने देश में, गोकुल का गोपाला.
हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला...

गौ पालन-गौसेवा से हो, मानवता की सेवा,
गौ माता से मिल जाता है, बिन बोले हर मेवा.
कामधेनु ले कर आती है जीवन में उजियाला..
हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला...

शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

क्या आप जानते हैं जिस गौमाता की आप पूजा करते हैं, उसे किस प्रकार निर्दयतापूर्वक मारा जाता है ?

क्या आप जानते हैं जिस गौमाता की आप पूजा करते हैं, उसे किस प्रकार निर्दयतापूर्वक मारा जाता है ?
कत्लखाने में स्वस्थ गौओं को मौत के कुँए में 4 दिन तक भूखा रखा जाता है| अशक्त होकर गिरने पर घसीटते हुए मशीन के पास ले जाकर उन्हें पीट-पीटकर खड़ा किया जाता है| मशीन की एक पुली (मशीन का पकड़नेवाला एक हिस्सा) गाय के पिछले पैरों को जकड़ लेती है | तत्पश्चात खौलता हुआ पानी 5 मिनट तक उस पर गिराया जाता है| पुली पिछले पैरों को ऊपर उठा देती है| जिससे गायें उलटी लटक जाती हैं| फिर इन गायों की आधी गर्दन काट दी जाती है ताकि खून बाहर आ जाये लेकिन गाय मरे नहीं | तत्काल गाय के पेट में एक छेद करके हवा भरी जाती है, जिससे गाय का शरीर फूल जाता है | उसी समय चमड़ा उतारने का कार्य होता है | गर्भवाले पशु का पेट फाड़कर जिन्दा बच्चे को बाहर निकला जाता है | उसके नर्म चमड़े को (काफ-लेदर) को बहुत महंगे दामों में बेचा जाता है|

गौरक्षा - गाय की सुरक्षा : सर्वस्व की रक्षा


“गावो विश्वस्य मातर |”

                   गौमाता जो आजीवन हमें अपने दूध- दही- घी आदि से पोषित करती है| अपने इन सुंदर उपहारों से जीवनभर हमारा हित करती है| ऐसी गौमाता की महानता से अनभिज्ञ होकर मात्र उसके पालन-पोषण का खर्च वहन ना कर पाने के बहाने उन्हें कत्लखानों के हवाले करना विकास का कौन सा मापदंड है ? क्या गौमाता के प्रति हमारा कोई कर्त्तव्य नहीं है ?
   
 पंडित मदन मोहन मालवीयजी ने कहा है: ’यदि हम गौओं की रक्षा करेंगे तो गौएँ भी हमारी रक्षा करेंगी |’
सदियों से अहिंसा का पुजारी भारतवर्ष आज हिंसक और मांस निर्यातक देश के रूप में उभरता जा रहा है| यह बड़ी विडम्बना है कि एशिया का सबसे बड़ा कत्लखाना अन्य इस्लामिक देशों में नहीं बल्कि भारत के महाराष्ट्र प्रान्त में है, जहाँ हजारों गायें रोज कटती है| दूसरी अल कबीर गोवधशाला आंध्रप्रदेश में है | यहाँ रोज 6 हजार गौएँ , इससे दुगुनी भैसें तथा पड़वे  काटे जाते है| इसका लगभग 20,000 टन मांस विदेशों में निर्यात होता है |

गौ पूजन से पुण्य फल की प्राप्ति

गौ पूजन से पुण्य फल की प्राप्ति

भाग्य बदलती है गौमाता

 गाय का पूजन करके उनकेकरने से मनुष्य को पुण्य फल की प्राप्ति होती‍ है। जिस घर में गौ-पालन किया जाता है उस घर के लोग संस्कारी और सुखी होते हैं। इसके अलावा जीवन-मरण से भी गौमाता ही दिलाती है। मरने से पहले गाय की पूँछ छूते हैं ताकि जीवन में किए गए पाप से मुक्ति मिले।

लोग पूजा-पाठ करके धन पाने की इच्छा रखते हैं लेकिन भाग्य बदलने वाली तो गौ-माता है। उसके दूध से जीवन मिलता है। रोज पंचगव्य का सेवन करने वाले पर तो जहर का भी असर नहीं होता और वह सभी व्याधियों से मुक्त रहता है। गाय के दूध में वे सारे तत्व मौजूद हैं जो जीवन के लिए जरूरी हैं। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि गाय के दूध में सारे पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं। मीरा जहर पीकर जीवित बच गई क्योंकि वे पंचगव्य का सेवन करती थीं। लेकिन कृष्ण को पाने के लिए आज लोगों में मीरा जैसी भावना नहीं बची।

गौ माता की महिमा अपरंपार है। मनुष्य अगर जीवन में गौ माता को स्थान देने का संकल्प कर ले तो वह संकट से बच सकता है। मनुष्य को चाहिए कि वह गाय को मंदिरों और घरों में स्थान दे, क्योंकि गौमाता मोक्ष दिलाती है। पुराणों में भी इसका उल्लेख मिलता है कि गाय की पूँछ छूने मात्र से मुक्ति का मार्ग खुल जाता है। 

गाय की महिमा को शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता। मनुष्य अगर गौमाता को महत्व देना सीख ले तो गौ माता उनके दुख दूर कर देती है। गाय हमारे जीवन से जु़ड़ी है। उसके दूध से लेकर मूत्र तक का उपयोग किया जा रहा है। गौमूत्र से बनने वाली दवाएँ बीमारियों को दूर करने के लिए रामबाण मानी जाती है।

रोज सुबह गौ दर्शन हो जाए तो समझ लें कि दिन सुधर गया, क्योंकि गौ-दर्शन के बाद और किसी के दर्शन की आवश्यकता नहीं रह जाती। लोग अपने लिए आलीशान इमारतें बना रहे हैं यदि इतना धन कमाने वाले अपनी कमाई का एक हिस्सा भी गौ सेवा और उसकी रक्षा के लिए खर्च करें तो गौमाता उनकी रक्षा करेगी। इसलिए गौ दर्शन सबसे सर्वोत्तम माना जाता है। 

गाय और ब्राह्मण कभी साथ नहीं छोड़ते हैं लेकिन आज के लोगों ने दोनों का ही साथ छोड़ दिया है। जब पांडव वन जा रहे थे तो उन्होंने भी गाय और ब्राह्मण का साथ माँगा था। समय के बदलते दौर में राम, कृष्ण और परशुराम आते रहे और उन्होंने भी गायों और संतों के उद्धार का काम किया। इसकी बड़ी महिमा सूरदास और तुलसीदास ने गौ कथा का वर्णन किया है। 

लोग दृश्य देवी की पूजा नहीं करते और अदृश्य देवता की तलाश में भटकते रहते हैं। उनको नहीं मालूम की भविष्य में बड़ी समस्याओं का हल भी गाय से मिलने वाले उत्पादों से मिल सकता है। आने वाले दिनों में संकट के समय गौमाता ही लोगों की रक्षा करेंगी। इस सच्चाई से लोग अनजान हैं।

गौ माता का जीवन पूरी पृथ्वी के जीवन से जुडा है…/ गौ माता की रक्षा देश की सुरक्षा

गौ माता का जीवन पूरी पृथ्वी के जीवन से जुडा है…

क्या आपको पता है…
रूस के वैज्ञानिकों की रिसर्च से ये साबित हुआ है की यदि देसी गौ के गोबर से बने कंडे पर चावल और एक चम्मच देसी गाय के घी की आहूती दी जाती है तो एक टन ओजोन वायू बनती है…
1 किलो ओजोन वायू = 1 टन आक्सीजन होती है…
ऐसी एक टन ओजोन वायू हमारे भूमंडल की औजोन परत को मजबूत करती है…
आज जहाँ कैमिकल के बम बनाकर ओजोन परत को तोडा जा रहा है ये वही ओजोन परत है जिसके कारण सूरज की किरणें हम पर सीधे नहीं पडती इससे छनने के कारण वो किरणें हमारे लिए शितल हो जाती हैं कितने दूर दर्शी थे हमारे भारत के ऋषि मुनी जो पहले से ही हवन में गो माता के कंडे उपयोग किये जाते थे और उनका घी और चावल का उपयोग हवन में किया जाता था…
गौ माता के ताजे गोबर का एक दो चम्मच रस यदि गर्भवती महिला को प्रसूती के समय पिला दिया जाये तो बिना ओपरेशन के बिना दर्द के आराम से डिलिवरी हो जाती है…
गौ माता के गौमुत्र से खासी सर्दी, जुखाम और कफ संबंधी 80 प्रकार कि बिमारियाँ दूर हो जाती हैं यदि रोज गोमुत्र थोडा थोडा पिया जाये तो बहुत लाभ होता है…
देसी गौ माता के दूध में ही स्वर्ण शार पाये जाते हैं इसलिए गौ माता का दूध हल्का पीला भी होता है… क्योंकी गौ ही एक ऐसा प्राणी है जिसमें सूर्य केतू नाडी होती है जो सूर्य की किरणों में से पौशक तत्वों को लेकर उसे दूध में परिवर्तित कर देती है…. गौ माता का दूध पृथ्वी पर का अमृत बताया गया है वेदों में…
परंतु आज
गौमाता को कितनी बेरहमी से मारा जाता है…
गरम सलाखों से उनके सींगों को उखाडा जाता है…
100 डिग्री गरम पानी यदि हाथ पर पड जाये तो जल जाता है । गौ माता पर 200 डिग्री गरम पानी डाला जाता है…. उनकी चमडी छाले छाले हो जाती है…
फिर उन्हें उल्टा लटकाकर गर्दन पर हल्का सा चीरा मारा जाता है… जिससे उनका काफी खून निकलता है…
फिर जिवित गौ माता की चमडी खींचकर उखाड दी जाती है….
एक मूँक प्राणी को इतना सताकर मारा जाता है उनकी खाल से चमडे के सामान जूते बैल्ट आदि बनाये जाते हैं…
वैज्ञानिकों का मानना है जब गौ माता को मारा जाता है तो उन के मुख से एक प्रकार की चित्कार निकलती है वो चिख से भू गर्भ में कंपन अर्थात भूकंप, समुद्रि तूफान… बाड आदि प्राकृतिक आपदाएँ अपने आप आ जाती हैं…
भगवान ने गौ माता का दूध घी मक्खन भी तो बनाये हैं भगवान ने स्वास्थय केलिए फल दूध, काजू, बादाम भी तो बनाये हैं.. फिर नर रूप में राक्षस बने मनुष्य गौ माँस ही क्यों खाते हैं…
पर अब गौ माता को खाने वाले लोगों के लिए एक खुशखबरी है भारत के एक साँईंस स्टूडेन्ट ने ऐसा इंजेक्शन खोज लिया है जिससे गौ माता को तो कोई हानी नहीं होगी पर उस इंजेक्शन के लगाने के बाद जब गौ माता मरेगी उसका माँस यदि कोई खायेगा तो वो 4 घंटे से ज्यादा जिंदा नहीं रह पायेगा… और इसका इस्तेमाल भी शुरु कर दिया है…