शुक्रवार, 21 मार्च 2025

गौमाता की रक्षा हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार से 5 महत्वपूर्ण माँगें


गौमाता की रक्षा हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार से 5 महत्वपूर्ण माँगें 

भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की संस्कृति, अर्थव्यवस्था एवं आध्यात्मिकता का केंद्र गौमाता रही हैं। हमारे वेदों और पुराणों में गौमाता को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। लेकिन आज गौवंश संकट में है और इसे बचाने के लिए कठोर नीतियाँ बनाने की आवश्यकता है।

गौसेवा केवल व्यक्तिगत प्रयासों से संभव नहीं, इसके लिए सरकार की ठोस नीतियों की भी जरूरत है। अतः, केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों से हम निम्नलिखित पाँच माँगें रखते हैं:


1. गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए एवं गौ मंत्रालय की स्थापना हो

✅ गौमाता सनातन संस्कृति की जननी हैं, इसलिए उन्हें राष्ट्रमाता घोषित किया जाए।
✅ सरकार में एक स्वतंत्र गौ मंत्रालय का गठन हो, जो गौरक्षा, गौसंवर्धन और गौ-आधारित अर्थव्यवस्था पर कार्य करे।
✅ प्रत्येक राज्य में गौरक्षा एवं गौसेवा आयोग बनाया जाए, जो गौशालाओं को सहयोग प्रदान करे।


2. रासायनिक खादों पर प्रतिबंध लगे, गौ-आधारित कृषि को बढ़ावा दिया जाए

✅ रासायनिक खादों के उपयोग से भूमि की उर्वरता नष्ट हो रही है, जिससे पर्यावरण को भी हानि हो रही है।
✅ गोबर खाद और गौमूत्र से बनी जैविक खाद को बढ़ावा दिया जाए।
✅ गोबर गैस से सी.एन.जी. बनाई जाए और उसे रसोई एवं वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाए।
✅ सरकार किसानों को गोबर खाद पर सब्सिडी प्रदान करे ताकि वे जैविक खेती को अपनाएँ।


3. 10 वर्ष तक के बच्चों को नि:शुल्क भारतीय गाय का दूध दिया जाए

बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भारतीय गाय का दूध अत्यंत लाभकारी है।
✅ सरकार द्वारा 10 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को भारतीय गौदूध नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाए।
✅ किसानों को गौ पालन हेतु अनुदान दिया जाए एवं प्रत्येक गाँव में भारतीय नंदी (सांड) की व्यवस्था हो, जिससे शुद्ध गौवंश का संवर्धन किया जा सके।


4. विदेशी जर्सी गायों पर प्रतिबंध लगे, गौचर भूमि को मुक्त किया जाए

✅ जर्सी एवं अन्य विदेशी गायों का दूध मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
✅ वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर विदेशी गायों के दूध की विकृति को सार्वजनिक किया जाए।
गौचर भूमि को गौवंश के लिए संरक्षित किया जाए, ताकि उन्हें चरने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके।


5. गौ-हत्यारों को मृत्यु दंड दिया जाए

✅ भारत में गौहत्या पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हो और जो भी व्यक्ति गौहत्या में संलिप्त पाया जाए, उसे कठोरतम दंड दिया जाए।
✅ गौ-हत्यारों को मृत्यु दंड दिया जाए, ताकि इस पवित्र भूमि पर गौहत्या जैसी अमानवीय घटनाएँ समाप्त हो सकें।


🚨 निष्कर्ष

गौरक्षा केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान, संस्कृति और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा विषय है। यदि सरकार इन पाँच माँगों को लागू करती है, तो न केवल गौवंश संरक्षित होगा, बल्कि देश की कृषि, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण में भी सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

🙏 आइए, हम सब मिलकर इस आंदोलन को मजबूत करें और सरकार तक अपनी माँगें पहुँचाएँ। 🙏

🚩 जय गौमाता! जय सनातन धर्म! 🚩

आपका सेवक
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया

प्लास्टिक प्रदूषण और गौमाता की पीड़ा: हमारी जिम्मेदारी

 

 प्लास्टिक प्रदूषण और गौमाता की पीड़ा: हमारी जिम्मेदारी 

हममें से अधिकांश लोग प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग करने के बाद उन्हें कूड़ेदान में डाल देते हैं, यह सोचकर कि हमने सफाई का कार्य पूरा कर दिया। लेकिन क्या हमने कभी यह सोचा है कि यह प्लास्टिक आखिर जाता कहाँ है?

कई बार, पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण गौमाता कूड़ेदान की ओर चली जाती हैं, और वहाँ पड़ी खाद्य-वस्तुओं के साथ-साथ प्लास्टिक भी खा लेती हैं। यह प्लास्टिक उनके पेट में चला जाता है, जिससे उन्हें अत्यधिक पीड़ा, बीमारियाँ और कई बार असमय मृत्यु तक का सामना करना पड़ता है।

🐄 गौमाता पर प्लास्टिक का दुष्प्रभाव

➡️ पाचन तंत्र में अवरोध: प्लास्टिक न पचने वाला पदार्थ है, जो गौमाता के पेट में जमा होकर उनके पाचन तंत्र को खराब कर देता है।
➡️ भूख की समाप्ति: प्लास्टिक के कारण उन्हें भूख का एहसास नहीं होता, जिससे वे भोजन नहीं करतीं और धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं।
➡️ गंभीर बीमारियाँ: पेट में प्लास्टिक जमा होने से अल्सर, संक्रमण और आंतों में घाव जैसी घातक समस्याएँ हो सकती हैं।
➡️ मृत्यु का खतरा: प्लास्टिक से घुटन और आंतों में रुकावट के कारण कई गौमाताओं की असमय मृत्यु हो जाती है।

🌱 हम क्या कर सकते हैं?

प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग पूरी तरह से बंद करें।
यदि प्लास्टिक का उपयोग किया भी गया है, तो उसे खुली जगह या कूड़ेदान में न फेंकें।
कूड़ेदान में फेंकने से पहले खाद्य-पदार्थों को प्लास्टिक से अलग करें।
गौशालाओं और सार्वजनिक स्थलों पर प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए पहल करें।
अपने परिवार, मित्रों और समाज को इस समस्या के प्रति जागरूक करें।
बाजार जाते समय कपड़े या जूट के थैले का प्रयोग करें।

🐂 गौरक्षा के लिए प्लास्टिक मुक्त समाज बनाना जरूरी

गौसेवा का अर्थ केवल उन्हें रोटी खिलाना ही नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी हमारा कर्तव्य है। अगर हम वास्तव में गौरक्षक हैं, तो हमें अपने घर, मोहल्ले और समाज को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए पहल करनी होगी।

🙏 आइए, आज से ही यह संकल्प लें कि हम प्लास्टिक को कूड़ेदान में नहीं डालेंगे और गौमाता की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। 🙏

🚩 जय गौमाता! जय सनातन धर्म! 🚩

आपका सेवक
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया

मंगलवार, 18 मार्च 2025

छाछ पीने के फायदे: सेहत के लिए अमृत समान

छाछ पीने के फायदे: सेहत के लिए अमृत समान

छाछ भारतीय भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो न सिर्फ स्वादिष्ट होती है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। यह प्रोबायोटिक्स, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होती है, जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती है। आइए जानें छाछ पीने के प्रमुख लाभ:

1. पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है

छाछ पीने से पेट की गर्मी दूर होती है और पाचन तंत्र सही तरीके से कार्य करता है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जिससे अपच, गैस और एसिडिटी की समस्या कम होती है।

2. नींद न आने की समस्या में सहायक

अगर आपको नींद नहीं आती या आप अनिद्रा से परेशान हैं, तो छाछ का सेवन बेहद लाभदायक हो सकता है। यह शरीर को ठंडक पहुंचाती है और मानसिक तनाव को कम करके गहरी नींद लाने में मदद करती है।

3. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए

छाछ में मौजूद विटामिन और मिनरल्स हमारी इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं। इसका नियमित सेवन शरीर को संक्रमण और बीमारियों से बचाने में सहायक होता है। यह शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करती है, जिससे हम दिनभर ताजगी और स्फूर्ति महसूस करते हैं।

4. हाइड्रेशन और शरीर को ठंडक पहुंचाती है

गर्मियों में छाछ एक प्राकृतिक कूलेंट की तरह काम करती है। यह शरीर को हाइड्रेटेड रखती है और लू लगने से बचाती है। इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते।

5. हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाती है

छाछ में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डी संबंधी समस्याओं से भी बचाव करती है।

कैसे पिएं छाछ?

  • दोपहर के खाने के बाद एक गिलास छाछ पीना सबसे फायदेमंद होता है।
  • इसे जीरा, काली मिर्च और सेंधा नमक डालकर पीने से इसके लाभ और भी बढ़ जाते हैं।
  • गर्मियों में रोजाना छाछ पीना शरीर को ठंडा और तरोताजा रखता है।

निष्कर्ष

छाछ एक संपूर्ण प्राकृतिक स्वास्थ्य पेय है जो पाचन को सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है। इसे अपने आहार में शामिल करके आप स्वस्थ और ऊर्जावान रह सकते हैं।

क्या आप भी छाछ पीते हैं? हमें कमेंट में बताएं!


मंगलवार, 11 मार्च 2025

अभी नहीं तो कभी नहीं – गौ-रक्षा एक अनिवार्य संकल्प

अभी नहीं तो कभी नहीं – गौ-रक्षा एक अनिवार्य संकल्प

आज गौ-तस्करी, गौ-हत्या और गौ-मांस के निर्यात जैसी भयावह समस्याएँ हमारे सामने खड़ी हैं। यदि हम अब भी जागरूक नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमारी इस उदासीनता का खामियाजा भुगतेंगी। गौ-रक्षा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आवश्यकता भी है।

गौ-पालन के लाभ और इसकी आवश्यकता

गौ-पालन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार हो सकता है। आज के दौर में कृषि घाटे का व्यवसाय बनती जा रही है, जिससे करोड़ों किसान प्रभावित हैं। गौ-पालन को वैज्ञानिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से अपनाकर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सकता है।

गाय से प्राप्त दूध, घी, दही, गोमूत्र और गोबर जैसे उत्पाद स्वास्थ्य के लिए अमृत समान हैं। यही नहीं, जैविक खेती में गोबर खाद और गोमूत्र से बनी जैविक कीटनाशक का उपयोग करने से रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। किसानों को इस दिशा में प्रशिक्षित करने की सख्त जरूरत है।

गोशालाओं का विकास – गौ-रक्षा की रीढ़

गौ-रक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम गोशालाएँ हैं। यदि गोशालाओं को उचित संसाधनों से सुसज्जित किया जाए, तो वे केवल गायों के संरक्षण का ही नहीं, बल्कि आजीविका और स्वावलंबन का भी केंद्र बन सकती हैं।

गोशालाओं के लाभ:

  1. गौ-संरक्षण – बूढ़ी और अनुपयोगी समझी जाने वाली गायों को यहाँ उचित देखभाल मिल सकती है।
  2. गौ-आधारित उद्योग – गोबर से खाद, कंडे, बायोगैस, गौमूत्र से दवा और पंचगव्य उत्पादों का निर्माण कर आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सकती है।
  3. रोजगार का सृजन – ग्रामीण युवाओं को गौ-पालन और गौ-उद्योग से जोड़कर नए रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं।

गांव-गांव में गोशालाएँ और गौ-चर भूमि

गौ-रक्षा को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक गाँव में कम से कम एक गोशाला होनी चाहिए। प्रत्येक परिवार में कम से कम एक गाय पालने को प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए शासन और समाज को मिलकर योजना बनानी होगी। गौ-चर भूमि का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है ताकि गौवंश को उचित चरागाह उपलब्ध हो।

जनजागरण और सरकार की भूमिका

गौ-रक्षा केवल कुछ संस्थानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की जरूरत है। शासन और ग्रामवासियों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि गौ-हत्या और तस्करी पर सख्त रोक लगे, तथा गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाया जाए

निष्कर्ष

यदि हम अभी नहीं जागे, तो गौ-संरक्षण केवल किताबों में सिमटकर रह जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए गौ-सेवा का संकल्प लेना होगा। आइए, मिलकर इस पुनीत कार्य को गति दें – अब नहीं तो कभी नहीं!

गौमाता की जय!



गौमाता की रक्षा – समय की पुकार

गौमाता की रक्षा – समय की पुकार

समय बदल रहा है!

आज के आधुनिक दौर में गौ माता केवल एक सजावट की वस्तु बनती जा रही हैं। जिन गलियों और आंगनों में कभी गौ माता का वास हुआ करता था, वहां अब सिर्फ कंक्रीट के जंगल खड़े हैं। जिस देश में गौ माता को माता का दर्जा दिया गया है, वहां आज उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है।

गौ माता का महत्व – धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से

सनातन हिंदू समाज में गौ माता को पूजनीय माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है:

"गावो विश्वस्य मातरः" – गाय पूरे विश्व की माता है।

गौ माता सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानव जीवन, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अति आवश्यक है।

गौ माता का पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोबर, गौमूत्र) अनेक रोगों का नाश करता है।
✅ #गौमूत्र और #गोबर से जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है।
गौ माता का दूध अमृत समान होता है, जिसमें ओमेगा-3 और कई पोषक तत्व होते हैं।

गाय बचेगी, तो देश बचेगा!

अगर गौ माता लुप्त हो गईं, तो हमारी संस्कृति, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर भारी संकट आ सकता है।

🚩 गौ माता के बिना जैविक खेती संभव नहीं।
🚩 गौ आधारित अर्थव्यवस्था से किसानों और ग्रामीण भारत को मजबूती मिलती है।
🚩 गौ माता से पर्यावरण संतुलन बना रहता है, जिससे जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकता है।

हमारी जिम्मेदारी – गौरक्षा संकल्प

हमें यह संकल्प लेना होगा कि:

गौमाता की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
पॉलिथिन का उपयोग बंद करेंगे, ताकि गौ माता इसे खाकर बीमार न हों।
गौशालाओं को सहयोग देंगे और बेसहारा गायों को आश्रय देंगे।
✅ #गौमाता से जुड़े उत्पादों (गौ मूत्र, गोबर, #पंचगव्य) का उपयोग करेंगे।

🚩 आइए, गौ रक्षा के इस संकल्प में हम सभी जुड़ें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर और समृद्ध भारत का निर्माण करें! 🚩


सोमवार, 10 मार्च 2025

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने से होने वाले लाभ

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने से होने वाले लाभ

भारत में गौ माता को पूजनीय और पवित्र माना गया है। प्राचीन काल से ही सनातन संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, क्योंकि यह मानव जाति को पोषण, कृषि, और आध्यात्मिक उन्नति में सहयोग देती है। यदि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाता है, तो इससे कई सकारात्मक परिवर्तन हो सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इससे क्या-क्या लाभ होंगे।


1. गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध

यदि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाता है, तो भारत में गौ हत्या पर सख्त कानून लागू किया जा सकता है। इससे अवैध कत्लखानों पर पूर्ण नियंत्रण होगा और गोवंश की रक्षा सुनिश्चित होगी। वर्तमान में कई राज्यों में गौहत्या प्रतिबंधित है, लेकिन संपूर्ण भारत में एक समान कानून नहीं है। राष्ट्र माता का दर्जा मिलने से यह राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी हो सकेगा।

लाभ:
✔ गौ हत्या और गौ तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
✔ गोवंश की संख्या में बढ़ोतरी होगी, जिससे जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा।


2. गौ संरक्षण को संवैधानिक दर्जा

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से इसे संवैधानिक संरक्षण मिलेगा। इससे सरकार और प्रशासन पर गौ रक्षा के लिए कठोर नीतियां लागू करने की जिम्मेदारी आएगी।

लाभ:
✔ गौशालाओं को अधिक सरकारी सहायता मिलेगी।
✔ गौ आधारित शोध और चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा।
✔ गौमूत्र और पंचगव्य चिकित्सा को आधिकारिक मान्यता मिल सकेगी।


3. सनातन संस्कृति को मजबूती

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति को नया बल मिलेगा। हजारों वर्षों से चली आ रही गौ पूजन की परंपरा को संवैधानिक मान्यता मिलेगी, जिससे भारतीय समाज अपनी जड़ों से और अधिक जुड़ सकेगा।

लाभ:
✔ सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार होगा।
✔ गौ माता के प्रति श्रद्धा और सम्मान में वृद्धि होगी।
✔ देश में धार्मिक सौहार्द्र और आध्यात्मिक चेतना बढ़ेगी।


4. गौ आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

गौ माता केवल आध्यात्मिक महत्व नहीं रखती बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जैविक खेती, गौ आधारित चिकित्सा, और पंचगव्य उत्पादों का उपयोग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।

लाभ:
✔ जैविक खाद और गौमूत्र से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसान आत्मनिर्भर होंगे।
✔ पंचगव्य उत्पादों (गौ मूत्र, गोबर, दूध, घी, दही) का व्यापार बढ़ेगा।
✔ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


निष्कर्ष

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने से भारत को सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से लाभ मिलेगा। यह न केवल गौ रक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम होगा, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा। यदि सरकार और समाज मिलकर इस दिशा में कार्य करें, तो आने वाले समय में भारत पुनः अपनी गौरवशाली परंपराओं को पुनर्स्थापित कर सकता है।

"गौमाता का सम्मान – राष्ट्र का उत्थान!"



जय गौमाता राष्ट्रमाता

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से क्या लाभ होगा?

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से कई सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ हो सकते हैं। कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

1. संस्कृति और धार्मिक महत्व

  • हिंदू धर्म में गौ माता को पूजनीय माना गया है। उन्हें राष्ट्र माता घोषित करने से भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मजबूती मिलेगी।
  • देशभर में गौ रक्षा और संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।

2. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ

  • देशी गायों से प्राप्त गोबर और गौमूत्र का उपयोग जैविक खेती में किया जाता है, जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी और खेती अधिक उपजाऊ बनेगी।
  • गोपालन से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

3. स्वास्थ्य संबंधी लाभ

  • देशी गाय का दूध, घी और अन्य उत्पाद पोषण से भरपूर होते हैं और आयुर्वेद में इन्हें स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।
  • गौमूत्र और पंचगव्य चिकित्सा को और अधिक मान्यता मिलेगी, जिससे प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा।

4. पर्यावरण संरक्षण

  • अधिक गौपालन से जैविक खाद का उपयोग बढ़ेगा, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और जल प्रदूषण कम होगा।
  • गायों की रक्षा से पारंपरिक पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा, जो पर्यावरण के अनुकूल है।

5. गौहत्या पर नियंत्रण

  • गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से गौहत्या पर कठोर प्रतिबंध लग सकता है, जिससे पशु संरक्षण को बल मिलेगा।
  • इससे अवैध कत्लखानों पर नियंत्रण होगा और गौ तस्करी कम हो सकती है।

निष्कर्ष

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक खेती, स्वास्थ्य और पर्यावरण को लाभ मिलेगा। इससे भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने में मदद मिल सकती है।



शनिवार, 15 फ़रवरी 2025

जन प्रतिनिधि (राजनेता) कैसे गौसेवा कर सकते है

जन प्रतिनिधि (राजनेता)

विश्व के सबसे बड़े प्रजातंत्र के सम्बल, जन प्रतिनिधियों में समाज को दिशा देने (Direction) की अद्भुत क्षमता होती है। भारतीय संसद और विधानसभाओं, विधानमण्डलों में लगभग नौ हजार जन प्रतिनिधि है। गौरक्षा एवं गौ संवर्धन के प्रति उनकी प्रबिध्दता भारत की काया पलट कर सकती है। जन प्रतिनिधि निम्नलिखित तरीकों से गौ सेवा के महाआंदोलन में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर सकते हैं :-

1. राष्ट्रीय गोवंश आयोग की रिपोर्ट को 100% लागू करवाने का भरसक प्रयास करें।

2. संसद एवं विधानसभाओं में गोमाता एवं गोवंश के हत्यारों के विरुध्द कठोरतम कानून बनाये जावें। संत विनोबा भावे ने कहा था - "गौ हत्या मातृ हत्या ही है।"

3. अपने घरों, बंगलों में गौ माता रखकर गो सेवा करें व आनेवालों को गो सेवा हेतु प्रेरित करें।

4. अपने भाषणों, वक्तव्यों में गोरक्षा, गोसेवा गौसंवर्धन जैसे विषयों का उल्लेख करें व जनमानस तैयार करें।

5. गौ हत्यारों के खिलाफ पुलिस प्रशासन को कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने हेतु दबाव बनावें ।

६. समय-समय पर संसद व विधानसभाओं में गो रक्षा, गो हत्या, गो संवर्धन के प्रश्न उठाकर वातावरण तैयार करें ।

७. स्वयं पंचगव्य निर्मित पदार्थों तथा औषधियों का प्रयोग करें व जनता से भी उनका प्रयोग करने का आव्हान करें ।

८. अपने निर्वाचन क्षेत्रों में अधिकाधिक गो शालाएँ खुलवाकर उनके समुचित प्रबंधन की व्यवस्था करें व शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता व अनुदान दिलवाने के प्रयास करें ।

८. गो पर्व एवं गो उत्सव यथा गोपाष्टमी, गोवत्स व्दादशी, बलराम जयंती (हलधर षष्ठी), श्री कृष्ण जन्माष्टमी इत्यादि के बडे आयोजन करें ।

९. जैविक कृषि के पक्ष में व रासायनिक खेती के विरुध्द वातावरण बनाएँ, संसद व विधानसभाओं में इस संबंध में उचित कानून बनाने हेतु प्रयास करें।

१०. स्वयं गौग्रास निकाले, गौ सेवा हेतु धन संग्रह कर उचित उपयोग करें ।

११. अपने राजनैतिक दल को राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, खाद्यान्न व पर्यावरण सुरक्षा में गोवंश के योगदान व महत्व से अवगत करवाकर, दलगत राजनीति से उपर उठने व गोरक्षा एवम् गोसवंर्धन हेतु आवाज उठाने के लिये सहमत व प्रेरित कर अपने नैतिक कर्तव्य का निर्वाह करना चाहिये।

१२. गोरक्षा से संलग्न कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुलझाने में सक्रिय सहयोग प्रदान कर गौसेवा करनी चाहिये।

१३. किसानों को जैविक कृषि हेतु पंचगव्य से निर्मित कीटनाशक, फसलरक्षक व बैलचलित उपकरणों व उर्जा के साधनों में शासन से ऋण व अनुदान दिलवायें।

१४. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में पंचगव्य आयुर्वेद पाठ्यक्रम, पंचगव्य चिकित्सा व औषधि को सम्मानजनक स्थान दिलावें ।