मंगलवार, 5 मई 2020
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020
अगर गौ को 1% भी अपनी माता मानते हो तो पोस्ट पढ़े
अगर गौ को 1% भी अपनी माता मानते हो तो पोस्ट पढ़ कर शेयर जरुर करना भाइयो बहनों
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प्यारे भारत वासियों।
भारत एक ऎसा देश है जहाँ मेरे उत्थान और विकास की बातें आदि काल से होती आई है। ऋषि मुनियों की पंरम्पराऒ को आत्मसात करने वाले इस देश में मुझे माता और पूज्य की संज्ञा दी जाती है। गौमाता, कामधेनु, सुरभि इत्यादि मेरे ही नाम हैं । सभी जानते हैं कि देव दानवों द्वारा किये गये सागर मंथन से मेरा जन्म हुआ, देवताओं द्वारा मैं पूजित हुई और ऋषि मुनियों द्वारा पालित और पोषित हुई।
सृष्टि के निर्माता भगवान विष्णु ने कृष्ण अवतार लेकर मेरी सेवा की, इस कारण वो गोपाल और गोविंद कहलाये । असंख्य लोगो ने मेरी रक्षार्थ बलिदान दिये। ग्रन्थ और पुराणों की मै विषय वस्तु बनी। मै मनुष्य के जन्म से लेकर आज तक निरन्तर प्राणीमात्र की सेवा ही करती हूँ। आप लोगो की इतनी सेवा के वाबजूद मुझे आज मनुष्य ने दिया ही क्या है।
मुझे खाने के लिये घास चारा नहीं मिलता। भूख और प्यास से ग्रस्त जीवन काट रही हूँ। जब मेरी क्षुधा शान्त नहीं होती तब मै दर दर भटकती हूँ कभी इस दर तो कभी उस दर, कभी मै सब्जी मंण्डी में डंडे खाती हूँ। मुझे जब प्यास लगती है तो मैं मानव मूत्रालय में जाकर गन्दा पानी पीती हूँ। पॊलीथीन की थैलियाँ भी खाती रहती हूँ । आप सब पॊलीथीन सडक पर फैक देते हो और मैं मजबूरी में उन्हे खाती हूँ।
हे मनुष्यों मै तुम्हे धन देती हूँ, मेरा बछड़ा तुम्हे अन्न देता है। हे संवेदनशील इन्सानों, दुनिया में ऐसी कौन सी माँ है जिसके दौनों पैर बाँध दिये जाते है। उसके सामने उसके बच्चे को रस्सी से बाँध दिया जाता है फिर मेरा दूध निकाला जाता है। कई लोग तो मेरी काया में निर्दयतापूर्वक इंजेक्शन चुभो कर मेरा दूध निकाल लेते हैं।
कई बार तो मेरे बछडे को भी दूध नहीं मिल पाता लेकिन मै तुम्हारा पेट भरती हूँ। जब मेरा दूध बन्द हो जाता है और मेरा बछडा बैल बन कर बूडा हो जाता है तब तुम लोग हमें कसाईयों को बेच देते हो। मै कत्लखानों में कसाइयों के सम्मुख ठेल दी जाती हूँ। चार दिनों तक मुझे भूखा रखा जाता है ताकि मेरा हीमोग्लोबिन गलकर माँस से चिपक जाये। फिर मुझे घसीट कर लाया जाता है क्योंकि मै मूर्छित रहती हूँ। मुझ पर 200 डिग्री सेल्सियस वाष्प में उबलता हुआ पानी डाला जाता है। मै तड़प उठती हूँ। हे मेरा दूध पीने वालों, मै तुम्हे याद करती हूँ। मुझे कठोरता से पीटा जाता है ताकि मेरा चमडा आसानी से उतर जाये। मेरी दौनो टाँगे बाँध कर मुझे उल्टा लटका दिया जाता है। फिर मेरे बदन से सारा चमडा निकाल लिया जाता है। सुनो जीवधारियों, अभी भी मैने प्राण नहीं त्यागे हैं। मै कातर निगाहों से देखती हूँ, शायद इन कसाइयों के मन में मनुष्यता का जन्म हो। किन्तु इस समय मुझसे पोषित होने वाला कोई भी मानव मुझे बचाने नहीं आता। मेरे चमड़े की चाहत रखने वाले दुष्ट कसाई मेरी जीवित अवस्था में ही मेरा चमड़ा उतार लेते है और तड़प कर मै प्राण त्याग देती हूँ।
सुनो धर्मप्राण मनुष्यो, राम, कृष्ण,नानक महावीर की जय जय कार करने वालों के देश में मेरी करुण पुकार सुनने वाला कोई नहीं है। मुझे तो बस एक बात का समाधान चाहिये तुमने मेरा दूध पिया है मेरा बछड़ा कन्धे पर हल खींचता है, गाडी खींचता है, कोड़े खाता है। हमें कीलें चुभोई जाती हैं, फिर भी हम तुम्हारे घर दूध,अन्न, फल और सब्ज़ियाँ पहुँचाते हैं। मै और मेरा बेटा तुम्हें चमड़ा माँस हड्डियाँ दूध सब कुछ तुम्हे देते है। आज जो शहर बसे हुऐ हो, वो सब मेरे ही नाम की गोचर और गौ चारण भूमि पर बसे हुये हैं। सच कहूँ तो मेरी इस भूमि पर भूमाफिया और गन्दे राजनेता ओं ने कब्जा किया हुआ है। शास्त्र कहते हैं गोचर भूमि पर कब्जा करने वाले पातक होते हैं, इस पाप से मुक्ति का शास्त्रों में कोई विधान है ही नहीं। मेरी भूमि पर कब्जा कर लिया है तभी तो मै शहरों में आयी हूँ और वहाँ से भी मुझे बेदखल किया जा रहा है। इस पावन और पवित्र भारत भूमि पर ऐसा कोई नहीं है क्या जो धर्म और कानून का पालन कर मेरे प्राण बचाये। तुम्हारे द्वारा किये गये क्रूरतम हत्याचारों को सहकर भी मै तुम्हे श्राप नहीं दे सकती क्योंकि मै माँ हूँ ना। मैने अपना कर्तव्य निभाया व और परमेश्वर तुम्हे शक्ति दे कि तुम भी अपना कर्तव्य निभाओ ।
गाय माता की करुण पुकार:-
“ए हिंद देश के लोगों, सुन लो मेरी दर्द कहानी।
क्यों दया धर्म विसराया, क्यों दुनिया हुई वीरानी !!
जब सबको दूध पिलाया, मैं गौ माता कहलाई,
क्या है अपराध हमारा, जो काटे आज कसाई।
बस भीख प्राण की दे दो, मै द्वार तिहारे आई
मैं सबसे निर्बल प्राणी, मत करो आज मनमानी॥
जब जाउँ कसाईखाने, चाबुक से पीटी जाती,
उस उबले जल को तनपर, मैं सहन नहीं कर पाती।
जब यंत्र मौत का आता, मेरी रुह तककम्प जाती,
मेरा कोई साथ न देता, यहाँ सब की प्रीत पहचानी॥
उस समदृष्टि सृष्टि नें, क्यों हमें मूक बनाया
न हाथ दिए लड़नें को, हिन्दु भी हुआ पराया।
कोई मोहन बन जाओ रे, जिसने मोहे कंठ लगाया,
मैं फर्ज़ निभाउँ माँ का, दूँ जग को ममता निशानी॥
मैं माँ बन दूध पिलाती, तुम माँ का माँस बिकाते,
क्यों जननी के चमड़े से, तुम पैसा आज कमाते।
मेरे बछड़े अन्न उपजाते, पर तुम सब दया न लाते,
गौ हत्या बंद करो रे, रहने दो वंश निशानी ।
हे हिंदू वीरो, आपकी गौ माँ आपकी तरफ अश्रुपूर्ण नयनों से निहार रही है।
आपकी माँ
सुरभि
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बार बार हाथ जोड़कर निवेदन है शेयर करे पोस्ट ताकि लोग जान सके की हमारी माँ की क्या दशा है इस देश में और सरकारों को इस तरफ देखने की भी फुर्सत नही है
मंगलवार, 14 अप्रैल 2020
हम आज गाय की सेवा-रक्षा की बात करके अपने आप को बहुत बड़े गो भक्त गो रक्षक बनतें हैं ,,,,
हम आज गाय की सेवा-रक्षा की बात करके अपने आप को बहुत बड़े गो भक्त गो रक्षक बनतें हैं ,,,,
"एक कर्तव्य कर्म को जो हर मानव को करना अत्यंत आवश्यक है" कर्म को कर बहुत बड़ा एहसान कर रहे हों झूठे अहंकार को प्रदर्शित करते हैं,,,,
और कहीं ना कहीं इसी अहंकार के चलते पूज्या गौमाता की यह हालत है नित्य करोड़ों तथाकथित पुत्रों (कुपुत्रों) के होते हुए लाखों की संख्या में नित्य गोवंश का वध हो जाता है,,
जो लोग वाकई में गोसेवा में लगे हुए हैं रक्षा में लगे हुए हैं उनके द्वारा प्रदर्शन एक स्वाभिमान का विषय हो सकता है,,
उनके माध्यम से गोशालाओं में पहुंचे गोवंश की आज जो स्थिति है उसका वर्णन कर पाना मुश्किल है आर्थिक संकट के चलते गोशालाओं की हालत खराब है गोवंश को भरपेट चारे की समस्या आ गई है बहुत सी जगह तो आधा चारा भी नहीं मिल पा रहा,,,,,
लेकिन हमारी पू्ज्या गौ माता स्वयं कष्ट सहकर भी युग-युगांतर से हमारी रक्षा करती आ रही हैं हमारी रक्षा कर रही हैं करेगीं,,,,,,
अब भी संभल जाओ विश्व वासियों पूज्या गोमाता की शरण ग्रहण करो करनी ही पड़ेगी,,
नहीं तो देख रहे हो कंधा देने वाला भी नसीब नहीं हो रहा,,
अभी संभल जाओ, गोबर गोमूत्र आधारित कृषि कर अन्न उपजाओ ,
नित्य सेवन में पंचगव्य ! गोमूत्र ,गोमय ,गोदुग्ध ,गोदही ,गोघृत अपनाओ ,
वेद पुराण "अब विज्ञान" कह रहे निरोगी काया पाओ,,
सब मिल गो शरण में आओ ,,,,
शनिवार, 21 मार्च 2020
आओ बचे इस कोरोना महामारी से
।।श्री सुरभ्यै नमो नमः।।
*आओ बचे इस कोरोना महामारी से*
गोमाता के लाङलो जागो उठो आगे बढ़ो यह वेदलक्षणा गौमहिमा को पुनर्स्थापित करने का अवसर है विश्व व्यापी महामारी से पिङित व भयभीत मानव जाति को पूज्या गोमाता के वात्सल्य से प्राप्त पंचगवयामृत का विधिवत विनियोग करने पर सम्पुर्ण राहत मिल सकती है अतः इस महारोग से धरती की मानव जाति को बचाने के लिए पंचगवय प्रक्षालन ,पंचगवय पान व पंचगवय स्नान का व्यापक रूप से प्रयोग व प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है ।
आईये हम स्वयं आज से नियमित पंचगवय प्रक्षालन पंचगवय पान व पंचगवय स्नान का संकल्प लेकर महामारी से
मानव जाति को बचाने के महायज्ञ में तन मन धन से आहुति प्रदान करें वेदलक्षणा गोमाता से प्राप्त पंचगवय का विधिवत निर्माण कराके अपने निकटस्थ आश्रमो मन्दिरो मठों एवं सभी धार्मिक स्थलों पर वितरण करने का प्रबंध करे ।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मतानुसार यह विनाशकारी रोगाणु स्पर्श व श्वास द्वारा एक से दूसरे मानव में पहुंचता है ओर इसका निदान केवल विधिवत बचाव से किया जा सकता है भारतीय धर्म शास्त्रों में सभी प्रकार के स्पर्श जन्य दोषों का निवारण पंचगवय प्रक्षालन ही बताया है तथा आयुर्वेद शास्त्रो में सभी प्रकार के खाद्य अखाद्य जन्य असाध्य रोगों का निदान पंचगवय पान से बताया गया है यह सर्वविदित है कि हमारे पूर्वज हजारों वर्षों से सब प्रकार के धार्मिक संस्कारों में पंचगवय प्रक्षालन, उपासनाओ में पंचगवय स्नान ओर सम्पुर्ण आरोग्य में पंचगवय पान, का प्रयोग करते आए हैं ।
आज धरती की मानव जाति पर आए महा विनाशकारी संकट निवारण हेतु पंचगवय का प्रयोग करने से वेदलक्षणा गौवंश के प्रति उपेक्षा व तिरस्कार के दुर्भावो का समन होगा ओर आधुनिक मानव जाति में सदभाव व सेवा भाव की जाग्रति होगी जिससे धरती पर गौमहिमा पुनर्स्थापित हो जाएगी यह मानव जाति की सेवा का महान कार्य गोप्रेमी पवित्र ह्रदय सन्त , गोऊपासक विद्वान विप्र, गोभक्त धर्मात्मा सज्जन , एवं गोमाता को समर्पित गोवत्स गोवत्सा व गोपुत्र गोपुत्रियो तथा आप हम सभी सजग मानवो द्वारा धार्मिक स्थलों के माध्यम से सम्पादित हो सकता है।
शास्त्रीय विधि से पंचगवय प्रयोग करने पर मानव जाति का महामारी के रोग से बचाव हो जाएगा ओर वेदलक्षणा गोमाता के साथ साथ धर्म शास्त्र व धार्मिक स्थलों की महिमा स्थापित होगी मांसाहार का त्याग करके पंचगवय प्रक्षालन पंचगवय पान करने वाला मानव इस महारोग से निसन्देह बच जाएगा इसमें हमारे धर्म शास्त्र व आयुर्वेद शास्त्र पूर्वजों का जीवन इतिहास तथा गोवृती गोसेवा प्रेमियों का अनुभव ही प्रमाण है।
हे गोमाता के लाङलो भारतीय आस्था की महाशक्ति का साक्षात्कार मानव जाति को कराओ मृत्यु के महाभय से भयभीत असहाय मानव जाति को आदि शक्ति सुरभी गो माता एवं परमपिता परमात्मा की शरण में बुलाओ उनके पंचगवय प्रक्षालन व पंचगवय पान के लिए वेदलक्षणा गोष्ठो आश्रमो देवालयों व धार्मिक संस्थाओं के द्वार खोल दो इसमे धर्म स्थलों के अस्तित्व की सार्थकता ओर सफलता है।
गुरुवार, 12 मार्च 2020
गौसेवक का मतलब क्या चलो बताये आपको आज सुनो एक गौसेवक की कहानी...
गौसेवक का मतलब क्या चलो बताये आपको आज सुनो एक गौसेवक की कहानी......👌
गौ सेवक का मतलब अंतरात्मा से प्रेरित वो व्यक्ति है जो गौ को माता मानता है पशु नहीं मानता है गौ सेवक वह है जो अपना समय अपना धन अपना मन सब कुछ लगा कर के गौ सेवा के कार्य पर जुड़ा हुआ रहता है चाहे मार्केट में कोई सेवा करने वाला गौ सेवक हो चाहे वह किसी गौशाला या गौ सदन पर अपनी सेवाएं देने वाला गौ सेवक हो गौ सेवक अपने परिवार अपने सगे संबंधियों से बैर लेकर समाज एवं सरकार से बैर लेकर के इस कार्य को करता है जहां पर सिर्फ अपवाद और कष्ट उसके साथ होते हैं पर उसे यह विश्वास होता है ।।
कि मैं गौ माता का कार्य कर रहा हूं और मुझ पर कोई कष्ट नहीं आएगा गौ सेवक इसे अपना कर्तव्य मानकर इस कार्य को करते हैं ।।
आइए हम सब मिलकर के उन सभी गौ सेवकों को सेल्यूट करें उनका सम्मान करें क्योंकि दुनिया में वैसे लोग बहुत कम हैं जो अपने परिवार अपने जॉब अपनी नौकरी से समय निकालकर अब अपना तन और मन और धन सब कुछ अर्पण करता है वैसे गौ सेवकों को हृदय से प्रणाम है पूरे भारतवर्ष के सभी गौ सेवकों को समर्पित उनके इस समर्पण को प्रणाम चरण वन्दन अभिनन्दन ।।।।।
बुधवार, 4 मार्च 2020
गौमाता ओर किसान को मारनें की तैयारी चल रही थी ओर हम आधुनिकता समझ बैठे
🙏💐 गौमाता ओर किसान को मारनें की तैयारी चल रही थी ओर हम आधुनिकता समझ बैठे 💐
🙏
मुगल , पुर्तगाली , फ्रेच , अंग्रेज सब लुट कर चले गये !
इनके बाद इन सब की छोडी मिली जुली नस्लों नें लुटा लेकीन अकल फिर भी नहीं !
भारतियों नें तो बुजुर्गों की बनाई कहावतें भी झुठला दी की
" अकल बादाम खाने से नहीं , ठोकर खानें से आती है "
खेतों से बैल निकल रहे थे ओर हमने ट्रेक्टर को तकनीक का नाम दे दिया !
गौबर हटा कर शुद्धता ओर स्वस्थ से खिलवाड हो रहा था ओर हम युरिया , सुपरफॉस्फेट जैसे भयंकर जहर डाल - कर धरती मां को तिल - 2 मार कर अपनें को मोडर्न समझ वैठे !
ना जाने ऐसी क्या जल्दी थी हमे की कोल्हु हटा कर महगी - 2 विदेशी मशीनें लगाकर समय बचाने में लगे रहे !
चुल्हे से गोबर के उपले कहीं गायब हो रहे थे ओर हम विदेशी ऐल पी जी सिलेंडर पर मुर्खों की तरह वॉव -2 चिल्ला रहे थे !
स्वर्ग समान वो मिट्टी , चुने ओर गौमाता के गोवर से निर्मित घर विलुप्त हो रहे थे ओर हम नदियों से रेता बजरी खोदने ओर सिमेंट , पेंट जैसे जहर की चमक में गुम थे !
गौमाता का अमृत तुल्य दुध , दहीं , लस्सी ओर घी खत्म हुऐ जा रहा था ओर हम जर्सी सुवर के जहर से धन कमानें में व्यस्त थे !
ये सब हो रहा था ओर हम आधुनिकता का गाना गाने में व्यस्त थे आज भी उसी आधुनिकता की धुंन में मस्त हैं ना जानें कब सुधरेंगे हम !
अभी भी समय है भेजे को लुवरिकट करिऐ ओर अपनी संस्कृती की गहरी जानकारी लीजिऐ क्या पता वो सोने की चिढिया बाला भारत अपनें जीते जी देख लें !
अन्यथा याद रखिऐ आलसी ओर कायरों को कभी इतिहास में माफ नहीं किया गया !
गौमाता को भारत की अर्थव्यवस्था से जोडनें में अपना योगदान करिऐ !
जय गौमाता
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