शनिवार, 13 अप्रैल 2019

एक महत्वपूर्ण पोस्ट। ध्यान से पढ़े।

जय श्री कृष्णा।
एक महत्वपूर्ण पोस्ट। ध्यान से पढ़े।
कल्पना कीजिए के आपके द्वार पर एक स्री / औरत आती है और कुछ खाना देने का आग्रह करती है। वेश भूषा से शायद वो आपके माँ की उम्र की हो, या शायद आपकी बहन की।
उसे देखकर आपको महसूस होता है कि वो निराधार और लाचार है। और भूख और प्यास के कारण आपसे थोड़ी सी खाना मिल जाने की आशा रखती है। शायद ऐसा इसलिए हो क्योंकि उसके परिवार वालो ने उसे त्याग दिया हो। उसका ध्यान नहीं रखा हो।
इसलिए वो थोड़ा सा भोजन पाने की आशा से आपके द्वार पर आपको पुकारती है।
आप क्या करेंगे ???
उसे मना कर देंगे और मुँह फेर लेंगे। या अपने शक्ति अनुसार उसे कुछ भोजन देंगे ???
भाइयों। आज गौमाता का यही हाल है। वो थोड़े से खाने की आशा लेकर हमारे द्वार पर आती है। ऐसे में हमारा कर्त्तव्य क्या बनता है ?
उसे डंडा दिखाकर भगा दे ??? या एक रोटी या घर में रखा कोई और खाना उसे दे। ताकि उसकी थोड़ी सी भूख शांत हो सके। और अगर वो भी ना हो सके तो थोड़ा सा पानी का आग्रह तो हम कर ही सकते है।
जो परमात्मा/ईश्वर, हमारे आराध्य श्री कृष्ण, प्रत्येक जीव में वास करते है, जो समस्त सृष्टि के आधार है, जिनकी पूजा हम प्रतिदिन करते है, वे प्रेम और भक्ति से दिया हुआ एक फूल, एक पत्ती, एक फल या थोड़े से जल से भी तृप्त हो जाते है। गौमाता सामने से चलकर हमारे द्वार पर आकर हमें एक अच्छे कर्म करने का, पुण्य कमाने का, भक्ति युक्त कर्म करने का मौका देती है। क्या इस मौके को आप गौमाता को भगाकर ऐसे ही व्यर्थ जाने देंगे ???
कई भाई कहते है कि उसके मालिक को/रबारी को उसका ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि वो उसका दूध लेता है।
इस बात पर गौर करे भाइयों, कि दूध के पैसे रबारी ने हमसे लिए। गौमाता ने नहीं। और अगर वो हमने कर्त्तव्य पथ से हट जाए, तब भी हमारा कर्त्तव्य यही हो जाता है कि हमारे द्वार पर जब वो आए तो हम अपने शक्ति अनुसार उसकी सेवा कर ले। अगर गाय का मालिक गौमाता का ध्यान न रखे, और ऐसी लाचार जीव को और दुःख देकर आप सुखी नहीं हो सकते।
कम से कम आप अपने घर पर काटी गई सब्जी का बचा हुआ वेस्ट भी हर रोज़ डालेंगे तब भी बहोत बड़ा फर्क पड़ जाएगा।
इस बात पर भी ध्यान दे की दूध का व्यापार कोई बहोत फायदे का व्यापर नहीं है। काफी मेहनत लगती है। एक बार करके देखिए, आपके संदेह दूर हो जाएंगे। रबारी/गाय के मालिक आपको बताएँगे कि गौचर ज़मीन जहाँ पहले गाय चरती थी, वहां हमने अपने मकान बना लिए है। इंसान हर कहीं अपना विस्तार फैला देते है, ऐसे में क्या गौमाता और उसके मालिक को शहर के बाहर निकाल देंगे ???
हम अगर लाखों - करोडो रुपए के मकान में रह सकते है, तो बाहर एक गौमाता के लिए ३०० से ४०० रुपये का एक चाट रखकर, घर में बचा खाना/पहली रोटी भी देकर गौमाता की भूख कम कर सकते है। उसे यह महसूस करवा सकते है कि आपके रहते वो निराधार और लाचार नहीं है।
गौमाता चाट हमेशा साफ़ रहता है। कभी गंदा नहीं होता। चित्र में देखे।
थोड़ा सा खाना दे देने से कोई गरीब नहीं हो जाता ? क्या आपने कभी सुना की कोई अतिथि को भोजन करवा करवाकर कर्ज़े में डूब गया या दिवालिया हो गया? किसी को खाना खिलाकर कोई बहोत बड़ा खर्चा नहीं हो जाता, कोई गरीब नहीं हो जाता।
आप हर रोज़ रात नौ बजे तक भरपेट खाना खाकर अपने क्षुधा को शांत कर लेते है। लेकिन बादमे बाहर निकलकर देखिए। गौमाता उतने रात को भी खाना तलाश रही होती है। कभी कागज़ खाती है तो कभी कभी प्लास्टिक।
यह बात सदैव याद रखे कि हमारे दादा-परदादाओ के साथ गौमाता ने सबसे अधिक मेहनत की। खेती में, दूध व्यवसाय में, हर प्रकार से अपना पूरा जीवन हमें प्रगति करवाने में समर्पित किया। आज हम जो कुछ भी है, वो उसके योगदान के बिना संभव हो ही नहीं सकता था।
कोई और करें न करें। आप धर्म का चयन करे। अपने कर्त्तव्य का चयन करे।
कृष्ण सदा गौमाता के पास थे। अगर आप गौमाता के पास है, तो आप कृष्णा के बहोत पास है।
इस पोस्ट को कॉपी-पेस्ट करके दूसरे भाइयों से शेर करे।
जय श्री कृष्णा।

शुक्रवार, 29 मार्च 2019

गौ पालन हमारी और देश की आवश्यकता है।

प्रश्न - गौ पालन पर आने वाले खर्च को आम व्यक्ति नहीं उठा सकता। और गो को जीवित रख कर कोई "लाभ" नही है अतः गो वध जायज़ है।
उत्तर - हम सरकार चुनते ही इसलिए है कि वो इस प्रकार का खर्च करे। जैसे सड़क निर्माण। चलती जनता है पर निर्माण सरकार कराती है।
मूल बात ये है यहाँ पर कि हमें गाय पालन में विकास नहीं दिख रहा है जबकि सड़क निर्माण में विकास दीखता है।
ऐसा क्यों?
ऐसा ज्यादातर उन लोगो को लगता है जो ज्यादा भौतिकवादी होते है या संसार को केवल स्थूल दृष्टी से देखते है।
ऐसे लोगों की निगाह में किसान केवल एक मजदूर होता है जबकि वास्तव में वो सृजनकर्ता है। इंजीनियर होता है किसान।
बाकि भैंसे का दूध पिने वालो को ये बात समझ आनी कठिन है।
अब जरा ये समझे।
एक गाय अपने जीवन में जितना खाती है उससे ज्यादा का गोबर और मूत्र देती है। गाय के गोबर और मूत्र को शोधन करके अनेक प्रकार के लाभ मिल सकते है। ये विज्ञान द्वारा सिद्ध है।
भारत सरकार जितने मूल्य का खाद/यूरिया खरीदती है उतने का खर्च बच सकता है। यदि सरकार देसी खाद बनवाये गाय के गोबर और मूत्र से। और कोई भी गाय अपने पुरे जीवन में गोबर और मूत्र देती ही रहती है।
दूध का मूल्य तो अलग है ही।
ये बात भी प्रमाणित है कि देसी खाद से अन्न की पौष्टिकता ज्यादा होती है। लबे समय प्रयोग से हमारी जीवन शक्ति बढ़ती है। हम कम बीमार पढ़ेंगे तो दवाई कम खायेगे। और सीधे सीधे विदेशी कंपनियो को देने वाली लागत बचेगी। ये भी लाभ है।
एक और लाभ बताता हु।
लंबे समय तक यूरिया इस्तेमाल करने से ज़मीन की उर्वरकता खत्म हो जाती है। और वो जमींन बंजर हो जाती है। देश में ज्यादा बंजर ज़मीन होने पर खेती कम हो पाती है। फिर सरकार को अन्न की कमी को पूरा करने ले लिए अन्न को आयात करना पड़ता है। और अपना धन खर्च करना पड़ता है।
अगर हम देशी खाद इस्तेमाल करे तो जमीन बंजर नहीं होगी और फिर अन्न की कमी नहीं होगी और फिर हमें अपनी जमा पूंजी विदेशियो को नहीं देनी पड़ेगी। ये भी लाभ ही है।
अतः गौ पालन हमारी और देश की आवश्यकता है।
जय राम जी की

शुक्रवार, 22 मार्च 2019

माँ के दूध का ऋण

माँ के दूध का ऋण ,,,,,,,,
एक बार एक व्यक्ति अपनी गाय किसी अनजान व्यक्ति को बेचने लगा ! यह देख गाय हंसने लगी ! वह व्यक्ति बोला तुम क्यों हंस रही हो !
,,,,,,," हे मानव !!! जिंदगी भर मेने कुछ नहीं खाया ( जिससे तेरा अहित हो ) केवल घास फूस खाकर मेने तुझे "अमृत " ( पांच अमृत है - गाय का दूध , दही , घृत ,शहद एवं गन्ना ) दिया !
गोमाता बोली (१) मेने तुझे अपना दूध पिलाया वो दूध जिस पर मेरे बछड़े का हक़ था !
(२) वो दूध जिससे तेरी काया निरोगी और " मन सुन्दर" यानि मनो विकारों से रहित एवं देवक प्रवृतियों (सकारात्मक ऊर्जा ) से परिपूर्ण / आध्यात्मिक प्रवृति का निर्माण होता है !
( ३) मेने वो गोबर दिया जिससे खेत की भूमि उर्वरक एवं तेरे खेतों में पैदा होने वाला अन्न दैविक ऊर्जा से पोषित हुआ और उससे तेरे विचार तपस्वियों, देवताओं ,एवं योगियों जैसे सुन्दर एवं अध्यात्म से परिपूर्ण निर्मित हुए ! इसी लिए तो ऋषियों ने कहा है की मेरे गोबर में लक्ष्मी का वास  ( खनिज तत्व जो देविक ऊर्जा देते है ) है !
( ४) मेरे होने से तेरे घर का वास्तु दोष समाप्त हुआ !
(५) मेरे खुरों में सर्प का वास होने के कारण कालसर्प तेरे नजदीक भी नहीं दिखाई देता है !
(६) मेरा अमृत जैसा दूध पीकर तू अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण कर सका !
( ७) और अंत में मुझ "स्वर्गदात्री के कारण परलोक में स्वर्ग का अधिकारी बना !
माँ आगे बोली ,,,,,,,, तू जिस व्यक्ति को मुझे बेच रहा है वह एक कसाई है जो मुझे भयंकर एवं दर्दनाक मौत देगा ! वो मेरे शरीर की चमड़ी को नरम करने के लिए उबलता हुआ पानी मेरे ऊपर डालेगा , मुझे भूखा रखेगा , मुझे उलटा लटकाएगा ,मेरे ऊपर हंटरों से वार करेगा जिससे मेरा होमोग्लोबिन मेरी चमड़ी से चिपक जाय और चमड़ी किसी प्रकार नरम हो जाय ! इतना ही नहीं वह मेरी चमड़ी मेरे जीवित रहते ही उतारेगे जिससे मेरा खून चमड़ी पर ना जम सके !
हे मानव ! क्या मेरे दूध का ऋण ------- " ऐसी दर्दनाक मेरी मौत है "
विशेष ,,,,,, जरा सोचिये --- गाय एक परोपकारी आत्मा है ! अगर आप उसे ऐसी भयंकर एवं दर्दनाक मौत के लिए बेचेंगे या विवश करेंगे तो आप के प्रारब्ध ( भाग्य ) में कैसा पाप संचित होगा ! इस पर विचार करिये !!!!!!!!!!,,,,, मेरे विचार से ऐसे व्यक्तियों का परलोक में वास दर्द एवं दुखों से परिपूर्ण होगा यानि "नरक लोक  (रौरव नरक ) की भयंकर यातनाए "!
नीति -- UPA हो या  NDA  की सरकार  गौमांस   का निर्यात कर /बेचकर अपनी तिजोरी भरने के लिए कसाई घरों को सब्सिडी /अंशदान के साथ लाइसेंस देते है और विश्व में भारत को  ( बीफ )  गोमांस का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना दिया है !  आप ऐसी सरकारों को चुनाव में वोट देकर गौ की नृशंस हत्या के पाप से शापित होना चाहोगे !  शायद नहीं !!!!  तो इनको अपना विशवास मत ना दे चाहे आपके परिवार का सगा सदस्य ही क्यों ना हो !  गौ रक्षा का प्रण   ले और पुण्य कमाएं ! 
हमेशा याद रखिये गाय एक ब्राह्मण है और ब्राह्मण की हत्या से ब्रह्म दोष लगता है यानि आपके जीवन में ब्रह्म गया / आध्यात्म ज्ञान कभी नहीं आएगा और  दोष ६ गुणा फलित होता है यानि सबसे बड़ा पाप लगेगा ! ऐसा पाप जिससे सभी देवी देवता रुष्ट होते है जो सुख समृद्धि देने वाले है !
यदि आप गौ हत्या नहीं चाहते तो  " हाँ या ना  " में जबाब दे जिससे आपकी आवाज सरकार तक पहुंचे !
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" जीवन का सत्य आत्मिक कल्याण है ना की भौतिक सुख !"
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जिस प्रकार मैले दर्पण में सूर्य देव का प्रकाश नहीं पड़ता है उसी प्रकार मलिन अंतःकरण में ईश्वर के प्रकाश का प्रतिबिम्ब नहीं पड़ता है अर्थात मलिन अंतःकरण में शैतान अथवा असुरों का राज होता है ! अतः ऐसा मनुष्य ईश्वर द्वारा प्रदत्त अनेक दिव्य सिद्धियों एवं निधियों का अधिकारी नहीं बन सकता है !
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"जब तक मन में खोट और दिल में पाप है, तब तक बेकार सारे मन्त्र और जाप है !"
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,,,,सच्चे संतो की वाणी से अमृत बरसता है , आवश्यकता है ,,,उसे आचरण में उतारने की ....
सर्वदेवमयी यज्ञेश्वरी गौमाता को नमन
जय गौमाता की 
शरीर परमात्मा का दिया हुआ उपहार है ! चाहो तो इससे " विभूतिया " (अच्छाइयां / पुण्य इत्यादि ) अर्जित करलो चाहे घोरतम " दुर्गति " ( बुराइया / पाप ) इत्यादि !
परोपकारी बनो एवं प्रभु का सानिध्य प्राप्त करो !
प्रभु हर जीव में चेतना रूप में विद्यमान है अतः प्राणियों से प्रेम करो !
शाकाहार अपनाओ , करुणा को चुनो !
choice is yours . 


रविवार, 13 जनवरी 2019

प्रातः काल उठकर सभी गोमाता को इस भाव से याद करें कि,,,

प्रातः काल उठकर सभी गोमाता को इस भाव से याद करें कि,,,
इतनी ठण्ड में भूखी गाय, रात कैसे गुजारी होगी? अभी दिन उग आया, हमने चाय, दूध, नाश्ता कर दिया या गर्मा गर्म अभी तैयार हो रहा है, पर गोमाता के लिये क्या? घर घर अभी आयेगी, भिखारी की तरह हमारे गेट पर खड़ी घंटों इंतजार करेगी, मिलेगा क्या? कोई टुकड़ा देगा, कोई दुत्कार और डंडा। कहाँ जाय, किसे सुनाए अपनी व्यथा? सर्दी, गर्मी, बरसात, हारी- बीमारी, भूख प्यास, मारपीट और कसाइयों द्वारा लेजाते समय अमानवीय अत्याचार, फिर बेमौत मारना,,,, कितने अत्याचार इस धार्मिक कहे जाने वाले अधार्मिक भारत में गो के साथ हम और हमारे वोटों से बनने वाली सरकारें कर रही है? पैसा चाहिये तो गो को मारकर तोल कर पैसे ले लो, उसका लहू बेच दो, हड्डी बेच दो, उसका चमड़ा बेच दो, पेट का बच्चा बेच दो,,, क्या अपराध नहीं कर रहे हैं हम गो के साथ? फिर भी भगवान के सामने स्याने बन रहे हैं, हमारा कल्याण हो जाय, हम पैसे वाले बन जाएं, हमें स्वस्थ रखो, मानसम्मान दिलवा दो, हमें बड़ा बना दो, राजा बना दो, मंत्री संतरी बना दो, मठाधीश बना दो आदि आदि। माँ की माँ की माँ के साथ अत्याचार करने वाला, किस मुँह से भगवान से मांगता है? अरे दुष्ट मनुष्य की खाल में बैठे असुर,,, कब तक सुरक्षित रहेगा? तुझे तो तेरे पाप ही खा जाएंगे,,, भगवान किसी भी रूप में बचा नहीं पाएंगे। गाय से इतना बैर और अपनी सलामती की कामना रखता है? नहीं हो सकता,,,
तेरे बचने का अगर रत्तीभर भी कोई उपाय बचा है तो सिर्फ और सिर्फ गोसेवा,,, गो के अपराध सिर्फ गोसेवा से कम हो सकते हैं और किसी भी शास्त्र में देख लेना, किसी भी महापुरुष को पूछ लेना, कोई दूसरा उपाय नहीं है। अभी तेरा शरीर है, लग जा गोसेवा में,,, यह शरीर छूट गया तो फिर चौरासी में चला जायेगा जहाँ गो के साथ इस गोअपराधी देश का नागरिक होने के कारण जो अपराध हुए हैं उनका दण्ड आरम्भ हो जाएगा। तुम्हारे वोटों से बनने वाली सरकारों ने जो गो अपराध करवाये, होने दिए उनका फल तुम्हारे हिस्से में भी आयेगा। प्रभु को याद करके ईमानदारी से सोचना,,, कितना अपराध हुआ है और हो रहा है, इस भूमि पर गो के साथ,,, भगवान से प्रार्थना करो कि हमें इन अपराधों से बचने की बुद्धि और सामर्थ्य दें।
मकर संक्रान्ति का पुण्य दिवस नजदीक आ रहा हैं इसी पुण्य दिवस से एक कठोर संकल्प कर लो कि संपूर्ण मानव जीवन का के जीने का आधार ही गौ सेवा ह इसलिए आज से और अभी से ही तन से, मन से ,और धन से जैसे  भी हो गौ माता जी की सेवा में ही मेरा अधिकांश जीवन समर्पित करना है
चाहे गौ माता जी को घर पर रखकर करना पड़े चाहे गौ साला में कम से कम 1 गौ माता जी के गोद जाकर करना पड़े  पर गौ सेवा करने का संकल्प जीवन भर नहीं तोड़ना है।

बुधवार, 12 दिसंबर 2018

गौसेवा के प्रकार

गौ सेवा के प्रकार

क्रियात्मक गोसेवा
रचनात्मक गोसेवा
सर्जनात्मक गोसेवा
भावात्मक गोसेवा

क्रियात्मक गोसेवा
तन से होती है ,जैसे गौशाला की सफाई ,गौ माता को स्नान कराना ,गौ माता की मालिश करना ,गोग्रास  परोसना (चारा, पानी आदि)

रचनात्मक गोसेवा
उपासना एवं आहार में पंचगव्य का उपयोग करना ,अपनी आय का एक अंश गोसेवा में लगाना, परिचित लोगों को भी पंचगव्य के लिए प्रेरित करना , गौ सेवा के लिए प्रेरित करना आदि।

सर्जनात्मक गोसेवा
गोचर ,गोभूमि को गाय के लिए आरक्षित करवाना एवं उसका विकास करना,भारतीय गोवंश के संवर्धन के लिए कार्य करना , पंचगव्य विनियोग के लिए कार्य करना (संकलन,वितरण) आदि।

भावात्मक गोसेवा
अपने इस से प्रार्थना करना (गोरक्षा ,गोसेवा, गोपालन के लिए), यह विचार करना कि गोवंश सुखी कैसे हो गोवंश दुखी नहीं हो आदि।

शनिवार, 8 दिसंबर 2018

कैंसर के इलाज में गौमूत्र ने दिखाई नई राह… मिला अमेरिकी पेटेंट

कैंसर के इलाज में गौमूत्र ने दिखाई नई राह… मिला अमेरिकी पेटेंट…

#भारतीय ही भूल गए है अपनी गौ माता की महिमा दूसरी ओर #विदेशी #गौ_उत्पादक का रिसर्च करके बड़ी भारी मात्रा में उपयोग में लाकर लाभविन्त हो रहे है ।

#गौमूत्र आैर गौमूत्र अर्क का प्रयोग सदियों से जीर्ण #व्याधियों को ठीक करने में किया जा रहा है।  #खतरनाक रोग #कैंसर के उपचार के लिए दुनिया भर में शोध चल रहे हैं लेकिन अभी तक कोई सफलता नही मिली है पर अब सदियों से इस्तेमाल हो रहे #गौमूत्र ने एक नई राह दिखाई है ।

#आयुर्वेद में प्राचीन काल से #गौमूत्र आैर पंचगव्य का विभिन्न रोगों को ठीक करने में उपयोग होता रहा है। गौमूत्र को आयुर्वेद में त्रिदोष(वात-पित-कफ) शामक माना गया है। सभी को खत्म करने की शक्ति गौमूत्र में है। गौमूत्र को प्राचीन ग्रंथ आैर आयुर्वेद के जानकार कैंसर ( जिसे पुराने आयुर्वेद के ग्रंथो में अबुर्द के नाम से जाना जाता था )के उपचार में कारगर मानते थे। अब धीरे धीरे #आयुर्वेद का यह मत #वैज्ञानिक कसौटी पर भी खरा उतरता नजर आ रहा है ।

गौ विज्ञान अनुसंधान #केंद्र द्वारा गाय के मूत्र से बनाई एक दवा को अमेरिकी पेटेंट हासिल हुआ है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कैंसर की इस दवा को अपने #एंटीजीनोटॉक्सिटी गुणों के कारण तीसरी बार यह #पेटेंट मिला है। गौमूत्र से बने अर्क को कामधेनु अर्क नाम दिया गया है। #नेशनल_इन्वाइरनमेंटल_इंजीनियर रिसर्च_इंस्टिट्यूट_नीरी और गौ_विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने इसे मिलकर तैयार किया है। नीरी के एक्टिंग डायरेक्टर तपन #चक्रवर्ती ने कामधेनु अर्क को पेटेंट मिलने की पुष्टि की है ।

#चक्रवर्ती ने बताया कि री #डिस्टिल्ड काउ यूरिन डिस्टिलेट का उपयोग जैविक तौर पर #नुकसानग्रस्त डीएनए को दुरस्त करने में किया जा सकता है। इस नुकसान से #कैंसर समेत कई बीमारियाँ भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि गौमूत्र से तैयार ये अर्क #जीनोटॉक्सिटी के खिलाफ काम करता है जो कोशिका के #आनुवांशिक पदार्थ को होने वाली नुकसानदायक क्रिया है। मानसिंघका ने बताया कि इसके लिए तीन #मरीजों पर शोध किया गया जिनमें से दो को गले और एक को #गर्भाशय का #कैंसर था। वो सही हो गया है ।

गौ मूत्र की महत्ता
1. कैसर रोधक #टेक्सोल पेव #टीटेक्सेल को #अमेरिका से पेटेन्ट भी कराया है जोकि #कैंसर रोधक है।

2. रोम में #गौमूत्र की महत्ता इतनी अधिक बढ़ रही थी कि वहां गौमूत्र पर कर भी लगाने का वर्णन है।

3. यूरोप के देशों में 18वीं शताब्दी में #गौमूत्र से पीलिया, गठिया, साइटिका, अस्थमा, धात , इन्फ्लूएजा आदि रोगों के निदान का विस्तृत वर्णन है।

4. चीन में हर्बल औषधियों में गौमूत्र के सहपान का वर्णन है।

5. #अमेरिका के #डाॅक्टर #क्राफोड हैमिल्टन के अनुसार गौमूत्र के प्रयोग से ह्रदय के रोग दूर होता है। कुछ दिन गौमूत्र सेवन से #रक्तचाप ठीक होता है, #भूख बढ़ती है तथा किडनी सम्बन्धी रोगों में लाभ होता है।

6. गौमूत्र रक्त में बहने वाले #कीटाणुओं का नाश करता है ।

8. गौमूत्र घावों की विशाक्तता को दूर करता है तथा #स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है गौमूत्र 100 से अधिक रोगों के पूर्ण निदान में प्रभावी है।

9. गौमूत्र अर्क के #कैंसर रोधी गुण पर पेटेन्ट संख्या यू0एस0-6410056 प्राप्त हुआ है।

10. गौमूत्र रक्त व विष की विकृति को हटाता है, बडी आंत में गति को शक्ति देता है, शरीर में वात पित व कफ #दोष को स्थिर रखने में सहयोग करता है।

11. यह अनिच्छित व #अनावश्यक वसा को निर्मित होने से रोकता है, लाल रक्त कोशिकाओं एवं #होमेयोग्लोबिन के उत्पादन में सन्तुलन रखता है।

12. यह जीवाणुनाशी व #मूत्रवर्धक होने से विष (टोक्सिन) को नष्ट करता है, मूत्र मार्ग से पथरी को हटाने में सहायक है, #रक्तशुद्धि करता है।

13. यह तेजाब विहीन, वंशानुगत गठिया रोग से मुक्त करता है। आलस्य व मांसपोशियों की कमजोरी को हटाता है, कीटाणुनाशक, कीटाणु की #वृद्धि को रोकता है। (गेन्गरीन) मांस सड़ाव से रक्षा करता है।

14. यह #रक्तशुद्धिकर्ता अस्थि में शक्ति प्रदाता (कीटाणुनाशक) रक्त में #तेजाबी अव्यवों को कम करता है ।

15. यह जीवन में शक्ति व उत्साह वृधन में #सक्रियता लाता है व मानसिक रूग्णता व प्यास से बचाता हैं अस्थि में पुनः शक्ति प्रदान कर जीवन में उमंग वृद्धि करते हुए पुनरोत्पादक शक्ति प्रदान करता है।

16. यह रोग प्रतिरोधात्मक #शक्ति #वर्द्धक, हृदय को शक्ति व संतोष प्रदान करता है।

#भारतवासियों आप भी गौ उत्पादक की महत्ता समझकर उपयोग करके #स्वस्थ्य रहे और #गौ हत्या रोकने तथा देश को #समृद्ध बनाये रखने में सहभागी होइए ।

आज से हम सभी संकल्प ले क़ि गाय माता को कत्लखाने जाने से बचाकर #गाय माता की रक्षा करेंगे ।

जयगौमाता

गौ कथा (ये कथा भीष्म पितामह ने युधिषिठर को सुनाई थी)

(( गौ कथा )))

ये कथा भीष्म पितामह ने युधिषिठर को सुनाई थी .
असल में भीष्म पितामह का कहना था कि गाय का मूत्र और गोबर इतना गुणवान है कि इससे हर रोग का निवारण हो सकता है
इतना ही नहीं इसमें माँ लक्ष्मी का भी वास होता है इसलिए इसे बहुत शुभ माना जाता है
गाय की पवित्रता भी दर्शा रहे है
हमारे हिन्दू धर्म में गाय को माँ का दर्ज़ा दिया जाता है . कुछ लोग इससे गाय माँ और कुछ गाय माता कहते है . यहाँ तक कि अगर हम शास्त्रो का इतिहास देखे तो गाय भगवान् कृष्ण को बहुत प्रिय लगती थी इसलिए तो वो ज्यादातर समय अपनी गायों के साथ व्यतीत करते थे . ये अलग बात है कि आज कल गाय को खाने की वस्तु के रूप में भी प्रयोग किया जाने लगा है जिसके लिए बहुत खेद है .

हम जानते है कि केवल हमारे खेद करने से ये पाप रुकने नहीं वाला इसलिए समझाने से कोई फायदा नहीं बस उम्मीद कर सकते है जो लोग गाय को एक वस्तु समझ कर उसका सेवन करते है वो भी जल्द ही ये सब बन्द कर दे

भीष्म पितामह ने सुनाई युधिषिठर को ये कथा..
—एक बार लक्ष्मी जी ने मनोहर रूप यानि बहुत ही अध्भुत रूप धारण करके गायों के एक झुंड में प्रवेश कर लिया और उनके इस सुंदर रूप को देखकर गायों ने पूछा कि, देवी . आप कौन हैं और कहां से आई हैं?

गायों ने ये भी कहा कि आप पृथ्वी की अनुपम सुंदरी लग रही हो . तब गायों ने एकदम से कहा कि सच सच बताओ, आखिर तुम कौन हो और तुम्हे कहाँ जाना है ?
तब लक्ष्मी जी ने विन्रमता से गायों से कहा कि तुम्हारा कल्याण हो असल में मैं इस जगत में अर्थात संसार में लक्ष्मी के नाम से प्रसिद्ध हूं और सारा जगत मेरी कामना करता है मुझे ही पाना चाहता है . मैंने दैत्यों को छोड़ दिया था और इसलिए वे सदा के लिए नष्ट हो गए
इतना ही नहीं मेरे आश्रय में रहने के कारण इंद्र, सूर्य, चंद्रमा, विष्णु, वरूण तथा अग्नि आदि सभी देवता सदा के लिए आनंद भोग रहे हैं। इसके बाद माँ लक्ष्मी ने कहा कि जिनके शरीर में मैं प्रवेश नहीं करती, वे सदैव नष्ट हो जाते हैं और अब मैं तुम्हारे शरीर में ही निवास करना चाहती हूं
लेकिन इसके बाद भी कथा अभी खत्म नहीं हुई क्योंकि गायों ने अब तक माँ लक्ष्मी को अपनाया नहीं था .

गायों ने क्यूँ किया माँ लक्ष्मी जी का त्याग..
देवी लक्ष्मी की इन बातों को सुनने के बाद गायों ने कहा कि तुम बड़ी चंचल हो, इसलिए कभी कहीं भी नहीं ठहरती . इसके इलावा तुम्हारा बहुतों के साथ भी एक सा ही संबंध है, इसलिए हमें तुम्हारी इच्छा नहीं है तुम्हारी जहां भी इच्छा हो तुम चली जाओ तुमने हमसे बात की, इतने में ही हम अपने आप को तुम्हारी कृतार्थ यानि तुम्हारी आभारी मानती हैं

गायों के ऐसा कहने पर लक्ष्मी ने कहा , कि ये तुम क्या कह रही हो ? मैं दुर्लभ और सती हूं अर्थात मुझे पाना आसान नहीं ,पर फिर भी तुम मुझे स्वीकार नहीं कर रही, आखिर इसका क्या कारण है ? यहाँ तक कि देवता, दानव, मनुष्य आदि सब कठोर तपस्या करके मेरी सेवा का सौभाग्य प्राप्त करते हैं अत:तुम भी मुझे स्वीकार करो . वैसे भी इस संसार में ऐसा कोई नहीं जो मेरा अपमान करता हो .

ये सब सुन कर गायों ने कहा , कि हम तुम्हारा अपमान या अनादर नहीं कर रही, केवल तुम्हारा त्याग कर रही हैं और वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारा मन बहुत चंचल है . तुम कहीं भी जमकर नहीं रहती अर्थात एक स्थान पर नहीं रुक सकती . इसलिए अब बातचीत करने से कोई लाभ नहीं तो तुम जहां जाना चाहती हो, जा सकती हो इस तरह से गायों ने माँ लक्ष्मी का त्याग कर दिया क्योंकि गायों को मालूम था कि लक्ष्मी कभी किसी एक के पास नहीं रहती बल्कि पूरे संसार में घूमती है पर फिर भी माँ लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और इतना सब होने के बाद भी वार्तालाप ज़ारी रखी
अब आखिर में माँ लक्ष्मी ने कहा , गायों. तुम दूसरों को आदर देने वाली हो और यदि तुमने ही मुझे त्याग दिया तो सारे जगत में मेरा अनादर होने लगेगा . इसलिए तुम मुझ भी पर अपनी कृपा करो मैं तुमसे केवल सम्मान चाहती हूँ

तुम लोग सदा सब का कल्याण करने वाली, पवित्र और सौभाग्यवती हो तो मुझे भी बस आज्ञा दो, कि मैं तुम्हारे शरीर के किस भाग में निवास करूं?
इसके बाद गायों ने भी अपना मन बदल लिया और गायों ने कहा, हे यशस्विनी . हमें तुम्हारा सम्मान आवश्य ही करना चाहिए  इसलिए तुम हमारे गोबर और मूत्र में निवास करो, क्योंकि हमारी ये दोनों वस्तुएं ही परम पवित्र हैं।

तब माँ लक्ष्मी ने कहा, धन्यवाद् और धन्यभाग मेरे, जो तुम लोगों ने मुझ पर अनुग्रह किया यानि मेरे प्रति इतनी कृपा दिखाई मैं आवश्य ऐसा ही करूंगी . मैं सदैव तुम्हारे गोबर और मूत्र में ही निवास करूंगी सुखदायिनी गायों अर्थात सुख देने वाली गायों तुमने मेरा मान रख लिया , अत: तुम्हारा भी कल्याण हो बस यही वजह है कि गाय की इन दो वस्तुओ को लक्ष्मी का ही रूप समझा जाता है .

             इस कथा को पढ़ने के बाद ये तो समझ आ ही गया होगा कि गाय का धार्मिक ग्रंथो के अनुसार कितना महत्व है।