बुधवार, 21 अगस्त 2024

पुलिस अधिकारी कैसे गौसेवा कर सकते है ।

पुलिस विभाग

आप कानून के रक्षक हैं, समाज के प्रहरी हैं, हिंसा व अत्याचार को रोककर समाज में शांति स्थापित करने का दायित्व आपके कंधो पर हैं। आपके हौसलों की बुलंदि ही असामाजिक तत्वों के हौसलों को पस्त करती हैं। आपकी सजगता व तत्परता पर ही अहिंसा व शांति की नींव टिकी हैं, आपकी ईमानदारी व नैतिकता से ही असामाजिक तत्वों का अस्तित्व मिट सकता हैं। आइये, गोवंश की करूण व्यथा को समझें एवम् गोरक्षा हेतु कुछ पुनीत कार्य करें।

१. गोहत्याबंदी कानून का सख्ती से पालन करवाना चाहिये।

२. गाय पर होनेवाले अत्याचारों का विरोध करना चाहिये।

३. गोहत्या से संबधित दोषियोंको सख्त से सख्त सजा दिलवाने का प्रयास करना चाहिये।

४. किसी भी प्रकार के प्रलोभन को अस्वीकार कर, गोहत्याबंदी कानून का सख्ती से पालन करवाना चाहिये।

५. गौरक्षा आंदोलन को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिये।

६. गौरक्षा से जुडे कार्यकर्ताओं से सभ्य व्यवहार करना चाहिये

अधिवक्ता (वकील) कैसे गौसेवा कर सकते है।

अधिवक्ता (वकील)

'तर्को प्रतिष्ठा" के माध्यम से अधिवक्ता सत्य के अन्वेषण में अपना महत् योगदान देता है। भारत की सांस्कृतिक चेतना एवं राष्ट्रीय सुदृढता के लिए आवश्यक गौ सेवा, गौ रक्षा व गोसंवर्धन के इस सत्यान्वेषी कार्य को अधिवक्ता गण निम्नलिखित अकाट्य तर्कों को प्रतिष्ठित कर सफल कर सकते है :

१. गो हत्या के प्रकरणों में दोषियों को सजा दिलवाने हेतु अधिवक्तागण एकजुट होकर मुकदमा लडें ।

२. 'कोई भी अधिवक्ता गोवंश हत्यारों का मुकदमा नही लडेगा' ऐसा वातावरण बार काउंसिल में तैयार करे । उल्लेखनीय है कि बलात्कारियों के खिलाफ देश के कई स्थानों की बार काउंसिलें ऐसा निर्णय कर आदर्श प्रस्तुत कर चुकी है।

३. गोवंश माँस निर्यात निरोध सम्बंधी विभिन्न कानूनों से आम जन को परिचित करावें।

४. प्रशासन के किसी विभाग व्दारा या किसी व्यक्ति, संस्था व्दारा गोवंश रक्षण व संवर्धन सम्बंधी कानूनों का उल्लंघन किये जाने पर, तुरंत जनहित याचिका दायर करना चाहिए, पूरी गंभीरता से मुकदमा लड़ना चाहिए ।

५. गोवंश रक्षण व संवर्धन सम्बंधी कानूनों में कमियाँ खोजकर उन्हे अधिक असरकारी बनाने हेतु अधिवक्ता संगठनों के माध्यम से प्रयास करना चाहिए । राष्ट्र एवं राज्यों के गोवंश रक्षा कानून अत्यधिक कठोर, धारदार व कारगर बने इस हेतु प्रयास करें ।

६. गोरक्षा व संवर्धन से जुडे कार्यकर्ताओं से तालमेल कर उन्हे इसके कानूनी पक्ष की सम्पूर्ण जानकारी देवें । इस हेतु प्रशिक्षण शिबिर आयोजित करें ।

७. स्वयं पंचगव्य आधारित पदार्थों, औषधियों का प्रयोग करें व अन्य को इसके लिए प्रेरित करें ।

८. घर में गाय पालकर गो सेवा करें व समाज के अन्य लोगों में इसके लिए रुचि जाग्रत करें ।

९. गोपर्व, गो उत्सवों में सक्रिय भागीदारी करें। समाज में अपनी प्रतिष्ठित स्थिति का उपयोग गो हित में करें ।

१०. गो सेवा हेतु धन संग्रह एवं वस्तु संग्रह में सहयोग करें ।


रविवार, 2 जून 2024

गौशाला संचालक

गौशाला संचालक

गोशाला तैंतीस कोटी देवी-देवताओं का मंदिर हैं, राष्ट्र का विकासपथ इसी मंदिर से प्रारंभ होता हैं, रासायनिक कृषि एवम् औषधि से पीडित मातृभूमि, जनस्वास्थ्य व पर्यावरण की रक्षा का दायित्व आप पर ही राष्ट्र को बचा सकते हैं आपकी दृढइच्छाशक्ति एवम् संकल्प क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता हैं, आपकी मेहनत इस राष्ट्र को प्रगती के उच्च पायदान पर खडा कर सकती हैं। आइये, प्राचीन विज्ञान को उजागर करें, खाद्यान्न, स्वास्थ्य, उर्जा व पर्यावरण की समस्याओं से जूझ रहे इस राष्ट्र में गोवंश आधारित विकास" की परिकल्पना को साकार करें व मातृभूमि को उसका खोया वैभव व गौरव पुनः दिलायें।

1. जैविक कृषि हेतु गोबर एवं गोमुत्र एकत्रित कर उनसे खाद कीट नियंत्रक उर्वरक निर्मित करे, विक्री करें एवम् प्रशिक्षण देवें।

2. गौनस्ल सुधार कार्यक्रम चलाये।

3. पंचगव्य आधारित औषधियों के निर्माण एवं विक्रय हेतु लोगों को प्रशिक्षित करें।

4. गोबर गॅस प्लांटो के संचालन गॅस वितरण एवं संबंधित कुटीर उद्योग विकसित करे।

5. ऋतु के अनुसार गौ-आहार (चारा, संतुलित दादा, चुन्नी चोकर एवं खनिज लवण) गौवंश के लिए उपलब्ध कराये।

6. किसान सम्मेलन आयोजित कर जैविक कृषि की महत्ता एवं उपयोगिता प्रचारित करे।

7. पंचगव्य द्वारा निर्मित पदार्थों के उपयोग को प्रचार माध्यमों द्वारा प्रचारित एवं प्रसारित करने की व्यवस्था करें।

8. गौ-शाला मे गौ-ग्रास दान पेटी लगाये एवं समय-समय पर गौ उत्सवों एवं गौ-पर्वो का आयोजन करे।

9. गौशाला, पंचगव्य औषधी व कृषि उत्पाद तथा पंचगव्य से निर्मित उर्जा केन्द्रो में विद्याथियों की शैक्षणिक यात्रा का आयोजन करें।

शनिवार, 1 जून 2024

"राष्ट्रीयता का दीप जलाएं"

धर्मपराण भारत हजारों वर्षों से सम्पूर्ण संसार में आध्यात्म का दीपक जलाकर उसे प्रकाशमान करता रहा है दूसरों को ज्ञानरूपी दीपक से प्रकाशमान करते रहने वाला भारत स्वाधीनता के बाद से ही स्वयं व्यक्तिगत स्वार्थों, अनैतिकता, अलगावाद, भरष्टाचार, जैसे अंधकारो घिर कर तेजहीन क्यों होता जा रहा है? क्या कभी हमनें इसका लेखाजोखा करने की आवश्यकता महसूस की है? धर्म तथा आध्यात्म व गोसेवा-गोरक्षा भारत के प्राण थे और रहेंगे । भारत ने हमेशा अति भौतिकवाद और अशान्ति के अंधकार में डूबे पश्चिम को मानवतावाद, शान्ति तथा भाईचारे का प्रेरक संदेश देकर वहां प्रकाश बिखेरा था । आज आध्यात्म व गोसेवा-गोरक्षा को छोड़कर भारत स्वयं संकटग्रस्त है । इसलिए आइये फिर धर्म, आध्यात्म व गोसेवा-गोरक्षा की तरफ लौटकर भारत की सुख, सम्रद्धि व खुशहाली के लिए 'राष्ट्रीयता का दीपक ' जलाएं। 

गुरुवार, 7 मार्च 2024

चिकित्सक (डॉक्टर) कैसे गौसेवा कर सकते है।

चिकित्सक
(ऍलोपॅथी, होम्योपॅथी व अन्य)

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। राष्ट्रोनति का कार्य स्वस्थ मानसिकता में ही निहित है। चिकित्सक जनजन को स्वस्थ मन- मस्तिष्क उपलब्ध करा कर सच्ची राष्ट्र सेवा करते है। गो रक्षा एवं गौ संवर्धन हेतु चिकित्सक समाज में अपनी विशेष स्थिति का उपयोग कर कई गुना अधिक कार्य कर सकते है। अधोलिखित बिन्दुओं पर विचार करें व क्रियान्वित करे यही आग्रह है :

१. अपने दवाखाने में गौमाता का चित्र लगावें और आने वाले मरीजों को गो दुग्ध पान की सलाह दें।

२. घर में गाय पालें व गौ सेवा करें, अन्य को भी इस हेतु प्रेरित करें ।

३. पंचगव्य औषधियों का विभिन्न बीमारियों पर असर लगातार देखें एवम् सफल व कारगर नुस्खों का चार्ट बनाकर अपने दवाखाने में लगावें ।

४. गोपर्व, गो उत्सव जैसे, गोवत्स व्दादशी, बलराम जयंती (हलधर षष्ठी), श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गोपाष्टमी, मकर संक्रांति इत्यादि उत्साहपूर्वक मनावें व अन्य को भी प्रेरित करें ।

५. अन्य चिकित्सकों के बीच गोरक्षा, गोसंवर्धन सम्बंधी चर्चा करें, उन्हें भी इस हेतु प्रेरित करें ।

६. मरीजों को गोसेवा कर आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने की सलाह देवें ।

७. गो दुग्ध, गोघृत के उपयोग पर अभियान चलाएं ।

८. स्वयं गोग्रास निकालें, अन्य को भी प्रेरित करें ।

९. गोसेवा, गोरक्षण व गो संवर्धन हेतू धन संग्रह में सहयोग देवें ।

१०. गाय के रक्त से बनी डेक्सोरेंज सीरप, गोवंश के पॅनक्रिआज से प्राप्त इंसूलिन, जिलेटीन वाले कॅपसुल, गोवंश की हड्डियों से बनी Heamaccel औषधि व अन्य कॅलशियम पूरक औषधियों का रोगोपचार में उपयोग नहीं करना चाहिये व वैद्यकीय क्षेत्र में इस विषय पर जनजागरण करना चाहिये।

११. पंचगव्य औषधियों की चिकित्सा संबधित सफलताओं, अनुसंधानात्मक खबरों को विशेष रूची के साथ पढ़ें।

१२. उपरोक्त जानकारियों की अपनी पध्दति से जाँच-परख कर, संतोषजनक पाये जाने पर, पंचगव्य औषधि का रूग्णों के इलाज में उपयोग करें।

१३. पंचगव्य व संबधित विषयों को अर्वाचिन क्षेत्र के अनुसंधान में प्राथमिकता दें।

१४. पंचगव्य आयुर्वेद में चल रहे अनुसंधान कार्यों में आवश्यकता पड़ने पर सलाह, मार्गदर्शन प्रदान करें।

वैद्य कैसे गौसेवा कर सकते है

आयुर्वेद पध्दति से इलाज करने वाले "वैद्य" हजारों वर्षों से भारतीय जन को स्वास्थ प्रदान करते आये है। ऐलोपॅथी के इस युग में भी "वैद्य" गाँव - गाँव में विराजमान है व सेवा कर रहे है। आज भी भारत के लाखों गाँवो के निवासियों के जीवनदाता वैद्य ही है। गोमाता व वैद्य का रिश्ता हजारों वर्षों से अटूट बना हुआ है। गोरक्षण गो संवर्धन गोर्सेवा का कार्य इनकी रग रग में है। निम्न बिन्दु स्मरणार्थ समर्पित है :-

र्जा

)

१. पंचगव्यें (गोदुग्ध, गोबर, गोमूत्र, गोघृत, गोदहि) से निर्मित औषधियों का प्रयोग बीमारियों के इलाज में अधिक से अधिक करें तथा इसका प्रचार करें ।

२. स्वस्थ बने रहने में पंचगव्य के महत्वपूर्ण योगदान का प्रचार आम जन में करें ।

३. व्रणरोपन (ड्रेसिंग) में डेटॉल इत्यादि के बजाय "गो अर्क", त्वचा संबंधी विकारों में सोफ्रामायसिन के बजाय जात्यादि घृत जैसे विकल्प अपनायें ।

४. अर्वाचीन चिकित्सा (ऐलोपॅथी) से होने वाले दुष्प्रभावों (साईड इफेक्टस्) की जानकारी जन सामान्य को देवें । तुलनात्मक पंचगव्य औषधियों की सफलता की जानकारी भी देवें ।

५. पंचगव्य आयुर्वेद का विशेष रुचि के साथ अध्ययन करें। नये छात्रों को पंचगव्य आयुर्वेद अध्ययन की सलाह देवें ।

६. संगोष्टियों में पंचगव्य अनुसंधान पर शोधपत्र प्रस्तुत कर दुसरे वैद्यों को भी इस विषय से जुडने हेतु प्रोत्साहित करें ।

७. सब लोगों को भारतीय नस्ल की गाय के दुग्ध पान की प्रेरणा देवें ।
८. अपने कार्यस्थल पर गो माता का चित्र लगावें व घर में अनिवार्य रुप से गाय पालकर गो सेवा करें ।

९. गो पर्वो व गो उत्सवों जैसे गोपाष्टमी गोवत्सव्दादशी, बलराम जयंती (हलधर षष्ठी), श्री कृष्ण जन्माष्टमी इत्यादी मनाने की प्रेरणा लोगों को देने और स्वयं भी मनावें ।

१०. गो सेवा, गो शाला हेतु धन संग्रह करने में सहयोग देवें ।

११. स्वयं पंचगव्य औषधि निर्माण करें।

१२. गाय के रक्त से बनी डेक्सोरेंज सीरप, गोवंश के पॅनक्रिआज से प्राप्त इंसुलिन, जिलेटीन वाले कॅपसुल, गोवंश की हड्डीयों से बनी Heamaccel औषधि व अन्य कॅल्शियमयुक्त औषधियों का रोगोपचार में उपयोग नहीं करना चाहिये व वैद्यकीय क्षेत्र में इस विषय पर जनजागरण करना चाहिये।

बुधवार, 14 फ़रवरी 2024

शिक्षक कैसे गौ सेवा कर सकते है

शिक्षक व शिक्षालय


शिक्षालय (विद्यालय) वे कारखाने हैं जहाँ राष्ट्रीय चरित्र को दिग्दर्शित करने वाले उपकरण (विद्यार्थी) गढे जाते हैं। यहाँ का मुख्य अभियांत्रिक शिक्षक है। शिक्षक राष्ट्र निर्माता है। शिक्षालयों को गौ संवर्धन व गौरक्षण का प्रेरणा केन्द्र निम्नांकित निश्चयों से बनाया जा सकता है :-


१. विद्यार्थियों को बाल्यकाल से ही गोवंश की महिमा व अनिवार्यता का बोध कराया जाना चाहिए। शास्त्रों, पुराणों इत्यादि भारतीय वांङ्गमय में उद्‌धृत गौ माता सम्बंधी उध्दरणों को कक्षाओं में पढ़ाया जाना चाहिए।


२. प्रत्येक विद्यालय में गाय रखी जावें और शिक्षक विद्यार्थी मिलकर गो सेवा करें जिससे अल्पायु से ही गो भक्त नागरिक तैयार हों।


३. शिक्षक कक्षाओं में पंचगव्य का महत्व बतावें।


४. पाठ्यक्रमों में गो सेवा व गो महिमा के अध्याय सम्मिलित किये जावें।


५. शिक्षक पंचगव्य से निर्मित मंजन, साबुन, शैम्पू, औषधियों का उपयोग करें व विद्यार्थियों से इनका प्रयोग करने का आग्रह करे।


६. जैविक खाद के उपयोग से पैदा अन्न, फल, सब्जी का उपयोग करने का आग्रह विद्यालयों में किया जावें।


७. विद्यार्थियों को भारतीय नस्त की गाय के गौदुग्ध पान के महत्व का व्यापक प्रचार किया जावे। विद्यालयों में गौ दुग्ध उपलब्ध हो।


८. स्वास्थ्य व पर्यावरण के हित में गौ वंश के महत्त्व को प्रचारित कर विद्यार्थियों को सुशिक्षित किया जाए।


९. विद्यालयों में पंचगव्य औषधि व जैविक कृषि, गो रक्षा का महत्व, जैसे विषयों पर निबंध, वाद-विवाद, भाषण, पोस्टर प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँ।


१०. विद्यालयों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गोपाष्टमी, बलराम जयंती इत्यादि गोपौँ व गो उत्सवों को मनाया जाए।


११. रासायनिक कृषि के भुमी, स्वास्थ्य व पर्यावरण पर पडनेवाले दुष्प्रभावों की विद्यार्थियों को जानकारी देनी चाहिये।


१२. गौशाला, पंचगव्य औषधि व कृषि उत्पाद तथा पंचगव्य से निर्मित उर्जा केन्द्रों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक का आयोजन करें।